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तपती सड़क पर OBC-दलित 69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, पुलिस ने खदेड़ा

लखनऊ में 69000 सहायक शिक्षक भर्ती के ओबीसी और दलित अभ्यर्थियों ने सोमवार को भीषण गर्मी में तपती सड़क पर पेट के बल रेंगकर शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के आवास पर प्रदर्शन किया। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लेकर इको गार्डन भेज दिया है।

Mon, 18 May 2026 01:35 PMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान
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तपती सड़क पर OBC-दलित 69000 शिक्षक भर्ती अभ्यर्थियों का प्रदर्शन, पुलिस ने खदेड़ा

उत्तर प्रदेश की सबसे चर्चित 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती के आरक्षण पीड़ित ओबीसी और दलित अभ्यर्थियों का धैर्य जवाब दे रहा है। सोमवार को राजधानी लखनऊ की सड़कों पर विरोध प्रदर्शन का एक बेहद भावुक नजारा देखने को मिला। झुलसा देने वाली भीषण गर्मी में दर्जनों पीड़ित अभ्यर्थी तपती हुई कोलतार (डामर) की सड़क पर पेट के बल रेंगते हुए बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह के सरकारी आवास के सामने प्रदर्शन किया। इस अनोखे और कड़े प्रदर्शन को देखकर सड़क से गुजरने वाले राहगीरों की रूह भी कांप गई। शिक्षा मंत्री के आवास के बाहर पहुंचते ही अभ्यर्थियों ने जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। इसके बाद मौके पर मुस्तैद भारी पुलिस बल ने प्रदर्शनकारियों को खदेड़ना शुरू किया और जबरन हिरासत में लेकर बसों से धरना स्थल 'इको गार्डन' भेज दिया।

सुप्रीम कोर्ट में 19 मई को होने वाली सुनवाई से पहले बढ़ा आक्रोश

आरक्षण पीड़ित अभ्यर्थियों का आरोप है कि उत्तर प्रदेश सरकार आरक्षित श्रेणी (ओबीसी और एससी) के इस संवेदनशील मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में चल रही विधिक लड़ाई में लगातार 'ढुलमुल रवैया' अपना रही है। सरकार की इसी उदासीनता के कारण पिछले कई वर्षों से मानसिक और आर्थिक रूप से प्रताड़ित हो रहे युवाओं में गहरा आक्रोश है। अभ्यर्थियों ने इस बार आर-पार की लड़ाई का मन बनाते हुए केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह को एक भावुक पत्र भेजा है।

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इसके साथ ही मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और बेसिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थसारथी सेन शर्मा को भी पत्र लिखकर यह गुहार लगाई है कि 19 मई को देश की शीर्ष अदालत में होने वाली सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से 'याची लाभ' (Petitioner Benefit) देने का एक ठोस प्रपोजल (प्रस्ताव) पेश किया जाए और इस पूरे मामले को हमेशा के लिए निस्तारित किया जाए।

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर टिकी सबकी नजरें

सुप्रीम कोर्ट में आगामी 19 मई को जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस ए.जी. मसीह की खंडपीठ के समक्ष इस विवाद पर सुनवाई होने जा रही है। इससे पहले 4 फरवरी को हुई सुनवाई में सर्वोच्च न्यायालय ने उत्तर प्रदेश सरकार को कड़े निर्देश दिए थे कि वह आरक्षण पीड़ित याची अभ्यर्थियों के भविष्य और उनके समायोजन को लेकर अपनी नीति और सोच को स्पष्ट करे और अदालत में अपना पक्ष रखे। अब 19 मई की सुनवाई में राज्य सरकार को अपनी अंतिम आख्या और पक्ष प्रस्तुत करना है।

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याची लाभ है सबसे आसान और सुरक्षित रास्ता

आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अभ्यर्थियों का स्पष्ट कहना है कि इस जटिल विवाद को सुलझाने का सबसे आसान, सुरक्षित और न्यायसंगत रास्ता केवल 'याची लाभ' ही है। उनका तर्क है कि यदि सरकार कोर्ट में याची लाभ देने का प्रपोजल रखती है, तो इससे किसी भी वर्ग के युवाओं का अहित नहीं होगा। इस फॉर्मूले के तहत जो शिक्षक वर्तमान में विभिन्न विद्यालयों में कार्यरत हैं और वेतन उठा रहे हैं, वे भी अपनी नौकरी में सुरक्षित बने रहेंगे, और दूसरी तरफ वर्षों से सड़क पर धक्के खा रहे वास्तविक आरक्षण पीड़ित मेधावी अभ्यर्थियों को भी नियुक्ति पत्र के माध्यम से न्याय मिल जाएगा। अब समूचे उत्तर प्रदेश की नजरें 19 मई को सुप्रीम कोर्ट में होने वाली इस बड़ी कानूनी जंग और राज्य सरकार के रुख पर टिकी हुई हैं।

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