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सीने में घुस गया था लिवर और 3 फीट लंबी आंत, सांस लेने में हो रही थी मुश्किल; जानें फिर

मरीज को लेकर परिजन BRD मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां जनरल सर्जरी के प्रोफेसर डॉ. अभिषेक जीना और सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपक सिंह ने जांच कराई। रिपोर्ट में पता चला कि छोटी आंत, स्प्लीन, लिवर और बड़ी आंत मरीज के सीने में घुस गए हैं। बाएं फेफड़े के दो तिहाई हिस्से पर आंतों का दबाव पड़ रहा है। 

Mon, 6 April 2026 06:30 PMAjay Singh मनीष मिश्र, गोरखपुर
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सीने में घुस गया था लिवर और 3 फीट लंबी आंत, सांस लेने में हो रही थी मुश्किल; जानें फिर

UP News: बाबा राघव दास (बीआरडी) मेडिकल कॉलेज के जनरल सर्जरी विभाग के डॉक्टरों ने जटिल सर्जरी कर मरीज की जान बचाई। भौवापार के उंचगांव निवासी 46 वर्षीय मरीज के डायफ्राम की झिल्ली फट गई। इससे उसकी तीन फीट लंबी आंत और लिवर सीने में घुस गए। बायां फेफड़ा दो तिहाई सिकुड़ गया। मरीज को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। सर्जरी किए जाने के बाद मरीज की हालत स्थिर है।

16 साल पहले शिवचरन की डायफ्राम की सर्जरी हो चुकी थी। हाल ही में झिल्ली दोबारा फट गई। पेट के अंदर मौजूद आंतरिक अंग उनके छाती की पसलियों के अंदर प्रवेश करने लगे। इससे धीरे-धीरे उनकी सांस उखड़ने लगी, दम फूलने लगा। दिल पर भी दबाव पड़ने लगा।

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मरीज को लेकर परिजन बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचे। यहां जनरल सर्जरी के प्रोफेसर डॉ. अभिषेक जीना व सहायक प्रोफेसर डॉ. दीपक सिंह ने जांच कराई। रिपोर्ट में पता चला कि छोटी आंत, स्प्लीन, लिवर और बड़ी आंत मरीज के सीने में घुस गए हैं। इससे बाएं फेफड़े के दो तिहाई हिस्से पर आंतों का दबाव पड़ रहा है। फेफड़े का आकार छोटा हो गया है।

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डॉक्टरों ने सर्जरी से 15 दिन पहले फेफड़ों की कसरत शुरू कराई। स्पायरोमेट्री एक्सरसाइज से फेफड़ों की ताकत लौटने लगी। सर्जरी करीब चार घंटे चली। टीम में डॉ अभिषेक जीना व डॉ. दीपक सिंह के अलावा डॉ. असदुल्ला खान, डॉ. स्नेहा सिंह, डॉ. अमृत रंजन, डॉ. मनस्वनी, एनेस्थीसिया टीम में डॉ. सतीश, डॉ. अकांक्षा, डॉ. अविनाश, डॉ. पूजा, डॉ. संजीव, डॉ. आयुषी के साथ रीता और सुधांशु मौजूद रहे। सर्जरी के दौरान टूटी झिल्ली की मरम्मत की गई।

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विशेष जाली लगाई , हालत में सुधार

डॉक्टरों ने सर्जरी के बाद डायफ्राम को मजबूत बनाने के लिए विशेष जाली लगाई। इससे झिल्ली दोबारा फटने का खतरा कम हो गया। प्रोफेसर डॉ. अभिषेक जीना ने बताया कि यह सर्जरी बेहद जटिल थी। इसमें तीन कॉप्लीकेशन थे। मरीज के पेट और सीने की आंतरिक संरचना जटिल है। यहीं वजह रही कि पूर्व की सर्जरी फेल हो गई। तीन फीट छोटी आंत और करीब सात फीट की बड़ी आंत समेत स्प्लीन व लिवर का सीने में होना रेयर है। डॉ. दीपक सिंह ने कहा कि स्पायरोमेट्री एक्सरसाइज ने फेफड़ों को मजबूत किया, वरना सर्जरी मुश्किल होती। सर्जरी के बाद मरीज की हालत में तेज सुधार हो रहा है। वह अब सामान्य रूप से सांस ले पा रहा है।

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