NCRB रिपोर्ट : यूपी में कम हुए महिला अपराध और दलित उत्पीड़न, छेड़छाड़ की घटनाएं 50% घटी
यूपी में महिला अपराध और दलित उत्पीड़न कम हुए।छेड़छाड़ की घटनाएं 50% घटीं हैं। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट क्राइम इन इंडिया-2024 के तीन वर्षीय तुलनात्मक आंकड़े प्रदेश की कानून-व्यवस्था में निरंतर सुधार दर्शाते हैं।

NCRB Report: यूपी की जिस बदली कानून-व्यवस्था की चर्चा दूसरे राज्यों में भी होती है, उस पर राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के आंकड़े भी मुहर लगाते हैं। महिलाओं के साथ होने वाले अपराध, अपहरण, दलितों के खिलाफ अपराधों और संगीन घटनाओं में आई कमी यूपी पुलिस को भी राहत देने वाली है। एनसीआरबी की ताजा रिपोर्ट क्राइम इन इंडिया-2024 के तीन वर्षीय तुलनात्मक आंकड़े प्रदेश की कानून-व्यवस्था में निरंतर सुधार दर्शाते हैं।
यूपी में सबसे अधिक गिरावट दहेज हत्या के मामलों में देखने को मिली है। वर्ष 2023 में यूपी में दहेज हत्या के 2,122 मुकदमे दर्ज हुए थे, जिनकी संख्या 2024 में 1,047 रही। महिलाओं के साथ होने वाले इस जघन्य अपराध में 50 प्रतिशत से अधिक की कमी दर्ज की गई। वहीं वर्ष 2022 के आंकड़ों की तुलना करें तो दहेज हत्या के मामलों में 51 प्रतिशत की कमी देखी गई। इसके अलावा दुष्कर्म 8.7 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। यूपी में 2023 में दुष्कर्म के 3,516 मामले दर्ज हुए थे और 2024 में इनकी संख्या 3,209 रही। 2022 की तुलना में दुष्कर्म के मामलों में 13 प्रतिशत की कमी आई।
महिला हत्या में भी आई कमी
महिलाओं की हत्या की घटनाएं भी कमी हुई है। ऐसी घटनाएं 2023 की तुलना में 2024 में 4.8 प्रतिशत कम हुईं। 2023 में महिलाओं की हत्या के 702 मामले दर्ज हुए थे, जिनकी संख्या 2024 में 668 रही। छेड़छाड़ की घटनाओं में भी 50 फीसद से अधिक कमी हुई। 2023 में ऐसे मामले 9,453 थे और 2024 में 4,418 रहे। एंटी रोमियो स्क्वाड की प्रभावी कार्रवाई और प्रदेश में महिला पुलिस कर्मियों की बढ़ी संख्या महिला अपराध के नियंत्रण में कारगर साबित हो रही है।
अपहरण के मामलों में आई 62.8 फीसदी की कमी
अपहरण की घटनाओं में भी प्रभावी नियंत्रण देखने को मिला। वर्ष 2023 में दर्ज अपहरण के 14,272 मामले थे और 2024 में इनकी संख्या घटकर 5,306 रह गई। इस अपराध में 62.8 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पुलिस गश्त के पहले से अधिक प्रभावी होने के साथ ही घटनाओं को लेकर बढ़ी मानीटरिंग का परिणाम है कि संगीन घटनाएं कम हो रही है। वहीं जानकारों का कहना है कि एसटीएफ द्वारा एनकाउंटर और हाफ-एनकाउंटर के भय से भी ये कमी आई है।
इन घटनाओं में भी आई कमी
डकैती - 2023 में 73 घटनाएं हुई थीं और 2024 में 57। इस अपराध में 21.9% की कमी।
लूट - 2023 में 1,354 घटनाएं हुई थीं और 2024 में 1,163। लूट में 14.1% की कमी।
चोरी - 2023 में 6,968 घटनाएं हुई थीं और 2024 में 3,753। चोरी में 46.1% की कमी।
स्थिर रहे संज्ञेय अपराध
भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के तहत दर्ज कुल संज्ञेय अपराध स्थिर रहे। वर्ष 2023 में 4,28,794 मामलों के मुकाबले 2024 में 4,30,552 मामले दर्ज किए गए। इनमें 0.4% की वृद्धि हुई।
एससी-एसटी के विरुद्ध कम हुआ अपराध
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (एससी-एसटी) वर्ग के लोगों के विरुद्ध अत्याचार के मामलों में भी कमी दर्ज की गई। 2023 में इससे जुड़े 15,130 मामलों की तुलना में 2024 में 14,642 मामले दर्ज हुए। एससी-एसटी समुदाय के लोगों की हत्या के मामलों में 7% की कमी हुई। ऐसे अपराध 2023 में 157 के स्थान पर 2024 में घटकर 146 रहे। दुष्कर्म के मामले भी 2023 में 645 के मुकबाले 2024 में घटकर 575 रहे।
घरेलू उत्पीड़न बढ़ा
घरेलू उत्पीड़न के मामलों को देखें तो 2024 में ऐसे 21,266 मामले दर्ज हुए। 2023 की तुलना में ऐसे मामलों को 6.9% की वृद्धि हुई।




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