kyonki har advocate ki sanson me adalat basti hai Here how judge sentenced lawyer killer to death क्योंकि हर वकील की सांसों में अदालत..., अधिवक्ता के कातिल को जज ने यूं सुनाई फांसी की सजा, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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क्योंकि हर वकील की सांसों में अदालत..., अधिवक्ता के कातिल को जज ने यूं सुनाई फांसी की सजा

बेटे के हत्यारोपियों को फांसी की सजा सुनते ही पिता के आंखो में आंसू छलक गए। उन्होंने न्याय मिलने पर कोर्ट का शुक्रिया अदा किया। पिछले सात साल पिता व परिवार के अन्य सदस्य कानूनी लडाई लड रहे थे।

Mon, 6 April 2026 10:20 PMDinesh Rathour मुजफ्फरनगर
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क्योंकि हर वकील की सांसों में अदालत..., अधिवक्ता के कातिल को जज ने यूं सुनाई फांसी की सजा

Muzaffarnagar News: अधिवक्ता समीर की हत्या में तीन आरोपियों को दोष सिद्ध होने पर फांसी की सजा सुनाने वाले फास्ट ट्रैक कोर्ट (नंबर तीन) के पीठासीन अपर सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने फैसला सुनाते हुए जजमेंट में कविता का उल्लेख किया

''कचहरी की सीढ़ियों पर,

आज सन्नाटा कुछ बोल रहा है,

जहां दलीलों की गूंज थी कल,

वहां खामोशी डोल रही है,

काला कोट जो ढाल बना था,

सच की हर एक लड़ाई में,

वो गिर पड़ा आज जमीन पर,

झूठ की गहरी साजिश में,

कल तक जो कानून था जिंदा,

हर जुर्म को आईना दिखाता था,

आज उसी के रखवाले को,

किसी ने बेरहमी से सुला डाला,

पर ये खून बेकार नही जाएगा,

हर बूंद गवाही बन जाएगी,

जो सच दबाने निकले थे,

उनकी साजिश जल जाएगी,

क्योंकि हर वकील की सांसों में,

एक अदालत बसती है,

और मरकर भी वकील की आवाज,

इंसाफ ही रचती है।

फैसले के साथ इंसाफ मिलते ही छलक पड़े पिता के आंसू

बेटे के हत्यारोपियों को फांसी की सजा सुनते ही पिता के आंखो में आंसू छलक गए। उन्होंने न्याय मिलने पर कोर्ट का शुक्रिया अदा किया। पिछले सात साल पिता व परिवार के अन्य सदस्य कानूनी लडाई लड रहे थे। इस बीच कई बार पर उन पर फैसले का दबाव बनाया गया, लेकिन परिवार आरोपियों को सजा दिलाने के लिए अडिग रहा है, जिसका नतीजा सोमवार को सामने आया।

अधिवक्ता के पिता मोहम्मद अजहर का रुडकी रोड व आबकारी रोड पर फर्नीचर का शोरुम है। उनका सबसे बडा बेटा जावेद, अफजल व सबसे छोटा बेटा दानिश भी फर्नीचर का काम करते है। एक बेटी की उन्होंने शादी कर दी है। अधिवक्ता समीर को परिवार के लोग बहुत प्यार करते थे। 15 अक्टूबर 2019 को उसके अचानक लापता होने पर परिवार में कोहराम मच गया। उसके बाद युवा उम्र में उनके बेटे की पैसों के कारण हत्या कर दी गयी। उसके बाद पिता अपने बेटे को इंसाफ दिलाने के लिए कानूनी लडाई लड़ रहे थे। भाई दानिश का कहना कि इस बीच कई बार उनके परिवार पर फैसले का दबाव भी बनाया गया, लेकिन उसके पिता न्याय की उम्मीद के साथ बिना डरे लडाई लड़ते रहे। न्यायाधीश रवि दिवाकर ने अर्थदंड की सम्पूर्ण धनराशि पिता को क्षतिपूर्ति के रुप में देने के आदेश दिए हैं।

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रस्सी से गला दबाकर समीर की हत्या की, छह फीट गहरे गड्ढे में दबाया था शव

उधार ली एक करोड़ की रकम न चुकानी पड़े, इसी को लेकर आरोपियों ने 15 अक्तूबर 2019 को अधिवक्ता मोहम्मद समीर की हत्या कर दी थी। आरोपियों ने कार में रस्सी से गला दबाकर समीर की हत्या की और शव को सिकरी के जंगल में छह फिट गहरे गड्ढे में प्लास्टिक के बोरे में बंद कर दबा दिया था। तत्कालीन शहर कोतवाली प्रभारी अनिल कुमार कपरवान ने वारदात का खुलासा करते हुए आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके खिलाफ चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की थी।

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मुर्गी फार्म खोलने के लिए वकील से उधार लिए थे रुपये

अधिवक्ता मोहम्मद समीर से सिंगोल अल्वी ने मुर्गी फार्म खोलने के लिए एक करोड़ रुपये उधार लिए थे। कुछ रकम लौटा दी थी। शेष रकम अधिवक्ता उससे मांग रहा था। मुर्गी फार्म में नुकसान होने के कारण आरोपी रकम नहीं लौटा पा रहा था। इसी कारण आरोपी सिंगोल अल्वी ने अपने चालक शालू उर्फ अरबाज व नौकर सोनू उर्फ रिजवान के साथ अधिवक्ता की हत्या की प्लानिंग की। आरोपी ने अधिवक्ता को बुलाया और कार में बैठाकर उसे भोपा रोड पर सुनसान स्थान पर ले गए। वहां पहुंचते ही कार में पीछे बैठे सिंगोल अल्वी व उसके नौकर ने अधिवक्ता के गले में रस्सी डालकर हत्या कर दी और शव को कार की डिग्गी में रखकर भोपा के गांव सिकरी में ले गए। वहां मुर्गी फार्म पर रहने वाले नौकर दिनेश ने गड्ढा खोदकर रखा था। आरोपियों ने प्लास्टिक के बोरे में शव रखकर गड्ढे में दबा दिया था। पुलिस के अनुसार लगभग छह फीट गहरा गड्ढा खोदकर शव को दबाया गया था।

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छह गवाह हुए कोर्ट में पेश, 140 तारीखें लगीं

एडीजीसी कुलदीप कुमार ने बताया अधिवक्ता की हत्या में अभियोजन की तरफ से छह गवाह कोर्ट में पेश किए गए। मजबूत पैरवी व गवाही की वजह से कोर्ट ने आरोपियों को फांसी की सजा सुनाई है। 2019 में हुई अधिवक्ता की हत्या में कुल 140 तारीखें कोर्ट में लगीं। सोमवार को अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश कोर्ट नंबर-3 न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत ने फैसला सुनाया। पुलिस ने चार्जशीट में 20 गवाहों के बयान दर्ज किए थे। पुलिसकर्मियों, डाक्टर व अन्य लोगों के बयान दर्ज किए थे। उसके बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की गई।

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