Severe Heat Wave in Kushinagar Water Scarcity Hits Medical Facilities भीषण गर्मी में हीटवेब का खतरा, गला तर करने के नहीं है पर्याप्त इंतजाम, Kushinagar Hindi News - Hindustan
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भीषण गर्मी में हीटवेब का खतरा, गला तर करने के नहीं है पर्याप्त इंतजाम

Kushinagar News - कुशीनगर में अप्रैल महीने के अंत में गर्मी बढ़ रही है, लेकिन मेडिकल कॉलेज में शुद्ध पेयजल की कमी है। मरीजों और तीमारदारों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। हालाँकि, मेडिकल कॉलेज ने हीट स्ट्रोक के लिए एक वार्ड तैयार किया है, लेकिन अभी तक कोई मरीज नहीं आया है।

Tue, 28 April 2026 10:12 AMNewswrap हिन्दुस्तान, कुशीनगर
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भीषण गर्मी में हीटवेब का खतरा, गला तर करने के नहीं है पर्याप्त इंतजाम

कुशीनगर। निज संवाददाता अप्रैल महीने के आखिरी वीकेंड में ही जून के जैसी गर्मी पड़ रही है, लेकिन ऐसे समय में जनपद मुख्यालय अथवा पडरौना शहर में किसी को जोरों की प्यास लग जाए तो शुद्ध पेयजल समय पर मिलना मुश्किल है। जनपद के दूरदराज हिस्सों से आए मरीजों व तीमारदारों के लिए मेडिकल कॉलेज में शीतल पेयजल के इंतजाम फेल हैं। बाकी सरकारी दफ्तरों के परिसर में भी आम आदमी के लिए पेयजल के इंतजाम न के बराबर हैं। कलक्ट्रेट परिसर और एआरटीओ कार्यालय के पास आरओ प्लांट लगे हैं, जिन्हें पता होता है वे जाकर अपनी प्यास बुझा लेते हैं।

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अलबत्ता मेडिकल कॉलेज प्रशासन की तरफ से आठ बेड का एक वार्ड तैयार कर लिया गया है कि यदि कोई व्यक्ति हीट वेब या हीट स्ट्रोक की चपेट में आए तो उसे तत्काल भर्ती कर इलाज शुरू किया जा सके।इन दिनों भीषण गर्मी पड़ रही है। गर्म हवा और तेज धूप के बीच जिला मुख्यालय पर सरकारी दफ्तरों या मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए आए लोग प्यास लग जाने पर इधर-उधर भटकने लगते हैं। क्योंकि बाकी संसाधनों पर रकम तो खर्च की जाती है, लेकिन पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा की तरफ जिम्मेदारों का ध्यान नहीं दिया जाता है। पडरौना नगरपालिका की तरफ से कलक्ट्रेट परिसर में आरओ प्लांट लगवाया गया है और एक आरओ प्लांट एक व्यवसायिक प्रतिष्ठान की तरफ से एआरटीओ कार्यालय के बाहर लगा है। वहां पहुंचने पर लोग अपनी प्यास बुझा पाते हैं। मेडिकल कॉलेज में लगे आरओ प्लांट से शीतल पेयजल मिलना तो दूर, कभी कभी स्वच्छ पानी भी नहीं मिलता। इससे मरीज या तो वही पानी पीने के लिए विवश होते हैं अथवा बाहर ठेले-खोमचों से खरीदकर पीते हैं।भीषण गर्मी को ध्यान में रखते हुए मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने इमरजेंसी कक्ष के बगल में आठ बेड का एक वार्ड तैयार किया है। वहां ऐसे मरीजों को भर्ती कर इलाज करने का इंतजाम किया गया है, जो हीट वेब या हीट स्ट्रोक की चपेट में आते हैं। हालांकि, अच्छी बात यह है कि अभी तक कोई व्यक्ति इस बीमारी की चपेट में नहीं आया है।

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