मानवता हुई शर्मसार! वृंदावन में जमा में घंटों फंसा रहा मोक्ष वाहन, श्रद्धालुओं की भीड़ बनी मुसीबत
वृंदावन में स्थानीय निवासी का शव मोक्ष वाहन के माध्यम से अंतिम संस्कार के लिए यमुना किनारे स्थित मोक्षधाम ले जाया जा रहा था। लेकिन जैसे ही मोक्ष वाहन राधा रमण-निधिवन मंदिर मार्ग पर पहुंचा, वहां मौजूद भारी भीड़ में बुरी तरह फंस गया। स्थिति इतनी भयावह थी कि मोक्ष वाहन घंटों तक वहीं जाम में खड़ा रहा

धर्मनगरी वृंदावन में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की भीड़ अब स्थानीय लोगों के लिए गंभीर समस्या बनती जा रही है। मंदिर क्षेत्रों में अत्यधिक भीड़ के कारण जहां एक ओर वृंदावन वासियों की दैनिक दिनचर्या प्रभावित हो रही है, वहीं दूसरी ओर ऐसे हृदय विदारक दृश्य भी सामने आ रहे हैं जो मानवता को झकझोर रहे हैं। रविवार को ऐसा ही एक पीड़ादायक दृश्य निधिवन राज मंदिर और राधा रमण मंदिर क्षेत्र में देखने को मिला।
श्रद्धालुओं की भीड़ में फंसा मोक्ष वाहन
जानकारी के अनुसार एक स्थानीय निवासी का शव मोक्ष वाहन के माध्यम से अंतिम संस्कार के लिए यमुना किनारे स्थित मोक्षधाम ले जाया जा रहा था। लेकिन जैसे ही मोक्ष वाहन राधा रमण-निधिवन मंदिर मार्ग पर पहुंचा, वहां मौजूद भारी भीड़ में बुरी तरह फंस गया। स्थिति इतनी भयावह थी कि मोक्ष वाहन घंटों तक वहीं जाम में खड़ा रहा और परिजन बेबस होकर अपने प्रियजन के अंतिम संस्कार के लिए रास्ता खुलने का इंतजार करते रहे।
प्रशासनिक लापरवाही आई सामने
इस दौरान श्रद्धालुओं की भीड़, अव्यवस्थित यातायात और प्रशासनिक लापरवाही साफ नजर आई। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पहली घटना नहीं है, बल्कि आए दिन इस तरह की समस्याएं सामने आ रही हैं। भीड़ नियंत्रण, यातायात व्यवस्था और आपातकालीन मार्गों की कोई ठोस व्यवस्था न होने के कारण हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। नगरवासियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए गए, तो भविष्य में और भी गंभीर स्थितियां उत्पन्न हो सकती हैं।
आपातकालीन वाहनों के लिए अलग मार्ग हो
लोगों ने मांग की है कि मंदिर क्षेत्रों में विशेष रूप से आपातकालीन वाहनों के लिए अलग मार्ग सुनिश्चित किया जाए और भीड़ नियंत्रण के लिए सख्त व्यवस्था लागू की जाए। इस पर अपना रोष जताते हुए मां ध्यानमूर्ति सत्संग सेवा संस्थान द्वारा संचालित मोक्ष वाहन के इंचार्ज दीनू पंडित ने कहा कि यह घटना न केवल शासन-प्रशासन की व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े करती है, बल्कि यह भी सोचने पर मजबूर करती है कि आस्था की नगरी में क्या अब मानवीय संवेदनाएं भी भीड़ के दबाव में दम तोड़ने लगी हैं।
पिछले साल श्रद्धालुओं की भीड़ में फंसी थी अर्थी
आपको बता दें इससे पहले बीते साल ठाकुर श्रीबांकेबिहारी मंदिर मार्ग पर श्रद्धालुओं की उमड़ी भीड़ के बीच एक अर्थी फंस गई थी। शवयात्रा में शामिल लोग बड़़ी मुश्किल से अर्थी को भीड़ के बीच से निकालकर ले गए थे। जिसका वीडियो भी वायरल हुआ था।




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