12 साल से पुलिस के लिए मुखबिरी करने वाला निकला स्मगलर, गांजे की बांट रखी थी फ्रेंचाइजी
कानपुर पुलिस की मुखबिरी करते-करते एक आरोपी बड़ा गांजा तस्कर बन गया। पिछले 12 वर्षों से वह धड़ल्ले से अपना धंधा चला रहा था। इस दौरान वह कभी पकड़ा भी नहीं गया। जांच में सामने आया कि आरोपी तस्कर ने फ्रेंचाइजी बांट रखी थी और प्रति किग्रा की दर से वह उन्हें भुगतान करता था।

कानपुर पुलिस की मुखबिरी करते-करते एक आरोपी बड़ा गांजा तस्कर बन गया। पिछले 12 वर्षों से वह धड़ल्ले से अपना धंधा चला रहा था। इस दौरान वह कभी पकड़ा भी नहीं गया। इस बार भी पुलिस की पकड़ में तब आया जब कई मजबूत साक्ष्य सामने रखकर पूछताछ शुरू हुई। जांच में सामने आया कि आरोपी तस्कर ने फ्रेंचाइजी बांट रखी थी। प्रतिकिग्रा की दर से वह उन्हें भुगतान करता था। काकादेव के गांजा तस्कर उमेश चंद्र राजपूत उर्फ अश्वनी राजपूत फिलहाल वह जेल में है।
काकादेव का उमेश उर्फ अश्वनी वर्ष 2012-13 में आर्म्स एक्ट में पकड़ा गया था। इसके बाद उसने क्षेत्रीय पुलिस की मुखबिरी शुरू कर दी। कुछ समय बाद ही वह शुक्लागंज के तस्कर अकबर अली उर्फ चिंगारी के संपर्क में आया। उमेश पहले उससे छोटी मात्रा में गांजा व चरस खरीदकर बेचता था। कई साल तक वह यह काम करता रहा लेकिन मुखबिरी के चलते पकड़ा नहीं गया। कोविड के दौरान चिंगारी ने ओडिशा का रास्ता दिखाया। जिसके बाद वह खुद वहां से गांजा लाने लगा।
क्राइम ब्रांच के मुताबिक उमेश इतना शातिर है कि वह गांजा घर में नहीं ले जाता था और न ही कहीं रखता था। ओडिशा से ट्रेन के जरिये गांजा लाकर वह शुक्लागंज में चिंगारी को डिलीवरी दे देता था। चिंगारी क्षेत्रीय एजेंटों को माल सप्लाई करता था। क्राइम ब्रांच के अधिकारी के मुताबिक हर विजिट में उमेश को दोगुना फायदा होता था। गांजा लाने के लिए कई लोगों को रख लिया और उन्हें फ्रेंचाइजी बांट दी। प्रति किग्रा पांच हजार रुपये की दर से वह उन्हें भुगतान करता था।
इस तरह आया गिरफ्त में
सूत्रों के मुताबिक बीती एक मार्च को उसका एक एजेंट गांजे के साथ क्राइम ब्रांच के हत्थे चढ़ गया। उसने उमेश का नाम लिया लेकिन कोई साक्ष्य न होने पर पुलिस हाथ नहीं डाल सकी। इसके बाद पुलिस ने चिंगारी और उसके अन्य एजेंटो के बीच हुई बातचीत, सीसीटीवी फुटेज व अन्य इलेक्ट्रानिक साक्ष्य जुटाए। इन साक्ष्यों को सामने रखकर पूछताछ शुरू हुई तो वह टूट गया और पहली बार पकड़ा गया। पुलिस ने चार दिन पहले उसे 50 किग्रा गांजे में जेल भेजा है।
अनीता सोनकर की तलाश कर रही क्राइम ब्रांच
क्राइम ब्रांच ने अकबर अली के साथ अश्वनी राजपूत और मूलरूप से फतेहगढ़ के चाचूपुर ग्राम निवासी सलमाना बेगम 49.388 किग्रा गांजे के साथ जेल भेजा था। इस मामले में अनीता सोनकर की तलाश भी पुलिस कर रही है।
शक न हो इसलिए सुपरफास्ट ट्रेनों से करते थे सफर
सूत्र बताते हैं उमेश और एजेंट गांजा लाने के दौरान सुपरफास्ट और प्रीमियम ट्रेनों से ही सफर करते थे। ताकि उन पर कोई शक भी न कर सके। आरोपी मोबाइल स्विच ऑफ रखते थे ताकि किसी को उनके ओडिशा जाने की खबर न लगे। इस मामले में प्रभारी स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप सुमित सुधाकर रामटेके ने बताया कि उमेश पिछले कई वर्षों से गांजा तस्करी कर रहा है। वह बड़ा शातिर है। गांजा लाकर सीधे शुक्लागंज में सप्लाई देता था। उसके एक एजेंट को पकड़ा गया तब भी वह मुकर गया। एविडेंस के साथ पूछताछ की गई तो वह टूट गया और पहली बार पकड़ा गया।




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