पिता की हत्याकर शव के टुकड़े; बेटे की करतूत में करीबी की एंट्री, फोन कॉल पर बदला इरादा
लखनऊ के बंगला बाजार हत्याकांड में आरोपी बेटे अक्षत से पूछताछ में एक नया मोड़ आया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, पिता की हत्या करने के बाद अक्षत सरेंडर करने का मन बना चुका था, लेकिन एक 'करीबी' के फोन कॉल ने पूरी साजिश बदल दी।

लखनऊ के बंगला बाजार में शराब कारोबारी मानवेंद्र की हत्या के मामले में आरोपी बेटे अक्षत से पूछताछ में कई चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। पूछताछ में पता चला है कि गोली मार कर पिता का भेजा उड़ाने के बाद अक्षत सरेंडर करने की तैयारी में था। पहले उसका विचार था कि वह पुलिस को फोन करेगा या फिर आशियाना थाने में सरेंडर करेगा। हालांकि एक करीबी के फोन पर उसने अपना इरादा बदल दिया। माना जा रहा है कि उसी करीबी के कहने पर गुमशुदगी दर्ज कराने की साजिश रच डाली। पुलिस अब उस करीबी के बारे में साक्ष्य संकलन कर रही है।
पुलिस पूछताछ में पता चला कि पिता की हत्या के बाद अक्षत ने बहन कृति को धमकाकर कमरे में बंद कर दिया था। फिर पिता का शव बाथरूम में खींचकर ले गया। वहां छुपा दिया। गोली मारने के बाद दीवार पर लगे मांस के लोथड़े और खून साफ किया। बाथरूम में आरी से पिता के हाथ पैर काटे और उसे बोरे में भरकर ठिकाने लगाने के बाद उसने करीबी को फोन कर घटना की जानकारी दी। कहा कि-गलती से पापा को मार दिया है अब थाने में समर्पण करने जा रहा हूं। इसके बाद करीबी ने समर्पण करने से उसे रोक दिया। फिर गुमशुदगी दर्ज कराने का प्लान बनाया।
अक्षत अगले दिन 21 फरवरी को पिता की गुमशुदगी की तहरीर लेकर थाने पहुंचा। पुलिस ने तफ्तीश का हवाला दिया। 22 फरवरी से पुलिस ने तफ्तीश शुरू की। अक्षत से पूछताछ की। पूछताछ में शक की सुई अक्षत पर ही टिकी। पुलिस के सवाल-जवाब में वह फंस गया। उसने पिता की हत्या करने की बात स्वीकारी। पुलिस ने 23 फरवरी को घर पहुंचकर ड्रम में शव बरामद कर लिया।
कॉल डिटेल्स पर टिकी तफ्तीश
पुलिस की दो टीमों ने घर से लेकर सदरौना जिस मार्ग से अक्षत हाथ पैर ठिकाने लगाने गया था। वहां तक करीब 200 से अधिक कैमरों की पड़ताल की। कई स्थलों पर अक्षत गाड़ी से जाते दिखा पर वह अकेला ही था। पुलिस की तफ्तीश अब काल डिटेल पर टिकी है। पुलिस काल डिटेल की पड़ताल कर रही है। काल डिटेल आने पर पुलिस अपनी जांच आगे बढ़ाएगी।
दौलत, शोहरत, सबकुछ फिर भी रिश्तों का कत्ल
पिता के हाथ-पैर आरी से काटे जाने की सनसनीखेज घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। ऐसी यह एक घटना नहीं बल्कि हाल के वर्षों में ऐसी कई दिल दहला देने वाली घटनाएं सामने आयी हैं जिनमें अपनों ने ही रिश्तों का कत्ल कर दिया। यह वारदातें भी ऐसे परिवारों में हुई जहां दौलत, शोहरत, ऐशो आराम और ऐसा सबकुछ था जिसे लोग सुखी होने की श्रेंणी का पैमाना मानते हैं। पुलिस ने तफ्तीश की तो हत्याओं की वजह प्रेम प्रसंग, बेवजह का शक, गुस्सा और घृणा ही निकली।
क्या कहते हैं मानसिक रोक विशेषज्ञ
लखनऊ। बच्चों और किशोरों में बढ़ता गुस्सा अब चिंता का विषय बनता जा रहा है। मामूली डांट-फटकार भी कई बच्चों को असहनीय लग रही है। तैश में आकर वे ऐसे कड़े कदम उठा रहे हैं, जिनके परिणाम भयावह साबित हो रहे हैं। यह चिंता बलरामपुर अस्पताल के पूर्व मानसिक रोग विशेषज्ञ व मेडिकल यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक डॉ. देवाशीष शुक्ला ने जाहिर की।
डॉ. देवाशीष शुक्ला ने कहाकि बदलती पारिवारिक संरचना इसका एक बड़ा कारण है। एकल परिवारों में बच्चों को दादा-दादी या अन्य बुजुर्गों का भावनात्मक सहारा नहीं मिल पाता। माता-पिता कामकाजी होने के कारण पर्याप्त समय नहीं दे पाते। मोबाइल और सोशल मीडिया ने भी सहनशीलता घटाई है।




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