‘जियो मेरे शेरों, बहुत बढ़िया’, मुस्कुराते हुए बेशर्मी से बोला मां-बेटी का गुनहगार रेपिस्ट
इस जघन्य गैंगरेप केस के एक दोषी युवक की सोशल मीडिया में खूब चर्चा हो रही है जिसने दो दिन पहले दोषी ठहराए जाने के दिन वापस जेल जाते समय बड़ी बेशर्मी से मुस्कुराते हुए कहा था- ‘जियो मेरे शेरों, बहुत बढ़िया, ऐ और लो’ सोमवार को सजा सुनाए जाने के बाद भी उस दोषी के चेहरे पर कोई पश्चाताप नहीं दिख रहा था।

देशभर में चर्चित बुलंदशहर के हाईवे गैंगरेप केस में करीब नौ साल बाद सोमवार को सजा सुनाई गई। विशेष सत्र न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम ओमप्रकाश वर्मा तृतीय के न्यायालय ने पांचों अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने पांचों अभियुक्तों पर 1.81-1.81 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। इसी के साथ इस जघन्य रेप कांड के एक दोषी युवक की सोशल मीडिया में खूब चर्चा हो रही है जिसने दो दिन पहले दोषी ठहराए जाने के दिन वापस जेल जाते समय बड़ी बेशर्मी से मीडिया कर्मियों से मुस्कुराते हुए कहा था- ‘जियो मेरे शेरों, बहुत बढ़िया, ऐ और…।’ सोमवार को सजा सुनाए जाने के बाद भी उस दोषी के चेहरे पर कोई पश्चाताप नहीं दिख रहा था।
मां-बेटी के साथ बुलंदशहर हाईवे पर हुए गैंगरेप का मामला न केवल उत्तर प्रदेश, बल्कि देशभर की सुर्खियां बना था। गैंगरेप का यह मामला सड़क से लेकर संसद तक गूंजा था। हर किसी ने नाबालिग बिटिया और उसकी मां के साथ हुई दरिंदी की कड़ी निंदा करते हुए दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा की मांग उठाई थी। हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ने इस मामले का संज्ञान लिया। आखिरकार दरिंदों को उनकी दरिंदगी की सजा मिलने की सभी की उम्मीदें शनिवार को उस वक्त पूरी होती दिखीं जब विशेष पॉक्सो न्यायाधीश ओपी वर्मा के न्यायालय ने उन्हें दोषी करार दिया। सोमवार को कोर्ट ने पांचों अभियुक्तों के उम्रकैद की सजा सुनाई तो पीड़ितों के साथ-साथ हर संवेदनशील शख्स ने थोड़ा सुकून महसूस किया। बता दें कि इस मामले में गुनहगारों को सजा दिलाए जाने के लिए 25 गवाह अभियोजन पक्ष की ओर से न्यायालय में पेश किए गए। विशेष लोक अभियोजक वरुण कौशिक ने बतया कि इस मामले में न्यायालय में 169 अभियोजन प्रपत्र प्रस्तुत किए गए। 27 जुलाई 2018 में न्यायालय में सीबीआई ने आरोप पत्र दाखिल किए थे। इस मामले में प्रत्येक 14वें दिन न्यायालय में तारीख लगा कर सुनवाई हो रही थी।
हुआ क्या था?
29 जुलाई 2016 को नेशनल हाईवे-91 पर बुलंदशहर के कोतवाली देहात क्षेत्र में दोस्तपुर फ्लाईओवर के पास नोएडा से कार सवार परिवार के साथ दरिंदगी हुई थी। नोएडा से शाहजहांपुर जा रहे परिवार की कार पर लोहे की कोई वस्तु फेंक कर रोक लिया गया था। दोषियों ने तीनों पुरुषों के हाथ-पैर बांध दिए और वादी की 14 वर्षीय पुत्री और पत्नी के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया था। पुलिस ने मामले में 11 आरोपी बनाए थे। इसके बाद जांच सीबीआई को सौंपी गई थी। सीबीआई की विवेचना के दौरान दो आरोपी नोएडा और हरियाणा में मुठभेड़ में मारे गए थे। वहीं तीन आरोपियों के नाम साक्ष्य के अभाव में निकाल दिए गए थे। सीबीआई ने छह अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। एक अभियुक्त सलीम की मृत्यु हो चुकी है। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से 25 गवाह पेश किए गए।
शनिवार को कोर्ट ने पांचों अभियुक्त जुबेर उर्फ सुनील उर्फ परवेज पुत्र अकिल निवासी ग्राम इटखारी बिनोरा, थाना तिरवा(कन्नौज), साजिद पुत्र वाहिद निवासी ग्राम इटखारी बिनोरा, थाना तिरवा(कन्नौज), धर्मवीर उर्फ राका उर्फ जितेन्द्र पुत्र कुन्दल लाल उर्फ विजयपाल निवासी ग्राम गेशनपुर, थाना मोहमदाबाद(फर्रुखाबाद), सुनील उर्फ सागर पुत्र जितेन्द्र निवासी ग्राम बानपोई आजाद नगर, थाना मोहमदाबाद(फर्रुखाबाद) और नरेश उर्फ सन्दीप उर्फ राहुल पुत्र रिचपाल निवासी ग्राम गेशनपुर, थाना मोहमदाबाद(फर्रुखाबाद) को दोषी करार दिया गया था। सोमवार को इन सभी को उम्रकैद की सजा सुनाई गई।




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