जबरिया स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगाए जाने पर नियामक आयोग सख्त, पावर कारपोरेशन से मांगा जवाब
केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने अधिसूचना जारी करके प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता को खत्म कर दिया है। इसके बाद भी प्रीपेड मीटर लगाए जा रहे हैं। इस मामले को नियामक आयोग ने संज्ञान में लिया है। आयोग ने इस संबंध में पावर कारपोरेशन से 10 दिन में जवाब मांगा है।
Smart Electricity Meter: जबरन बिजली मीटर प्रीपेड करने और नए कनेक्शन प्रीपेड मोड में ही दिए जाने के मामले में नियामक आयोग ने पावर कॉरपोरेशन से 10 दिन में रिपोर्ट तलब की है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण ने अधिसूचना जारी करके प्रीपेड मीटर की अनिवार्यता समाप्त कर दी थी। अधिसूचना के बाद भी यूपी में प्रीपेड मीटर ही लगाए जा रहे हैं। अभी तक 70 लाख मीटर प्रीपेड मोड में बदले जा चुके हैं जबकि नए कनेक्शन भी प्रीपेड मीटर पर ही दिए जा रहे हैं।
आरोप है कि कॉस्ट डाटा बुक के अध्याय-4 ‘सिक्योरिटी’ में दी गई व्यवस्था का हवाला देकर प्रदेश में नए बिजली कनेक्शन केवल प्रीपेड मोड में दिए जा रहे हैं। मौजूदा पोस्टपेड कनेक्शनों को उपभोक्ताओं की सहमति के बिना ही प्रीपेड मोड में परिवर्तित किया जा रहा है जबकि कॉस्ट डाटा बुक में दी गई व्यवस्था को विद्युत अधिनियम-2003 व केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण द्वारा समय पर जारी निर्देशों के तहत लागू करना होता है। बिजली कंपनियों के इस काम पर जल्द रोक लग सकती है। नियामक आयोग ने इस मामले को गंभीरता से लिया है।
उपभोक्ता परिषद ने नियामक आयोग से की थी शिकायत
दरअसल इस मुद्दे पर बढ़ते आक्रोश और प्रदेश भर में स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उत्पन्न स्थिति को देखते हुए उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग के समक्ष अर्जेंसी एप्लीकेशन प्रस्तुत की थी, जिसमें तत्काल हस्तक्षेप और निर्णय की मांग की गई। आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार एवं सदस्य संजय कुमार सिंह के निर्देश पर आयोग के सचिव द्वारा पावर कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक एवं अध्यक्ष के लिए तत्काल निर्देश जारी कर 10 दिन में पूरी रिपोर्ट तलब की गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि उपभोक्ता परिषद द्वारा उठाए गए मुद्दे गंभीर हैं।
बिजली कंपनियों की मनमानी पर लगेगी रोक: अवधेश
उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष एवं राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि अब बिजली कंपनियों की मनमानी पर रोक लगेगी। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि कंपनियां गलत जवाब देती हैं या भारत सरकार के आदेशों का उल्लंघन जारी रखती हैं, तो उनके विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना आयोग की जिम्मेदारी है। उपभोक्ता परिषद ने पहले ही बिजली कंपनियों द्वारा विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 47(5) के उल्लंघन के लिए अवमानना याचिका दाखिल कर रखी है।




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