MLA funds provide assistance in case of accidents and general illnesses, CM Yogi announces, action begins दुर्घटना और सामान्य बीमारी में भी विधायक निधि से मदद, सीएम योगी का ऐलान, एक्शन भी शुरू, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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दुर्घटना और सामान्य बीमारी में भी विधायक निधि से मदद, सीएम योगी का ऐलान, एक्शन भी शुरू

जल्द ही विधायक अपनी निधि से 'असाध्य' के अलावा सामान्य बीमारियों और सड़क दुर्घटना के घायलों की भी मदद कर सकेंगे। राजा भैया की मांग पर योगी ने इसका ऐलान किया है। योगी के ऐलान पर ग्राम्य विकास विभाग  ने कार्यवाही शुरू कर दी है।

Tue, 17 Feb 2026 08:03 AMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान, लखनऊ, विशेष संवाददाता
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दुर्घटना और सामान्य बीमारी में भी विधायक निधि से मदद, सीएम योगी का ऐलान, एक्शन भी शुरू

उत्तर प्रदेश के गरीब और जरूरतमंद मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के आश्वासन के बादअब विधायक निधि (MLALAD) के नियमों में ऐतिहासिक संशोधन की तैयारी शुरू हो गई है। जल्द ही प्रदेश के विधायक अपनी निधि का उपयोग न केवल 'असाध्य रोगों' के लिए, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं और सामान्य बीमारियों के इलाज में मदद के लिए भी कर सकेंगे।

इस महत्वपूर्ण बदलाव की नींव कुंडा विधानसभा सीट से विधायक और जनसत्ता दल लोकतांत्रिक के अध्यक्ष रघुराज प्रताप सिंह उर्फ 'राजा भैया' ने रखी। विधानसभा सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा करते हुए राजा भैया ने विधायक निधि के मौजूदा नियमों की विसंगतियों को पुरजोर तरीके से उठाया था। उन्होंने तर्क दिया था कि वर्तमान नियमावली के तहत केवल 'असाध्य रोगों' (जैसे कैंसर या किडनी फेलियर) के लिए ही आर्थिक सहायता का प्रावधान है।

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राजा भैया ने सदन का ध्यान इस ओर खींचा कि "सड़क दुर्घटनाएं या कई अन्य गंभीर बीमारियां तकनीकी रूप से असाध्य रोगों की श्रेणी में नहीं आतीं, लेकिन उनका इलाज इतना महंगा होता है कि गरीब व्यक्ति उसे वहन नहीं कर पाता। यदि 'असाध्य' शब्द की बाध्यता समाप्त कर दी जाए, तो विधायक अपने क्षेत्र के अधिक से अधिक जरूरतमंदों की जान बचा सकेंगे।" मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस सुझाव की सराहना करते हुए सदन में ही आश्वस्त किया था कि सरकार जनहित में इन नियमों को शिथिल करने पर विचार करेगी।

ग्राम्य विकास विभाग ने शुरू किया परीक्षण

मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब शासन स्तर पर हलचल तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, ग्राम्य विकास विभाग विधायक निधि के वर्तमान दिशा-निर्देशों का सूक्ष्मता से परीक्षण कर रहा है। विधानसभा की कार्यवाही समाप्त होते ही विभाग इस संबंध में उच्च स्तरीय बैठकें करेगा, जिसके बाद नए संशोधित शासनादेश जारी किए जाएंगे। इसमें सहायता राशि की सीमा और पात्रता के मानकों को भी पुनर्परिभाषित किया जा सकता है।

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'एक बार मदद' के नियम पर भी उठे सवाल

विधायक निधि के आड़े आने वाली एक और बड़ी अड़चन 'एक बार सहायता' का प्रावधान है। वर्तमान में एक मरीज को पूरी बीमारी के दौरान केवल एक बार ही आर्थिक मदद दी जा सकती है। कई विधायकों का तर्क है कि चूंकि इलाज लंबा चलता है, इसलिए एक बार की सीमित मदद मरीज के लिए नाकाफी साबित होती है। चर्चा है कि नई नियमावली में इस अड़चन को भी दूर किया जा सकता है, ताकि गंभीर मरीजों को किस्तों में या आवश्यकतानुसार दोबारा मदद मिल सके।

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प्रशासनिक जानकारों का मानना है कि इस संशोधन से ग्रामीण क्षेत्रों के उन मरीजों को सबसे ज्यादा लाभ होगा, जो अचानक आई चिकित्सीय आपदा के कारण कर्ज के बोझ तले दब जाते हैं। इस फैसले से यूपी में विधायक निधि का स्वरूप अब और अधिक 'कल्याणकारी' होने जा रहा है।

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