जंग की तपिश....पीएम और सीएम की घोषणा के बाद माननीयों ने काफिले के वाहन घटाए
Jaunpur News - - राज्यमंत्री के काफिले में रोज से कम दिखे वाहन, विधायकों का भी दिखा समर्थनवाददाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ क

जौनपुर, संवाददाता। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अपील और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के संदेश के बाद तेल बचाने के लिए लोग आगे आने लगे हैं। मंत्रियों के काफिले में शामिल वाहनों में 50 प्रतिशत तक कमी लाने के निर्देश के बाद जौनपुर में इसका असर दिखा। हालांकि अभी कोई लिखित आदेश नहीं आया है, लेकिन जौनपुर के माननीयों ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री की अपील को समर्थन देते हुए कदम बढ़ा दिया है। बुधवार को जिले के मंत्री, विधायक अपने काफिले को कम करते चलते नजर आए। हालांकि प्रशासनिक अधिकारियों के यहां अभी ऐसा कोई असर नहीं दिखा है。
बैठक का आयोजन
बुधवार को कलक्ट्रेट सभागार में विकास कार्यों के प्रस्ताव को लेकर बैठक आयोजित थी। इसमें जिले के सभी विधायक, सांसद, मंत्री आमंत्रित किए गए थे। तय समय पर जब माननीयों की गाड़ी पहुंची तो सबकी नजर उनके काफिले पर टिकी थी। इस दौरान उत्तर प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव जो सामान्य दिनों में चार वाहनों के साथ चलते थे वह महज दो गाड़ी से दिखे। इसी तरह बदलापुर विधायक रमेश चंद्र मिश्र सामान्य दिनों में तीन गाड़ी से चलते हैं, लेकिन यहां दो गाड़ियों के काफिले के साथ ही पहुंचे थे। हालांकि शाहगंज विधायक रमेश सिंह के साथ तीन गाड़ियों का काफिला दिखा। उन्होने कहा कि एक गाड़ी भाई की है, इसे कम किया जा सकता है। राज्यमंत्री गिरीश चंद्र यादव ने कहा कि सभी तेल बचाना चाहिए। हम खुद भी पूरा प्रयास कर रहे हैं कि हमारे साथ कम वाहन चलें। जितना जरूरी हो उतना ही चलें। बाकी लखनऊ में होने वाली बैठक में जो निर्देश मिलेगा उसी के अनुसार काम किया जाएगा।
वाहनों का तेल खर्च
200 से अधिक वाहनों में खर्च होता है पांच हजार लीटर तेल
जिले के 21 ब्लाक, छह तहसीलों और जिला मुख्यालय पर तैनात करीब 88 विभागों के अफसरों के पास 200 से अधिक वाहन हैं। ये ऐसे वाहन हैं जो या तो किसी ट्रेवल एजेंसी के माध्यम से लगे हैं या फिर सरकारी वाहन हैं। प्रशासनिक सूत्रों की मानें तो इन वाहनों पर 1500 से लेकर 2500 किलोमीटर हर महीने तक के तेल खर्च आते हैं। यानी करीब पांच हजार लीटर तेल खर्च होता है। फिलहाल प्रशासनिक अधिकारियों को तेल बचाने से जुड़ा कोई लिखित आदेश नहीं आया है। जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन ने बताया कि प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री ने जो अपील की है वह देशहित में की है। इसमें हर किसी को समर्थन करना चाहिए।
वीडियो कॉफ्रेंसिंग का लाभ
बैठकों के लिए तहसील और ब्लाक मुख्यालयों पर तैनात अधिकारी जिला मुख्यालय तक दौड़ लगाते हैं। एक अनुमान के मुताबिक यदि बैठकें वीडियो कॉफ्रेसिंग के जरिए होने लगें तो ब्लाक और तहसील के अफसरों को मुख्यालय पर नहीं आना पड़ेगा। आमतौर पर तहसील मुख्यालय पर प्रमुख विभागों में पांच-छह विभाग हैं, जिनके अधिकारी सप्ताह में कम से कम एक बार जरूर जिला मुख्यालय जाते हैं। वीडियो कॉफ्रिसिंग से ये अपने यहां से ही मीटिंग कर लेंगे। इससे छह तहसीलो और 21 ब्लाकों के अफसरों का तेल खर्च जरूर बचेगा।
सोने की डिमांड में बदलाव
महंगे होते सोने से वन कैरेट ज्वेलरी की डिमांड बढ़ी
सोने-चांदी पर बढ़ी इंपोर्ट ड्यूटी की वजह से कीमत में भी उछाल आने की पूरी संभावना है। इससे सराफा कारोबार प्रभावित होगा। इस कारोबार से जुड़े सुमित ने बताया कि घरेलू रिटेल सोने की कीमतों पर असर पड़ सकता है। बताया कि पहले ही महंगे सोने की वजह से कई लोग वन कैरेट ज्वैलरी की डिमांड कर रहे हैं। शादी-व्याह के सीजन में तो आर्टिफिशियल आभूषणनों की डिमांड भी खूब है।
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