पुलिस की मेहरबानी या सेटिंग का खेल? जिसे पकड़ना था उसे मिली सरकारी गनर की सुरक्षा
मेरठ कोर्ट से चार आरोपियों के पिछले 14 साल में 100 से ज्यादा वारंट जारी हुए। पिछले 15 महीने से गैर जमानती वारंट भी जारी हैं, लेकिन पुलिस इन आरोपियों को आज तक पकड़ नहीं पाई। इतना ही नहीं, एक आरोपी तो सरकारी गनर लेकर भी घूमता है।

यूपी के मेरठ कोर्ट से चार आरोपियों के पिछले 14 साल में 100 से ज्यादा वारंट जारी हुए। पिछले 15 महीने से गैर जमानती वारंट भी जारी हैं, लेकिन मेरठ पुलिस इन आरोपियों को आज तक पकड़ नहीं पाई। यह सेटिंग का खेल है या मेरठ पुलिस का नाकारापन कि आरोपी इतने सालों से कानून और पुलिस दोनों से आंख मिचौली खेल रहे हैं। ये बात और है कि आरोपी लगातार मेरठ में घूम रहे हैं और अपना तमाम काम भी कर रहे हैं। इतना ही नहीं, एक आरोपी तो सरकारी गनर लेकर भी घूमता है। आरोपियों ने इस दौरान सरकारी ठेके लेने के लिए चरित्र प्रमाण पत्र तक बनवाए, लेकिन पुलिस ने धरपकड़ नहीं की। अब सवाल उठता है कि आखिर पुलिस इस विशेष केस में ही मूक दर्शक क्यों बनी हुई है।
नौचंदी थाने में शास्त्रीनगर सेक्टर-7 निवासी योगेंद्र कुमार शर्मा ने 27 जुलाई 2009 को मुकदमा अपराध संख्या 437/2009 दर्ज कराया था। मुकदमा में 9 लोगों को कातिलाना हमले से समेत कई धाराओं में आरोपी बनाया था। इसी केस में चार आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट कोर्ट भेजी गई थी। कोर्ट में सुनवाई शुरू हुई, जिसके बाद आरोपियों के वारंट जारी किए गए थे। वर्ष 2014 में आरोपी पक्ष से विक्टर राघव, विजय सिंह, विकास चौबे और जगदीश पक्ष ने हाईकोर्ट में राहत के लिए याचिका दाखिल की। हाईकोर्ट ने स्थानीय कोर्ट में सरेंडर करने और आगे की प्रक्रिया कराने का आदेश दिया था। इसके बाद भी लगातार आरोपी कोर्ट से अनुपस्थित रहे और हाजिर नहीं हुए। वर्ष 2021 में दोबारा से हाईकोर्ट में गैर जमानती गिरफ्तारी वारंट से राहत के लिए हाईकोर्ट की शरण ली, लेकिन राहत नहीं मिली।
गनर लेकर घूम रहा एक आरोपी
पुलिस जहां एक ओर आरोपियों की धरपकड़ करने में नाकाम रही। वहीं दूसरी ओर एक आरोपी सरकारी गनर लेकर घूमता रहा। गनर के साथ आरोपी ने खुद ही अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर कई फोटो नवंबर 2025 और दिसंबर 2025 में अपलोड की। सवाल यही है कि इस आरोपी को गनर कैसे उपलब्ध हुआ। जिस आरोपी को पुलिस को गिरफ्तार करने के लिए कोर्ट आदेश दे रही थी, पुलिस उसे ही गनर उपलब्ध करा रही थी।
चार फरवरी 2012 से जारी हैं वारंट
इसी मामले में आरोपियों के 4 फरवरी 2014 से लेकर सितंबर 2024 तक वारंट जारी होते रहे। इसके बावजूद आरोपी कोर्ट में हाजिर नहीं हुए। इस मामले में हैरानी की बात ये है कि पुलिस ने आज तक आरोपियों की धरपकड़ नहीं की। पुलिस के पास सभी के नाम, पते और मोबाइल नंबर हैं, इसके बावजूद आरोपियों को अभयदान दिया गया। इसके बाद 18 नवंबर 2024 से लेकर फरवरी 2026 तक गैर जमानती वारंट भी जारी किए गए। इसके बाद भी आरोपियों को पुलिस ने नहीं पकड़ा।
वहीं, इस मामले में एसपी सिटी आयुष विक्रम सिंह का कहना है कि प्रकरण जानकारी में आया है। सभी की गिरफ्तारी के लिए नौचंदी पुलिस की टीम को लगाया गया है। गनर के संबंध में भी जानकारी कराई जा रही है। इतने समय में गिरफ्तारी पुलिस ने क्यों नहीं की, इसे लेकर जांच की जाएगी।




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