Kashi created a world record by planting more than 2 lakh 5 thousand saplings in one hour काशी ने रचा इतिहास, एक घंटे में ढाई लाख से ज्यादा पौधे रोपकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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काशी ने रचा इतिहास, एक घंटे में ढाई लाख से ज्यादा पौधे रोपकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

काशी ने पौधरोपण में विश्व रिकॉर्ड बना लिया है। साल 2018 में चीन में एक घंटे में 153981 के रिकॉर्ड को वाराणसी ने तोड़ दिया। डोमरी में 350 बीघा में विशेष पौधरोपण अभियान के तहत नगर निगम के नाम ये रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। मौके पर मौजूद गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम के जज ने ये घोषणा की।

Sun, 1 March 2026 01:48 PMPawan Kumar Sharma वरिष्ठ संवादादता, वाराणसी
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काशी ने रचा इतिहास, एक घंटे में ढाई लाख से ज्यादा पौधे रोपकर बनाया वर्ल्ड रिकॉर्ड

काशी ने पौधरोपण में विश्व रिकॉर्ड बना लिया है। साल 2018 में चीन में एक घंटे में 153981 के रिकॉर्ड को वाराणसी ने तोड़ दिया। डोमरी में 350 बीघा में विशेष पौधरोपण अभियान के तहत वाराणसी नगर निगम के नाम ये रिकॉर्ड दर्ज किया गया है। मौके पर मौजूद गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम के जज ऋषिनाथ ने ये घोषणा किया। गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड की टीम के 500 वालंटियरों ने पौधों की गिनती किया। एक घंटे में रोपे गए पौधों की गिनती अभी जारी है।

अब तक दो लाख 50 हजार पौधों की गिनती पूरी हुई है। महापौर अशोक कुमार तिवारी ने कहा कि काशीवासियों के सहयोग से ये विश्व रिकॉर्ड संभव हो सका। सभी पौधों को जीवित रखना नगर निगम का लक्ष्य है। जानकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ वृक्षारोपण कार्यक्रम के संबंध में प्रस्तुतीकरण देखेंगे और प्रमाणपत्रों का वितरण भी करेंगे।

Kashi world record by planting more than saplings in one hour.
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वन क्षेत्र को 60 सेक्टर में बांटा गया

इस 'शहरी वन' की सबसे अनूठी विशेषता इसकी बनावट है। पूरे वन क्षेत्र को 60 सेक्टरों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक सेक्टर का नाम काशी के प्रसिद्ध गंगा घाटों के नाम पर रखा गया है, जैसे-दशाश्वमेध, ललिता घाट, नया घाट, केदार घाट, चौशट्टी घाट, मानमंदिर घाट और शीतला घाट। प्रत्येक सेक्टर में पांच हजार पौधे रोपे जाएंगे। यह न केवल पौधों का समूह होगा, बल्कि गंगा किनारे एक हरा-भरा 'मिनी काशी' का स्वरूप नजर आएगा।

यह परियोजना केवल हरियाली तक सीमित नहीं है, बल्कि नगर निगम के लिए आय का बड़ा स्रोत भी बनेगी। मध्य प्रदेश की एमबीके संस्था के साथ हुए समझौते के तहत तीसरे वर्ष से ही निगम को दो करोड़ रुपये की आय होने लगेगी, जो सातवें वर्ष तक सात करोड़ रुपये वार्षिक तक पहुंच सकती है। यहां आम, अमरूद, पपीता के साथ-साथ अश्वगंधा, शतावरी और गिलोय जैसी औषधीय पौधे उगाए जाएंगे। फूलों की खेती में गुलाब, चमेली और पारिजात जैसे फूलों से राजस्व प्राप्ति का मॉडल तैयार किया गया है।

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पौधों को जिंदा रखने के लिए बिछाई गई पाइपलाइन

लाखों पौधों को जीवित रखने के लिए मियावाकी पद्धति के साथ आधुनिक सिंचाई प्रणाली का जाल बिछाया गया है। करीब 10,827 मीटर लंबी पाइपलाइन, 10 बोरवेल और 360 'रेन गन' सिस्टम लगाए गए हैं। साथ ही नदी किनारे की मिट्टी को बचाने के लिए शीशम, अर्जुन, सागौन और बांस जैसी 27 देशी प्रजातियों को प्राथमिकता दी गई है। पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए वन के भीतर चार किलोमीटर लंबा पाथवे भी बनाया गया है।

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एमपी में 12 घंटे में रोपे गए थे 6 करोड़ पौधे

मध्य प्रदेश (नर्मदा तट) में वर्ष 2017 में मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 12 घंटे में 6 करोड़ और एक घंटे के स्लॉट में सर्वाधिक 15 लाख पौधे लगाए गए थे। वहीं, पाकिस्तान (2021) में इमरान खान के कार्यकाल में 24 घंटे में सर्वाधिक 3.50 करोड़ पौधे ('10 बिलियन ट्री सुनामी' के तहत) लगाए गए थे। उत्तर प्रदेश (2016) में यूपी सरकार ने 24 घंटे के भीतर 5 करोड़ पौधे लगाए थे, जिसमें एक ही स्थान पर आठ लाख पौधों का रिकॉर्ड बना था।

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