हाईवे पर मां-बेटी से गैंगरेप; कोर्ट ने नौ साल बाद सुनाया फैसला, पांचों अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा
विशेष सत्र न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम ओमप्रकाश वर्मा तृतीय के न्यायालय ने पांचों अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने पांचों अभियुक्तों पर 1.81-1.81 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है।

9 साल पहले हाईवे पर हुए गैंगरेप मामले में कोर्ट ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने गैंगरेप के दोषी पांचों अभियुक्तों को सोमवार को उम्रकैद की सजा सुनाई है। विशेष सत्र न्यायाधीश पॉक्सो अधिनियम ओमप्रकाश वर्मा तृतीय के न्यायालय ने पांचों अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने पांचों अभियुक्तों पर 1.81-1.81 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। विशेष लोक अभियोजक वरुण कौशिक ने बताया कि 29/30 जुलाई 2016 की रात नेशनल हाईवे-91 पर कोतवाली देहात क्षेत्र में दोस्तपुर फ्लाईओवर के पास नोएडा से कार सवार परिवार के साथ दरिंदगी हुई थी। नोएडा से शाहजहांपुर जा रहे परिजनों के सामने मां-बेटी से गैंगरेप और लूट की वारदात हुई थी। इस मामले में न्यायालय में छह अभियुक्तों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल हुई थी।
एक अभियुक्त सलीम बावरिया की वाद विचरण के दौरान 15 दिसंबर 2019 को मौत हो गई थी। शनिवार को न्यायालय ने गवाहों के बयान, साक्ष्यों का अवलोकन और अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनकर पांचों अभियुक्त जुबेर उर्फ सुनील उर्फ परवेज पुत्र अकिल निवासी ग्राम इटखारी बिनोरा, थाना तिरवा(कन्नौज), साजिद पुत्र वाहिद निवासी ग्राम इटखारी बिनोरा, थाना तिरवा(कन्नौज), धर्मवीर उर्फ राका उर्फ जितेन्द्र पुत्र कुन्दल लाल उर्फ विजयपाल निवासी ग्राम गेशनपुर, थाना मोहमदाबाद(फर्रुखाबाद), सुनील उर्फ सागर पुत्र जितेन्द्र निवासी ग्राम बानपोई आजाद नगर, थाना मोहमदाबाद(फर्रुखाबाद) और नरेश उर्फ सन्दीप उर्फ राहुल पुत्र रिचपाल निवासी ग्राम गेशनपुर, थाना मोहमदाबाद(फर्रुखाबाद) को दोषी करार देते हुए सजा के लिए सोमवार 22 दिसंबर का दिन नियत किया था।
सोमवार को न्यायाधीश ने दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की दलीलों को सुनकर पांचों अभियुक्तों को उम्रकैद की सजा सुनाई। पांचों अभियुक्तों पर 1.81-1.81 लाख रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। गौरतलब है कि यह मामला देश-प्रदेश में चर्चाओं में रहा था और शासनस्तर से तत्कालीन एसएसपी वैभव कृष्ण समेत 19 पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया था। इस मामले का उच्च न्यायालय द्वारा संज्ञान लिया था, जिसके बाद शासन की संस्तुति पर सीबीआई द्वारा जांच की गई थी।




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