69000 teacher recruitment Candidates again surrounded Deputy CM Keshav Maurya residence and raised slogans 69000 शिक्षक भर्ती: अभ्यर्थियों ने फिर घेरा डिप्टी सीएम केशव मौर्य का आवास, नारेबाजी भी की, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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69000 शिक्षक भर्ती: अभ्यर्थियों ने फिर घेरा डिप्टी सीएम केशव मौर्य का आवास, नारेबाजी भी की

69000 शिक्षक भर्ती में शामिल आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने सोमवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई न होने से अभ्यर्थी नाराज है। 

Mon, 2 Feb 2026 04:40 PMDinesh Rathour लाइव हिन्दुस्तान, लखनऊ
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69000 शिक्षक भर्ती: अभ्यर्थियों ने फिर घेरा डिप्टी सीएम केशव मौर्य का आवास, नारेबाजी भी की

एक बार फिर 69000 शिक्षक भर्ती में शामिल आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने सोमवार को प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई न होने से अभ्यर्थी नाराज है। इसी को लेकर केशव प्रसाद के घर के सामने धरने पर बैठे थे। अभ्यर्थियों ने यहां जोरदार नारेबाजी की। मौके पर भारी पुलिस बल तैनात रही। यहां बैठे अभ्यर्थी केशव चाचा न्याय करो का नारा लगाकर धरने पर बैठ गए । पुलिस ने सभी को बस से धरना स्थल इको गार्डेन भेज दिया। अभ्यर्थियों का कहना है कि हाई कोर्ट का जो फैसला आया था सरकार उसे जानबूझ कर लटका दिया जिससे यह मामला अब सुप्रीम कोर्ट में चला गया। सरकार के पास पर्याप्त समय था वह हाईकोर्ट डबल बेंच के फैसले का पालन करके सबके साथ न्याय कर सकती थी।

धरना प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे अमरेंद्र पटेल ने बताया कि वर्ष 2018 में यह भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई थी। जब इसका परिणाम आया तो इसमें व्यापक स्तर पर आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के साथ अन्याय किया गया और उन्हें नौकरी देने से वंचित कर दिया गया। एक लंबे आंदोलन और न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद बीते 13 अगस्त 2024 को लखनऊ हाई कोर्ट के डबल बेंच ने हम आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों के हित में फैसला सुनाया और नियमों का पालन करते हुए अभ्यर्थियों को नियुक्ति दिए जाने का आदेश दिया। लेकिन सरकार इस प्रकरण में हीला हवाली करती रही।

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अधिकारियों और सरकार के रवैये से परेशान हैं अभ्यर्थी

पटेल ने कहा कि उन्होंने इससे पहले भी कई बार केशव प्रसाद मौर्य के आवास का घेराव किया था तब उन्होंने त्वरित न्याय किए जाने की बात कही थी और हम अभ्यर्थियों से मुलाकात भी की थी। लेकिन उनकी बात को भी अधिकारियों ने नहीं माना अब यह मामला माननीय सुप्रीम कोर्ट में चला गया। हम पिछड़े दलित गरीब अभ्यर्थी अधिकारियों और सरकार के इस रवैया से काफी हताश और परेशान हैं। जो काम कुछ दिनों में हो सकता था उसे इतना लंबा जानबूझकर टाल दिया गया है। केशव जी का त्वरित न्याय की टिप्पणी, खाने के दांत अलग और दिखाने के दांत अलग साबित हुआ। त्वरित न्याय की कोई सीमा होती है यह नहीं की महीनों मामला लटक रहे।आंदोलन में विक्रम यादव, अमित मौर्या, अनिल, धंनंजय, अनिल कुमार, मो. इरशाद, राहुल मौर्या, उमाकांत मौर्या, शिव मौर्या, अर्चना मौर्या, कल्पना, शशि पटेल आदि अभ्यर्थी शामिल रहे।

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