डॉक्टर रोहित करता था बेहोश, दिल्ली का डॉक्टर निकालता था किडनी; फ्लाइट से आती थी पूरी टीम
कानपुर किडनी कांड में बड़ा खुलासा हुआ है। पुलिस को बताया कि डॉ. रोहित एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट है। किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान डॉ. रोहित ही मरीजों को बेहोश करता था, जबकि दिल्ली के द्वारिका का रहने वाले डॉ. अली किडनी निकालने और लगाने का काम करता था। वह अपने साथ एक डॉक्टर और दो असिस्टेंट लेकर चलता था।

कानपुर के किडनी कांड में गिरफ्तार किए गए गाजियाबाद के ओटी टेक्नीशियनों राजेश कुमार, कुलदीप ने गुरुवार को अहम खुलासे किए। पुलिस को बताया कि डॉ. रोहित एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट है। किडनी ट्रांसप्लांट के दौरान डॉ. रोहित ही मरीजों को बेहोश करता था, जबकि दिल्ली के द्वारिका का रहने वाले डॉ. अली किडनी निकालने और लगाने का काम करता था। वह अपने साथ एक डॉक्टर और दो असिस्टेंट लेकर चलता था। इसके बाद बाद पुलिस इनकी तलाश में जुट गई है। हालांकि ओटी टेक्नीशियन डॉ. रोहित के बारे में अधिक जानकारी नहीं दे सके।
एनेस्थीसिया स्पेशलिस्ट है राजेश कुमार
गाजियाबाद के सुदामा पुरी के रहने वाले राजेश कुमार से पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने पूछताछ की। पुलिस आयुक्त के मुताबिक राजेश सर्वोदय हास्पिटल ग्रेटर नोएडा वेस्ट में ओटी मैनेजर है। उसे 70 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन मिलता है। 220 बेड का यह अस्पताल फरीदाबाद के राकेश गुप्ता का है। राजेश ने बताया कि तीन साल पहले गाजियाबाद के वैशाली हास्पिटल में एक सेमिनार के दौरान एनेस्थीसिया के स्पेशलिस्ट डॉ. रोहित से मुलाकात हुई थी। ओटी में उसकी विशेषज्ञता को देखते हुए डॉ. रोहित ने उससे मिलने की इच्छा जताई थी। इस पर वह कुलदीप सिंह राघव के साथ पहुंचा था। डॉ. रोहित ने अपना पूरा एजेंडा बताया। उसके भरोसे पर साथ काम करने को राजी हो गए थे।
दिल्ली का डॉ अली निकालता था किडनी
राजेश कुमार ने बताया कि जनवरी से अब तक वह लोग किडनी ट्रांसप्लांट के पांच ऑपरेशन कर चुके हैं। ऑपरेशन कौन करता था के सवाल पर राजेश ने बताया कि दिल्ली के द्वारिका का रहने वाला डॉ. अली किडनी निकालने और लगाने का काम करता था। डॉ. अली के साथ डॉ. सैफ भी रहता था। असिस्टेंट अखिलेश और शैलेंद्र भी रहते थे। सर्वोदय अस्पताल प्रबंधन के अनुसार राजेश नौकरी छोड़ चुका है। बुधवार को उसके काम का आखिरी दिन था। शांति गोपाल अस्पताल के निदेशक डॉक्टर संजय गर्ग का कहना है कि उन्हें खबरों से ही कुलदीप की गिरफ्तारी के बारे में पता चला। वह बेहद सामान्य रहता था।
फ्लाइट से आई थी पूरी टीम
डीसीपी पश्चिम ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट करने वाली डॉक्टरों की टीम चकेरी एयरपोर्ट पर फ्लाइट से आई थी। यह खर्च भी उस पैकेज में शामिल होता था जो रिसीवर से वसूला जाता था। आहूजा अस्पताल में ऑपरेशन करने वाली आठ डॉक्टरों की टीम फ्लाइट से आई थी। चूंकि ऑपरेशन में 5 से 6 घंटे तक लगा और आधी रात टीम वापस गई ऐसे में सड़क मार्ग से कार से वापस जाते थे। डीसीपी ने बताया कि ट्रांसप्लांट के बाद एक कार से पांच लोगों की टीम लखनऊ के ट्रांसपोर्ट नगर चौराहे पर उतरी थी। रेलबाजार का कार चालक अजय यादव लेकर गया था। चालक से पूछताछ हुई तो उसने बताया कि कार में बैठे लोग दमन दीव के ट्रिप की बात कर रहे थे।




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