एलपीजी संकट के बीच बिजली का झटका, बकाए में ताबड़तोड़ कटने लगे कनेक्शन, विधायकों की बत्ती भी गुल
यूपी में स्मार्ट प्रीपेड मीटर का सर्वर लाइव होते ही हजारों उपभोक्ताओं के बिजली कनेक्शन ताबड़तोड़ कटने लगे हैं। तकनीकी खामी के कारण रिचार्ज के बावजूद बिजली बहाल नहीं हो सकी। लखनऊ में कई विधायकों की बत्ती भी गुल हो गई है।

Electricity News: ईरान-इजराइल युद्ध के कारण एलजीपी संकट के बीच बिजली विभाग ने लोगों को रूला दिया है। स्मार्ट प्रीपेड मीटर कनेक्शनधारक तमाम उपभोक्ताओं के कनेक्शन मीटर रीचार्ज करवाने के बाद भी शनिवार को नहीं जुड़े। ऐसे लोगों की संख्या हजारों में बताई जा रही है। पावर कॉरपोरेशन ने शुक्रवार को ही स्मार्ट मीटरों के लिए सर्वर लाइव किया था, जिसके बाद नेगेटिव बैलेंस वाले उपभोक्ताओं के कनेक्शन कटने लगे थे। अब तक 70 हजार से ज्यादा लोगों को कनेक्शन कटने का अनुमान है। लखनऊ में दस हजार लोगों के साथ ऐसा हुआ है। इनमें कई विधायक भी शामिल हैं।
प्रदेश में 77 लाख के करीब स्मार्ट प्रीपेड मीटर लग चुके हैं, जिनमें से 70 लाख से ज्यादा प्रीपेड मोड में काम कर रहे हैं। इनमें से काफी उपभोक्ताओं के बैलेंस नेगेटिव हैं। पावर कॉरपोरेशन ने पहले ही उपभोक्ताओं से मीटर रीचार्ज करवाने की अपील की थी, ताकि कनेक्शन न कटें। बावजूद इसके 50 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं के बैलेंस नेगेटिव ही बने रहे, जिसमें से 40 हजार से ज्यादा के कनेक्शन शुक्रवार को ही कट गए थे।
तमाम लोगों ने शुक्रवार को भी बैलेंस जमा करने के बावजूद कनेक्शन न जुड़ने की शिकायत की थी। शनिवार तक यह समस्या ठीक होने के बजाय बढ़ती गई। कई उपकेंद्रों पर कनेक्शन न जुड़ने की शिकायत लेकर बड़ी संख्या में उपभोक्ता पहुंचे। इसका जिक्र बिजली कंपनियों के एमआईएसपी ग्रुप में स्वयं अभियंताओं के ग्रुपों में भी रहा। तमाम इंजीनियर ग्रुप पर जमा की रसीद पोस्ट करते हुए कनेक्शन जोड़ने की गुजारिश करते रहे। बावजूद इसके तकनीकी खामी की वजह से ऐसा नहीं हो सका। राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद ने बिजली दरों की सुनवाई में मंगलवार को मामला उठाने की बात कही है।
लखनऊ में दस हजार के बिजली कनेक्शन कटे
लखनऊ में शनिवार को 10 हजार स्मार्ट मीटर बिजली उपभोक्ताओं के कनेक्शन (बैलेंस माइनस होने के कारण) कट गए। इससे नाराज उपभोक्ताओं ने लखनऊ सेंट्रल जोन ओल्ड 1912 कार्यालय में हंगामा किया। सबसे ज्यादा नाराजगी उन उपभोक्ताओं में दिखी, जिन्होंने कनेक्शन कटते ही तुरंत भुगतान कर दिया। इस दौरान गुस्साई भीड़ ने इंजीनियरों को घेर लिया। बवाल की सूचना पर पुलिस फोर्स मौके पर पहुंची। वहीं लेसा अधिकारियों ने बताया कि सर्वर में तकनीकी खामी और आरएमएस सिस्टम अपडेट न होने के कारण बिल जमा होने के बावजूद देर रात तक बिजली बहाल नहीं हो सकी। इससे न सिर्फ आम उपभोक्ता बल्कि कई विधायक और विधान परिषद सदस्य के घरों में भी देर रात तक अंधेरा छाया रहा।
पावर कॉरपोरेशन ने तीन दिन पहले ही स्मार्ट मीटरिंग व्यवस्था को पूरी तरह सक्रिय करने की घोषणा की थी। शनिवार को लगातार दूसरे दिन सर्वर लाइव हुआ, इसके बाद प्रीपेड मोड पर चल रहे उन स्मार्ट मीटरों की आपूर्ति स्वतः बंद हो गई जिनका बैलेंस शून्य से नीचे था। इसकी चपेट में 10 हजार उपभोक्ता आए, जिनका कनेक्शन कट गया। सबसे ज्यादा नाराजगी उनमेंं दिखी, जिन्होंने कनेक्शन कटते ही तुरंत भुगतान कर दिया।
स्थानीय निवासी उमर शरीफ, सौरभ निगम ने बताया कि पैसे जमा होने के बावजूद उन्हें अंधेरे में रात गुजारनी पड़ी। उपभोक्ताओं ने 1912 हेल्पलाइन पर शिकायत की। गुस्साए लोगों ने बर्लिंगटन चौराहा स्थित ओल्ड 1912 कार्यालय, पुरनिया और अमौसी जोन कार्यालय पर प्रदर्शन किया। सेंट्रल जोन कार्यालय पर उग्र भीड़ ने इंजीनियरों को बंधक बना लिया।
विद्युत वर्टिकल व्यवस्था विफल
विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने प्रबंधन द्वारा लागू वर्टिकल व्यवस्था को पूरी तरह विफल बताते हुए इसे निजीकरण की नाकाम साजिश करार दिया है। समिति का आरोप है कि तकनीकी और कमर्शियल कार्यों को अलग करने से इंजीनियरों पर कार्यभार कई गुना बढ़ गया है। समिति के संयोजक शैलेन्द्र दुबे ने अधिकारियों ने चेतावनी दी कि मेंटेनेंस में लगे इंजीनियरों को राजस्व वसूली में झोंकने से आगामी गर्मियों में बिजली आपूर्ति ठप हो सकती है।
बकाये की धनराशि रीचार्ज में कटेगी
मुख्य अभियंता रवि अग्रवाल ने बताया कि जिन उपभोक्ताओं का पहले का बिजली बिल बकाया है। वह धनराशि रिचार्ज के दौरान काटी जाएगी। इसमें 10 हजार रुपये तक 10 प्रतिशत, 10 से 15 हजार रुपये तक 15 प्रतिशत, 15 से 20 हजार रुपये तक 20 हजार रुपये और 20 हजार रुपये से अधिक के बकाये पर 25 प्रतिशत धनराशि समायोजित की जाएगी।




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