छुटभैये नेताओं से बेइज्जती न कराएं, चाहें तो गठबंधन तोड़ लें; बीजेपी पर भड़के मंत्री संजय निषाद
मंत्री संजय निषाद भाजपा के कुछ नेताओं के बयानों पर भड़के हुए थे। उन्होंने कहा कि भाजपा को लगता है कि हमारे दल से फायदा नहीं तो वो गठबंधन तोड़ सकती है। छुटभैया नेता अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। भाजपा का कोई नेता घमंड में ना रहे।

यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार में कैबिनेट मंत्री और निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा.संजय निषाद ने अपने तेवरों से राजनीतिक गलियारों में अटकलों का बाजार गर्म कर दिया है। उन्होंने यहां तक कह दिया कि यदि भाजपा को लगता है कि हमसे फायदा नहीं है तो गठबंधन तोड़ दें। लेकिन छुटभैए नेताओं से बेइज्जती न कराएं। कहा कि भाजपा में आयातित नेता अपने बड़बोलेपन से पार्टी लुटिया डूबो रहे हैं। ये नेता सपा, बसपा और कांग्रेस से इंपोर्ट किए गए हैं। ऐसे नेताओं से भाजपा के हाईकमान को सावधान रहना चाहिए।
गोरखपुर के एनेक्सी भवन सभागार में मंगलवार को संजय निषाद, भाजपा के कुछ नेताओं के बयानों पर भड़के रहे। उन्होंने एक पूर्व राज्यसभा सांसद पर हमला बोला। कहा कि भाजपा को लगता है कि हमारे दल से फायदा नहीं तो वो गठबंधन तोड़ सकती है। छुटभैया नेता अनर्गल बयानबाजी कर रहे हैं। भाजपा का कोई नेता घमंड में ना रहे। भाजपा को 2018 की जीत याद रखनी चाहिए। जब लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा एक हो गई थी। निषाद पार्टी का साथ मिलने के बाद भाजपा की बहुत बड़ी जीत हुई थी।
31 अगस्त को जनजाति दिवस मनाएगी निषाद पार्टी
डा.संजय निषाद ने कहा कि हमने परिवारवाद नहीं किया। यहां तक कि अपने बेटे को भी पद से हटाया है। दूसरी पार्टी के हाईकमान अपने बेटे को पद से हटाकर देख लें। मछुआ समाज के आरक्षण को लेकर दिल्ली में दसवीं स्थापना दिवस पर आवाज उठाई गई है। अधिवेशन में निषाद समाज एकजुट था। इसमें कुछ अहम फैसले लिए गए। पार्टी आगामी 31 अगस्त को जनजाति दिवस मनाएगी।
निशाने पर रहे पूर्व राज्यसभा सांसद
डा.संजय निषाद के निशाने पर भाजपा से राज्यसभा सांसद रहे जयप्रकाश निषाद रहे। उन्होंने नाम लिए बगैर कहा कि पूर्व सांसद कमल को हाथ में लेने से पहले हाथी की सवारी कर चुके हैं। वह निषादों को भाजपा से टिकट दिलाने का दावा करते हैं। उनके खुद का टिकट अभी पार्टी में तय नहीं हैं। अगर वह हमारी पार्टी में आए तो हम टिकट देंगे। वह आरक्षण की आवाज उठाएं। विधानसभा घेरें। हम उनके साथ उनके पीछे चलने के लिए तैयार हैं।
संघर्षों से मिली है सफलता
उन्होंने कहा कि निषाद आरक्षण की मांग को लेकर वर्ष 2013 से आंदोलन चल रहा है। शुरू में हम अकेले थे। आंदोलन से कारवां आगे बढ़ता गया। काफी संघर्षों के बाद यह सफलता मिली। इसके बावजूद पिछड़ों में निषादों नाम नहीं है। इसके लिए 75 जिलों में संघर्ष किए हैं। उन्होंने कहा कि शिल्पकारों को अनुसूचित जाति का दर्जा मिला निषादों को नहीं।
बिहार में विधानसभा चुनाव लड़ेगी निषाद पार्टी
उन्होंने कहा कि बिहार में होने वाले विधानसभा चुनाव में निषाद पार्टी शिरकत करेगी। इसके लिए तैयारियां चल रही है। बिहार में पार्टी के संगठन को मजबूत किया जा रहा है। जल्द ही बिहार के जिलों का दौरा करेंगे। इस दौरान वहां के कार्यकर्ताओं से संवाद होगा। तब ही टिकट का एलान होगा। उन्होंने कहा कि हम भगवान राम को मानते हैं। निषादराज के वंशज हैं। मुख्यमंत्री योगी हमारे मार्गदर्शक हैं।
दिल्ली में 10 वें स्थापना दिवस में उठा था निषाद आरक्षण का मुद्दा
पिछले 20 अगस्त को निषाद पार्टी ने नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में अपना 10 वां स्थापना दिवस मनाया था। इस अधिवेशन में जोरशोर से निषादों के आरक्षण का मुद्दा उठाया गया था। अधिवेशन में संजय निषाद के अलावा सुभासपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर भी मंच पर दिखे थे। कार्यक्रम में हजारों की संख्या में पहुंचे मछुआरा समाज के लोगों ने एकजुटता और शक्ति का प्रदर्शन भी किया था। इस सम्मेलन के बाद हुई पार्टी उच्चस्तरीय बैठक में डा.संजय निषाद ने अपने विधायक बेटे सरवन निषाद को प्रदेश प्रभारी पद से हटाने का ऐलान किया था।




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