बच्चों की भौंहे टेढ़ी, निजी अंग क्षत-विक्षत, जेई की हैवानियत को कोर्ट ने माना रेयरेस्ट ऑफ रेयर
बांदा कोर्ट ने जेई रामभवन और उसकी पत्नी के अपराधों को विरलतम से विरलतम (rarest of rare) करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई है। कोर्ट बच्चों की उन गवाहियों से द्रवित हो गया जिनमें निजी अंगों को क्षत-विक्षत करने का जिक्र था।

यूपी के बांदा में 34 बच्चों के यौन शोषण और उनके पोर्न वीडियो और अश्लील तस्वीरें बनाने के मामले में जेई रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को मृत्युदंड की सजा सुनाते हुए कोर्ट ने इस अपराध को विरलतम से भी विरलतम (rarest of rare) माना है। लोक अभियोजक कमल सिंह गौतम के अनुसार अदालत ने फैसले में कहा कि दोषियों ने ऐसा जघन्य कृत्य किया, जिससे किसी बच्चे की भौंह टेढ़ी हो गई तो किसी की आंख प्रभावित हो गई। बच्चों के निजी अंग क्षत-विक्षत हुए। ऐसे में कोर्ट ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई।
जेई रामभवन का घिनौना कृत्य बच्चे घटना के कई साल बाद भी भूल नहीं पाए। कोर्ट में बयान के दौरान कुछ बच्चे उसका कृत्य याद आने पर सहम जाते थे। पांच साल पहले भी जब सीबीआई ने जेई रामभवन से बच्चों से सामना कराया था तो उसे देख इतना डर गए कि कुछ बोलने को तैयार ही नहीं हुए। हालांकि बाल संरक्षण समिति के सदस्यों ने जब बच्चों को साहस दिलाया और अपलोड की गई वीडियो की क्लिप दिखाईं तो बच्चों ने जेई के घिनौने कृत्य की पूरी कहानी बयां कर दी थी।
शासकीय अधिवक्ता कमल सिंह गौतम ने बताया कि कोर्ट में पीड़ित बच्चों के बयान बमुश्किल से दर्ज किए गए थे। बच्चे जेई के घिनौने कृत्य याद आने पर सहम जाते थे। सिंचाई निर्माण खंड में कार्यरत रहे जेई रामभवन के इस घिनौने कृत्य को लोग आसानी से स्वीकार भी नहीं कर पा रहे। सीबीआई की टीम जब गिरफ्तारी के बाद रिमांड पर जेई रामभवन को लेकर आई और सिंचाई विभाग के गेस्ट हाउस में रखकर पूरे मामले की गहराई से तफ्तीश की तो उसके घिनौने कृत्य की परत-दर-परत खुलनी शुरू हो गईं।
गेस्ट हाउस में ही सीबीआई ने जेई रामभवन के घिनौने कृत्य के शिकार बच्चों को बुलाकर उनके बयान दर्ज किए थे। बच्चों का मामला होने की वजह से बाल संरक्षण समिति को पूछताछ के दौरान सीबीआई ने शामिल किया था। सीबीआई ने उस दौरान बच्चों को दो राउंड में बयान के लिए बुलाया था। पहली बार तो बच्चे कुछ बोलने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे थे लेकिन जब सीबीआई ने उनको जेई रामभवन के साथ घिनौने कृत्य वाली वीडियो क्लिप दिखाईं तो डरे-सहमे बच्चों ने स्वीकार किया कि इसमें वही है। इसके बाद सभी ने जेई की घिनौने कृत्य की पूरी कहानी सीबीआई के सामने लाकर रख दी।
दस साल तक दरिंदगी
सीबीआई के सूत्रों के अनुसार इंटरपोल ने 17 अक्तूबर 2020 को मामले की एक जानकारी साझा की थी। इसमें एक पेन ड्राइव भी थी, जिसमें 34 बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो और 679 फोटो शामिल थे। सीबीआई ने नई दिल्ली में 31 अक्तूबर 2020 को केस दर्ज कराया। जांच आगे बढ़ी तो खौफनाक बातें सामने आईं। पता चला 2010 यानी दस साल से यह सब चल रहा था। उसने एक दशक तक नाबालिग बच्चों को जाल में फंसाकर उनका यौन शोषण किया और उनके वीडियो बनाकर पोर्न साइट्स के जरिए बेचे थे। इस गंदे खेल में उसकी पत्नी दुर्गावती भी सहयोगी रही है। जो भोले-भाले बच्चों को महंगे गिफ्ट का लालच देकर घर लाती थी।
जांच में पता चला था कि दोषी बच्चों का सिर्फ यौन शोषण नहीं कर रहा था बल्कि उनकी वीडियोज पोर्न साइट्स को भी बेचता था। यह घिनौना काम वो पिछले दस सालों से कर रहा था। सीबीआई से पूछताछ में रामभवन ने कबूला था वह 50 से ज्यादा बच्चों के साथ घिनौना काम कर चुका है। जांच में यह भी साफ हुआ कि उसने न सिर्फ चित्रकूट बल्कि बांदा व हमीरपुर में बच्चों को शिकार बनाया था।
पांच से दस साल के बच्चों को फंसाता था
पांच से दस साल के बच्चों को लालच देकर फंसाता था। दुर्गावती बच्चों को महंगे गिफ्ट, मोबाइल, घड़ी, पेन, चॉकलेट आदि का लालच देकर बुलाती था। बच्चे जब जाल में फंस जाते थे तो रामभवन उनका यौन शोषण कर वीडियो डार्क वेब व पोर्न साइट्स को बेच देता था। जांच में सामने आया था कि रामभवन ने अश्लील सामग्री बेचने के लिए डार्कवेब का इस्तेमाल किया। उसने इन अश्लील वीडियो को देश-विदेश की कई साइटों पर भी अपलोड किए थे।
सीबीआई की जांच में सामने आया कि रामभवन वह बच्चों को मुंह बंद रखने के लिए मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण देता था। यौन शोषण कर उनके वीडियो बना लेता था। फिर फोटो-वीडियो ऑनलाइन लोड कर बेच देता था। उसके निशाने पर पांच से 15 साल तक के बच्चे रहते थे। उसने मुख्य रूप से हमीरपुर, चित्रकूट और बांदा के बच्चों को शिकार बनाया।




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