गोरखपुर में जाफर अली शाह की मजार हटाई, मुसलमानों के विरोध के बीच बुलडोजर से सफाई
गोरखपुर में गोड़धोईया नाले के चौड़ीकरण के तहत पीडब्ल्यूडी जमीन पर बनी जाफर अली शाह मजार को हटाया गया। विरोध में स्थानीय लोग, खासकर महिलाएं, जुटीं लेकिन प्रशासन ने कार्रवाई जारी रखी।

गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के आवास विकास कॉलोनी के निकट गोड़धोईया पुल के पास सरकारी जमीन (पीडब्ल्यूडी की जमीन) पर बनी हजरत बाबा जाफर अली शाह ‘मासूम’ की मजार गुरुवार को हटा दिया गया। मजार हटाए जाने इसकी जानकारी आसपास के मोहल्ले के लोगों को हुई। मुसलमानों की भीड़ इकट्ठा हो गई। अल्पसंख्यक समाज के लोगों ने विरोध किया लेकिन प्रशासन के समक्ष उनकी एक नहीं चली। दरअसल, गोड़धोईया नाला चौड़ीकरण और निर्माण कार्य के बीच में आ रहे और सरकारी जमीन पर किसी भी अतिक्रमण वाले स्थल को हटाया जा रहा है।
जानकारी के अनुसार, यह मजार भी सरकारी जमीन में बना था। इस वजह से गुरुवार को इसे हटाया जा रहा था। प्रदर्शन करने वालों में महिलाएं भी शामिल थीं। उनका कहना था कि वे काफी समय से मजार पर आकर बाबा के आस्ताने में हाजिरी लगा कर मन्नत मांगती रही हैं। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई होते देख महिलाएं भावुक हो उठीं।
कार्रवाई के दौरान जुटे लोग
मिली जानकारी के मुताबिक यह मजार पीडब्ल्यूडी की जमीन पर बनी थी। ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों की मौजूदगी में हुई लेकिन उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जब प्रशासन का बुलडोजर मजार के पास पहुंचा, तो आवास विकास कॉलोनी और आसपास के इलाकों के पुरुष और महिलाएं वहां बड़ी संख्या में जुट गए। बरसों पुरानी आस्था का केंद्र होने के कारण कई लोग मजार को टूटता देख भावुक हो गए।
शांतिपूर्ण तरीके से हुआ ध्वस्तीकरण
हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने सख्त रुख अपनाते हुए लोगों को समझाया कि सरकारी जमीन और विकास कार्य के लिए यह कदम उठाना अनिवार्य है. भारी सुरक्षा घेरे के कारण प्रदर्शन की कोई स्थिति नहीं बनी और शांतिपूर्वक ध्वस्तीकरण पूरा हुआप्रशासन ने स्पष्ट किया कि गोड़धोइया नाला प्रोजेक्ट को समय सीमा के भीतर पूरा करने के लिए सभी बाधाओं को हटाया जा रहा है। मजार ध्वस्त होने के बाद अब वहां नाले के पुख्ता निर्माण और सड़क को चौड़ा करने का काम तेजी से शुरू हो सकेगा। पीडब्ल्यूडी और नगर निगम की टीमें अब मलबे को हटाने और आगे की जमीन के समतलीकरण में जुट गई हैं।
'गोड़धोइया नाला प्रोजेक्ट'
आपको बता दें 'गोड़धोइया नाला प्रोजेक्ट' मुख्यमंत्री का प्राथमिकता वाला प्रोजेक्ट है, जिसका उद्देश्य शहर की जल निकासी व्यवस्था को बेहतर करना है। इसी कड़ी में शाहपुर क्षेत्र में नाले के किनारे हुए अवैध कब्जों को चिन्हित किया गया था। जांच में पाया गया कि मासूम बाबा की मजार लोक निर्माण विभाग (PWD) की जमीन पर बनी थी. प्रोजेक्ट की ड्राइंग के अनुसार, मजार वाला हिस्सा चौड़ीकरण की बाधा बन रहा था, जिसके बाद इसे हटाने का निर्णय लिया गया।




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