लखनऊ में मेट्रो का विस्तार, चारबाग से यहां तक दौड़ेगी; योगी कैबिनेट ने दी मंजूरी
योगी कैबिनेट ने लखनऊ मेट्रो फेज-1बी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर को मंजूरी दे दी है। करीब 5801 करोड़ रुपये की लागत से चारबाग से वसंतकुंज तक मेट्रो दौड़ेगी। परियोजना से ट्रैफिक दबाव कम होगा और लोगों को तेज व सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन मिलेगा।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राजधानी लखनऊ में मेट्रो विस्तार परियोजना को मंजूरी देकर शहर के सार्वजनिक परिवहन ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। सोमवार को हुई योगी कैबिनेट की बैठक में 12 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगी, जिनमें लखनऊ मेट्रो के फेज-1बी ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर का विस्तार भी शामिल रहा। इस परियोजना के तहत चारबाग से बसंतकुंज तक मेट्रो सेवा शुरू की जाएगी।
लखनऊ में होगा मेट्रो का विस्तार
सरकार द्वारा जारी जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही इस परियोजना की डीपीआर को मंजूरी दे चुके हैं। इसके बाद 3 सितंबर 2025 को आयोजित स्टेट इम्पावरड कमेटी की बैठक में करीब 5801.05 करोड़ रुपये की लागत वाली परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई। अब मेट्रो रेल नीति-2017 के तहत उत्तर प्रदेश सरकार, भारत सरकार के आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय और संबंधित एजेंसियों के बीच त्रिपक्षीय समझौता (एमओयू) किया जाएगा।
चारबाग से बसंतकुंज तक दौड़ेगी मेट्रो
चारबाग से वसंतकुंज तक मेट्रो कॉरिडोर बनने से लखनऊ के लाखों लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। इससे शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी और लोगों को तेज, सुरक्षित तथा सुविधाजनक सार्वजनिक परिवहन उपलब्ध हो सकेगा। खासतौर पर रोजाना नौकरी, शिक्षा और व्यापार के लिए यात्रा करने वाले लोगों को राहत मिलेगी।
लखनऊ को स्मार्ट सिटी बनाने की पहल
परियोजना के तहत भूमि अधिग्रहण, निर्माण कार्य, विद्युत व्यवस्था, जल निकासी और अन्य आधारभूत सुविधाओं का विकास भी किया जाएगा। इन कार्यों के लिए संबंधित विभागों को जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। प्रेस नोट में कहा गया है कि डीएमआरसी और एलएमआरसी परियोजना के क्रियान्वयन और तकनीकी सहयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सरकार इसे लखनऊ को आधुनिक और स्मार्ट सिटी बनाने की दिशा में अहम पहल मान रही है।
पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन को मंजूरी
इसके अलावा योगी कैबिनेट में चर्चित प्रस्ताव राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन रहा। कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। पंचायत चुनाव में आरक्षण व्यवस्था को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच सरकार इस आयोग के जरिए पिछड़े वर्ग की वास्तविक हिस्सेदारी का आंकलन कराना चाहती है। आयोग ग्रामीण निकायों में पिछड़े वर्ग की सामाजिक और राजनीतिक स्थिति का अध्ययन करेगा और अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगा।




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