गलतफहमी या गहरी दरार? कानपुर भाजपा में धड़ेबंदी खुलकर आई सामने
कानपुर में पार्षदों और महापौर के बीच चल रही तू-तू, मैं-मैं को भाजपा नेता गलतफहमी बता रहे हैं। हालांकि वह इस पर बोलने से बच रहे हैं। एक माननीय तो ऐसी भी हैं जिन्होंने कहा कि नगर निगम में क्या चल रहा उन्हें कुछ पता नहीं है।

यूपी के कानपुर में पार्षदों और महापौर के बीच चल रही तू-तू, मैं-मैं को भाजपा के तमाम जिम्मेदार इसे जरा सी ‘गलतफहमी’ बता रहे हैं। इस ‘गलतफहमी’ में परिवारवाद का आरोप उछल चुका है। भ्रष्टाचार का इशारे हैं। शक्ति प्रदर्शन है। धड़ेबंदी के सारे पैंतरे आजमाए जा रहे हैं। लेकिन शहर में भाजपा के तमाम जिम्मेदार इसे जरा सी ‘गलफहमी’ बता रहे हैं। एक माननीय तो ऐसी भी हैं जिन्होंने कहा, ‘नगर निगम में क्या चल रहा, कुछ पता नहीं।’ बाकी सबको भी नगर निगम में सब चंगा दिख रहा है। यह बात अलग है कि शहर में अलावों से ज्यादा चिनगारियां महापौर-पार्षद टकराव में छूट रहीं हैं।
नगर निगम महापौर से उन्हीं की पार्टी के कई दिग्गज पार्षदों के बीच दूरियां काफी पहले से बनती चली आ रहीं थीं। यही वजह है कि जो दिग्गज पार्षद नगर निगम सदन में अगली पंक्ति में बैठा करते थे, वे पीछे की तरफ बैठने लगे थे। लगभग डेढ़ साल से ऐसा चल रहा था। तब भी महापौर के पुत्र के हस्तक्षेप को लेकर टकराव शुरू हुआ था। धीरे-धीरे यह विवाद दिलों में सुलगता रहा। 26 दिसंबर 2025 को नगर निगम सदन की बैठक में यह तब बड़ा हो गया जब संत लाल हाता को कब्जाने की कोशिश के चक्कर में सीवर लाइन न बिछाने देने का मामला अशोक नगर वार्ड के पार्षद पवन गुप्ता ने उठाया।
अब लड़ाई पोस्टर वार पर
पिछले दो दिन तक भाजपा में धड़ेबंदी के बीच ऑडियो और वीडियो वायरल करने का वार चला। अब नगर निगम की लड़ाई पोस्टर वार पर आ गई है। नगर निगम सदन में भाजपा पार्षद दल के नेता नवीन पंडित का पुराना पोस्टर वायरल हो रहा है। जब उन्होंने होर्डिंग लगवाई थी जिसमें तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को जिंदाबाद के नारे और फोटो संग अपनी फोटो नीचे दी थी। हालांकि लाइव हिन्दुस्तान वायरल हो रहे इस पोस्टर की पुष्टि नहीं करता।
नेता बोलने से बच रहे, एआई खोल रहा पोल
भाजपा के नेता इस मुद्दे पर साफ बोलने से बच रहे हैं मगर एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) सच्चाई की पोल खोल रहा है। जो सवाल हमने भाजपा के पदाधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से किए वही सवाल एआई से पूछे। ग्रोक, जेमिनी और मेटा एआई ने तो महापौर और पार्षदों के बीच रार का इतिहास से लेकर मौजूदा स्थिति तक बता डाली। ग्रोक ने बिंदुवार विवाद बताया इसमें पहला पार्षदों का निलंबन और सदन में हंगामा बताया। दूसरे नंबर पर भ्रष्टाचार और बेटे के हस्तक्षेप के आरोप बताए। तीसरे प्वाइंट का शीर्षक ‘हिटलरशाही के खिलाफ मोर्चा’ रखा। चौथे नंबर पर राजनीतिक गुटबाजी बताई। पांचवें नंबर पर मौजूदा स्थिति बताई। जेमिनी ने भी यही सारी बातें दीं मगर कोई प्वाइंट नहीं बताए। यह जरूर बता दिया कि इससे पार्टी को बड़ा नुकसान होगा। मेटा ने भी इतिहास के साथ पार्टी को नुकसान होने की बात कही।
चार और भाजपा पार्षद निलंबित पार्षदों के समर्थन में आ चुके हैं
ग्वालटोली से भाजपा अंकित मौर्या ने यह मामला उठा दिया कि खास पार्षदों के वार्डों में काम हो रहा है। कुछ को काम दिया जा रहा है कई जगह काम ही नहीं दिया जा रहा। इन दोनों को नगर निगम सदन की चार बैठकों से निलंबित कर दिया गया। तभी से मामला और गरमा गया है। चार और भाजपा पार्षद निलंबित पार्षदों के समर्थन में आ चुके हैं। संगठन के समक्ष नगर निगम से महापौर के बेटे की मुक्ति दिलाने पर अड़े हुए हैं।
भाजपा नेताओं ने क्या कहा?
कानपुर सांसद रमेश अवस्थी ने कहा कि नगर निगम में महापौर औऱ पार्षदों के बीच कोई विवाद नहीं है। गलतफहमी की वजह से दोनों पक्षों के बीच अनबन हो गई थी। संगठन, हम,महापौर व बागी पार्षद बैठ गिला-शिकवा दूर कर लेंगे। पार्टी मिशन-2027 सब एक होकर सफल बनाएंगे। वहीं, एमएलसी सलिल विश्नोई का कहना है कि नगर निगम में जो भी पार्षद और महापौर के बीच चल रहा है, वह दुर्भाग्यपूर्ण है। यह ऐसा मसला है जो आपस में सुलझा लेना चाहिए।वैसे नगर निगम सफाई और अन्य कार्य शिद्दत से करा रहा है। संगठन ने मामला सुलटाने को संज्ञान लिया है।
गोविंद नगर से भाजपा विधायक सुरेंद्र मैथानी ने कहा किदोनों पक्षों को आपस में समन्वय बना सुलटाना चाहिए। विकास कार्यों पर इसका प्रभाव न पड़ने पाए, इस वजह से संगठन अपने स्तर से संज्ञान ले पार्टी हित में काम करेगी। वैसे गोविंदनगर में विकास कार्य हर क्षेत्र में हो रहे हैं। वहीं, विधायक नीलिमा कटियार ने कहा कि नगर निगम में क्या चल रहा है, इसका पता नहीं है पर कल्याणपुर विस क्षेत्र में कार्यदायी संस्थाएं सक्रियता से काम कर रही है। महापौर-पार्षद विवाद के नफा-नुकसान का आकलन संगठन का काम है,यह जरूर है कि विकास कार्य हो रहे हैं।




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