मदरसा शिक्षकों के वीआरएस पर घमासान, NHRC ने अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक को किया समन
उत्तर प्रदेश में मदरसा नियमावली के खिलाफ जाकर शिक्षकों को वीआरएस (VRS) और पेंशन देने के मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक को समन भेजा है। नियमावली में प्रावधान न होने के बावजूद इस्तीफों को वीआरएस मानकर पेंशन जारी करने की शिकायत पर आयोग ने नाराजगी जताई है।

उत्तर प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण विभाग में मदरसा शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों को स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) देने के मामले में घमासान मचा हुआ है। अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने नियमों के उल्लंघन की शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक को समन जारी कर तलब किया है। विभाग को आगामी 14 मई तक अपना जवाब दाखिल करना होगा।
नियमों में प्रावधान नहीं, फिर भी बांटी जा रही पेंशन
पूरा विवाद मदरसा नियमावली की व्याख्या और उसके क्रियान्वयन को लेकर है। जानकारी के अनुसार, मौजूदा मदरसा नियमावली में शिक्षकों और शिक्षणेत्तर कर्मचारियों के लिए स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) का कोई स्पष्ट विकल्प या प्रावधान मौजूद नहीं है। इसके बावजूद, यह आरोप है कि विभाग के भीतर बड़े स्तर पर खेल चल रहा है। तमाम शिक्षकों और कर्मचारियों ने तकनीकी रूप से अपने पदों से इस्तीफा दिया, लेकिन विभाग ने उन इस्तीफों को वीआरएस की तरह स्वीकार कर लिया। इतना ही नहीं, बिना किसी कानूनी आधार के इन लोगों की पेंशन भी शुरू कर दी गई।
प्रशासनिक चुप्पी ने बढ़ाई नाराजगी
इस वित्तीय और प्रशासनिक अनियमितता की शिकायत राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में की गई थी। शिकायतकर्ता का तर्क है कि जब नियमावली में वीआरएस का प्रावधान ही नहीं है, तो कुछ खास लोगों को उपकृत करने के लिए यह रास्ता कैसे निकाला गया? आयोग ने इस शिकायत को गंभीरता से लेते हुए पूर्व में भी अल्पसंख्यक कल्याण निदेशालय को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था। हालांकि, निदेशालय की ओर से तय समय सीमा के भीतर कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। विभाग की इसी टालमटोल वाली नीति से नाराज होकर आयोग ने अब सशर्त समन जारी किया है।
14 मई को व्यक्तिगत पेशी के आदेश
एनएचआरसी ने स्पष्ट आदेश दिया है कि अल्पसंख्यक कल्याण निदेशक 14 मई को या तो स्वयं उपस्थित हों या अपने किसी अधिकृत प्रतिनिधि के माध्यम से विस्तृत रिपोर्ट पेश करें। आयोग ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी रिपोर्ट पेश करने में कोताही बरती गई, तो इसे मानवाधिकारों और प्रशासनिक जवाबदेही का उल्लंघन मानते हुए आगे की कठोर कार्रवाई की जाएगी।
विभाग में हड़कंप
समन जारी होने के बाद से अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है। जांच इस बात पर टिकी है कि आखिर किसके आदेश पर नियमावली के विरुद्ध जाकर इस्तीफों को वीआरएस में बदला गया और राजकोष पर पेंशन का अतिरिक्त भार डाला गया। इस मामले के खुलासे से कई रसूखदार अधिकारियों और कर्मचारियों पर गाज गिरनी तय मानी जा रही है।




साइन इन