Landlord Can Seek Eviction House or Shop for Personal Need High Court Order Regarding Tenants अपनी जरूरत पर मकान-दुकान खाली करा सकता है मालिक, किराएदारों को लेकर हाईकोर्ट का आदेश, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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अपनी जरूरत पर मकान-दुकान खाली करा सकता है मालिक, किराएदारों को लेकर हाईकोर्ट का आदेश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि मकान मालिक निजी जरूरत के कारण अपना मकान या दुकान खाली कराना चाहता है तो उसकी जरूरत की वास्तविकता या सदाशयता का परीक्षण नहीं किया जा सकता।

Sun, 5 April 2026 05:54 PMDinesh Rathour प्रयागराज, विधि संवाददाता
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अपनी जरूरत पर मकान-दुकान खाली करा सकता है मालिक, किराएदारों को लेकर हाईकोर्ट का आदेश

Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक आदेश में कहा है कि मकान मालिक निजी जरूरत के कारण अपना मकान या दुकान खाली कराना चाहता है तो उसकी जरूरत की वास्तविकता या सदाशयता का परीक्षण नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मकान मालिक को केवल यह साबित करना होगा कि अपने इस्तेमाल के लिए उस जगह की उसे आवश्यकता है, चाहे उसी रूप में या गिराकर। ऐसे में किरायेदार यह नहीं कह सकता कि मकान मालिक के पास वैकल्पिक स्थान है इसलिए वह किरायेदारी समाप्त नहीं कर सकता। कोर्ट ने कहा कि इसकी जांच नहीं की जा सकती कि जरूरत कितनी अधिक, कितनी जरूरी या कितनी वास्तविक है, किरायेदार को दुकान खाली करना होगा।

इसी के साथ कोर्ट ने याची किरायेदार की बेदखली के रेंट कंट्रोल अथारिटी व अधिकरण के आदेश पर हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने कहा कि आदेश किराया नियंत्रण कानून 2021के अनुरूप है, इसमें कोई अवैधानिकता नहीं है। यह आदेश न्यायमूर्ति दो वाईके श्रीवास्तव ने कानपुर के की याचिका को खारिज करते हुए दिया है। कोर्ट ने कहा कि नए कानून में जरूरत की सदाशयता या वास्तविकता को हटा दिया गया है इसलिए तुलनात्मक कठिनाई पर विचार नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि यह कानून बनाने वालों की चूक नहीं है, यह उनका इरादा दर्शाती है। मकसद न्यायिक निर्णय के दायरे को सीमित करना है।

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जैसा कानून है वैसा ही देखेगा कोर्ट

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि न्यायालय कानून की व्याख्या के नाम पर कानून में छूटी बात छोड़ नहीं सकता। न्यायालय जैसा कानून है, वैसा ही देखेगा और उसी दायरे में व्याख्या करेगा। कोर्ट ने कहा कि जिसे कानून बनाने वाले ने नहीं जोड़ा, न्यायालय व्याख्या के माध्यम से उसे जोड़ नहीं सकता। कानून सीधे सादे शब्दों में लागू किया जाना चाहिए। न्यायालय का अधिकार मकान मालिक की बताई गई जरूरत की पुष्टि करना भर है। वास्तविक जरूरत की जांच करना नहीं।

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मामले के तथ्यों के अनुसार कानपुर नगर के गांधी नगर में याची दुकान का किरायेदार है। मकान मालिक ने निजी व्यवसाय बढ़ाने की जरूरत बताते हुए याची को दुकान खाली करने का नोटिस दिया और रेंट अथारिटी के समक्ष दुकान खाली कराने की अर्जी दी। याची का कहना था कि मकान मालिक के पास अन्य स्थान उपलब्ध है, जहां वह गोदाम बना सकता है ।उसकी जरूरत वह दुकान खाली कराए बिना पूरी हो सकती है, जिससे उसका जीवन यापन हो रहा है। लेकिन अथारिटी ने बेदखल करने का आदेश दिया है। अपील भी खारिज हो गई। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी लेकिन याची को दुकान खाली करने के लिए आठ महीने का समय देते हुए अथारिटी के समक्ष इस बात की अंडरटेकिंग देने का निर्देश दिया है।

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