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लखनऊ में अब महिला डॉक्टर के साथ कांड, एनआईए चीफ बनकर 1.5 करोड़ करा लिए ट्रांसफर

लखनऊ की रिटायर डॉक्टर जिया सुल्ताना को साइबर ठगों ने एनआईए चीफ बनकर सात दिनों तक डिजिटल अरेस्ट रखा। आतंकी गतिविधियों में आधार कार्ड के दुरुपयोग का डर दिखाकर जालसाजों ने उनसे ₹1.55 करोड़ की ठगी की। 

Wed, 22 April 2026 11:01 AMYogesh Yadav लखनऊ, वरिष्ठ संवाददाता
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लखनऊ में अब महिला डॉक्टर के साथ कांड, एनआईए चीफ बनकर 1.5 करोड़ करा लिए ट्रांसफर

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में अब एक सेवानिवृत्त महिला डॉक्टर के साथ बड़ा कांड हुआ है। साइबर अपराधियों ने उन्हें अपना निशाना बनाया है। खुद को राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) का प्रमुख बताकर जालसाजों ने प्रोविंशियल मेडिकल सर्विसेज (PMS) से रिटायर डॉक्टर जिया सुल्ताना को सात दिनों तक 'डिजिटल अरेस्ट' रखा और डरा-धमकाकर उनके बैंक खातों से ₹1.55 करोड़ पार कर दिए। इस हाई-प्रोफाइल ठगी के बाद पूरे प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है।

आतंकी गतिविधि का डर दिखाकर किया 'डिजिटल अरेस्ट'

पीड़ित डॉक्टर जिया सुल्ताना हजरतगंज के राणा प्रताप मार्ग स्थित शाहनजफ इमामबाड़ा कैंपस में अकेली रहती हैं। उनके पति डॉक्टर साजिद रजा की कई साल पहले मृत्यु हो चुकी है। घटना की शुरुआत 11 अप्रैल को हुई, जब उनके मोबाइल पर एक वीडियो कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को एटीएस (ATS) अधिकारी आकाश शर्मा बताया। उसने बेहद कड़े लहजे में कहा कि डॉक्टर सुल्ताना के आधार कार्ड का इस्तेमाल देशविरोधी और आतंकवादी गतिविधियों में किया गया है। गिरफ्तारी से बचने के लिए उन्हें महाराष्ट्र एटीएस से एनआईसी प्रमाणपत्र लेना होगा।

जालसाजों ने मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने के लिए कहा कि इस मामले की गंभीरता को देखते हुए स्वयं 'एनआईए चीफ' उनसे बात करेंगे। उन्होंने पीड़िता को चेतावनी दी कि यदि यह जानकारी किसी के साथ साझा की गई, तो उन्हें तत्काल जेल भेज दिया जाएगा।

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चार दिन में ट्रांसफर कराए 1.55 करोड़ रुपये

डर के साये में जी रही डॉक्टर सुल्ताना से इसके बाद दूसरे व्यक्ति ने बात की, जिसने खुद को एनआईए का चीफ बताया। उसने इसे 'आंतरिक जांच' का नाम दिया और कहा कि उनके बैंक खातों के लेन-देन की स्क्रूटनी की जाएगी। सात दिनों तक उन्हें वीडियो कॉल के जरिए अपनी निगरानी में रखा गया, जिसे तकनीकी भाषा में 'डिजिटल अरेस्ट' कहा जाता है।

इस दौरान जालसाजों ने उनके सभी बैंक खातों की जानकारी हासिल कर ली। 11 से 17 अप्रैल के बीच डरा-धमकाकर चार अलग-अलग बैंक खातों में कुल 1.55 करोड़ रुपये आरटीजीएस (RTGS) के जरिए ट्रांसफर करा लिए। जब आरोपियों की लालच बढ़ी और उन्होंने और पैसों की मांग की, तब डॉक्टर सुल्ताना को शक हुआ। उन्होंने हिम्मत जुटाकर अपने एक करीबी को आपबीती सुनाई, जिन्होंने तुरंत बताया कि वह साइबर ठगी का शिकार हुई हैं।

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साइबर थाने में मुकदमा दर्ज, जांच शुरू

इंस्पेक्टर साइबर क्राइम थाना ब्रजेश कुमार यादव के मुताबिक, पीड़िता की तहरीर पर गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस उन बैंक खातों को फ्रीज कराने की कोशिश कर रही है जिनमें रकम ट्रांसफर की गई थी। साथ ही, जिन मोबाइल नंबरों से कॉल आई थी, उनकी लोकेशन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) खंगाली जा रही है। प्रारंभिक जांच में इस गिरोह के तार अंतर्राज्यीय साइबर अपराधियों से जुड़े होने की आशंका जताई जा रही है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी जांच एजेंसी वीडियो कॉल पर गिरफ्तारी या डिजिटल अरेस्ट की कार्रवाई नहीं करती है, ऐसे कॉल्स आने पर तुरंत 1930 पर सूचना दें।

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