कई दुश्मनों ने मिलकर ढूंढा मोहरा, ऐसे रची गई गोरखपुर के चर्चित राजकुमार हत्याकांड की साजिश
पुलिस के मुताबिक, दीपक के साथ ही लालजी यादव ने राज चौहान का ब्रेनवॉश कर उसे हत्या के लिए तैयार किया। उसे तमंचा और चाकू जैसे हथियार मुहैया कराए गए। पूरी साजिश शेषनाथ यादव के घर पर बनाई गई थी, जहां उसके बेटे अंकित यादव, देवव्रत और एक नाबालिग भी शामिल था।

यूपी के गोरखपुर के प्रॉपर्टी डीलर और भाजपा नेता राजकुमार चौहान हत्याकांड में पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए इसे सुनियोजित साजिश का नतीजा बताया है। पुलिस के अनुसार, राजकुमार और उसके भतीजे के कई दुश्मनों ने दोस्त बनकर करीब एक साल से हत्या की साजिश रच रहे थे और जब उन्हें एक मोहरा मिल गया तब जाकर वारदात को अंजाम दिलाया। शुक्रवार को पुलिस ने इस मामले में छह और आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। एसपी नार्थ ज्ञानेन्द्र ने बताया कि मुख्य आरोपित राज के मोबाइल से मिली वॉयस रिकॉर्डिंग इस केस की सबसे अहम कड़ी साबित हुई। इससे साजिशकर्ताओं तक पहुंचना संभव हो सका।
पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए छह आरोपितों में चार एक ही परिवार के पिता और उसके तीन पुत्र हैं। जांच में सामने आया कि हत्या की साजिश इन्हीं के घर पर बैठकर रची गई थी। इससे पहले इस मामले में राज चौहान उर्फ निरहू और विपिन यादव को जेल भेजा जा चुका है। उन्हें घटना को अंजाम देने में इस्तेमाल किया गया। गिरफ्तार आरोपितों में दीपक गौड़, लालजी यादव उर्फ गट्टू, शेषनाथ यादव, उसके तीन बेटे अंकित यादव, देवव्रत यादव और एक नाबालिग बेटा शामिल हैं। नाबालिग बेटे को बाल सुधार गृह भेजा गया है। पुलिस ने इनके कब्जे से साक्ष्य छिपाने में प्रयुक्त टीपर वाहन को सीज किया है और एक मोबाइल फोन भी बरामद किया है।
नामजद आरोपितों में दो की भूमिका आई सामने
राजकुमार की पत्नी सुशीला देवी ने इस मामले में आठ लोगों दीपक गौड़, पार्षद धर्मदेव चौहान, लालजी यादव उर्फ गट्टू यादव, धर्मपाल चौहान, अमर सिंह चौधरी, मोनू पाण्डेय, सत्येन्द्र चौधरी टिल्लू, अभय पाण्डेय के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया था। जांच में अब तक उन आठ में दीपक गौड़ और लालजी यादव की भूमिका साजिशकर्ता के रूप में सामने आई है। पुलिस के अनुसार, दीपक की राज चौहान से लगातार बातचीत हो रही थी और मोबाइल में मिली रिकॉर्डिंग ने पूरी साजिश की परतें खोल दीं। पुलिस अब साजिश के दूसरे स्तर की जांच कर रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि कहीं कोई और मास्टरमाइंड तो नहीं है। मामले में पार्षद धर्मदेव चौहान की भूमिका को लेकर भी जांच जारी है और अभी उन्हें क्लीनचिट नहीं दी गई है।
भतीजे का कई लोगों से हुआ था विवाद
हत्या की जड़ में 2023 में हुई दो वारदात और चुनावी रंजिश के अलावा राजकुमार के भतीजे से हुए कई लोगों के विवाद सामने आए हैं। पुलिस की जांच में सामने आया कि यह हत्या अचानक नहीं बल्कि करीब एक साल से रची जा रही साजिश का परिणाम थी। आरोपियों से पूछताछ में सामने आया है कि हत्या के लिए कई दुश्मन एकजुट हुए और सुनियोजित तरीके से पूरी प्लानिंग की गई। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि हत्या से तीन दिन पहले यानी 14 मार्च को राज चौहान अपने साथी विपिन यादव के साथ मौके पर पहुंचा था,लेकिन उस दिन राजकुमार के किसी कारण से वहां नहीं पहुंचने से उनकी जान बच गई। इस घटना की जानकारी राज ने दीपक गौड़ को मोबाइल पर दी थी, जिसकी ऑडियो रिकॉर्डिंग पुलिस के पास मौजूद है।
पुलिस के मुताबिक, दीपक के साथ ही लालजी यादव उर्फ गट्टू ने राज चौहान का ब्रेनवॉश कर उसे हत्या के लिए तैयार किया। उसे तमंचा और चाकू जैसे हथियार उपलब्ध कराए गए और हत्या के लिए उकसाया गया। साजिश की पूरी योजना शेषनाथ यादव के घर पर बनाई गई थी, जहां उसके बेटे अंकित यादव, देवव्रत और एक नाबालिग भी शामिल था। पुलिस के अनुसार, राज चौहान का खून से सना स्वेटर जला दिया गया था। जांच में यह भी सामने आया कि वर्ष 2023 में शेषनाथ के भतीजे कृष्णा मोहन उर्फ पांडु को राजकुमार के करीबी शक्ति द्वारा गोली मारी गई थी, इस घटना के बाद भतीजा बिस्तर पर ही पड़ा है। जिसके बाद से रंजिश और गहरी हो गई थी। भतीजे का वर्तमान में दिल्ली में इलाज चल रहा है। आरोपियों ने स्वीकार किया कि राजकुमार के दबदबे की वजह से उनका परिवार और रिश्तेदार प्रताड़ित थे।




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