यूपी में फिर बिजली के रेट बढ़ाने की कोशिश में पावर कॉरपोरेशन, जताया 10 हजार करोड़ घाटे का अनुमान
एआरआर के मुताबिक बिजली खरीद और उपभोक्ताओं से मिले राजस्व के बाद कॉरपोरेशन को करीब 10 हजार करोड़ रुपये का घाटा हो सकता है। इस अंतर के आधार पर पावर कॉरपोरेशन बिजली दर बढ़ोतरी प्रस्ताव दाखिल कर सकता है। हालांकि अभी तक कॉरपोरेशन ने बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं दिया है।

Electricity rates in UP: पावर कॉरपोरेशन उत्तर प्रदेश में एक बार फिर बिजली दरों में बढ़ोतरी कराने को लेकर प्रयासरत है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में कोई बढ़ोतरी न हो पाने के बाद कॉरपोरेशन ने शुक्रवार देर रात 2026-27 के लिए वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) नियामक आयोग में दाखिल कर दिया। पावर कॉरपोरेशन द्वारा दाखिल एआरआर करीब 1.25 लाख करोड़ रुपये का है। वहीं वितरण हानियां 13 फीसदी रहने का अनुमान बताया है। एआरआर में कॉरपोरेशन ने इसे करीब 9000 से 10,000 करोड़ रुपये दिखाया है।
मतलब बिजली खरीद और उपभोक्ताओं से मिले राजस्व के बाद भी कॉरपोरेशन को करीब 10 हजार करोड़ रुपये का घाटा हो सकता है। इस अंतर के आधार पर पावर कॉरपोरेशन बिजली दर बढ़ोतरी प्रस्ताव दाखिल कर सकता है। हालांकि अभी तक कॉरपोरेशन ने बिजली दर बढ़ोतरी का कोई प्रस्ताव नहीं दिया है।
कंपनियों पर 51 हजार करोड़ रुपये सरप्लस
एआरआर में दर्शाए गए गैप के आधार पर पावर कॉरपोरेशन बिजली दर बढ़ोतरी प्रस्ताव दाखिल कर सकता है। विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा के मुताबिक गैप के आधार पर बिजली दरों में 14-15 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव दे सकता है। वही ट्रू-अप वर्ष 2024 -25 का जो गैप है वह लगभग 4000 के करीब है। वर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर पहले से ही लगभग 51 हजार करोड़ रुपये का सरप्लस है। ऐसे में अगले पांच साल तक बिजली की दरों में कोई भी बढ़ोतरी नहीं हो सकती।
90 हजार करोड़ की बिजली खरीदेगा कॉरपोरेशन
नियामक आयोग में दाखिल किए एआरआर में बिजली कंपनियों ने 2026-27 में 90 हजार करोड़ रुपये की बिजली खरीद का प्रस्ताव दिया है। बता दें कि नियामक आयोग ने हाल ही में नया टैरिफ ऑर्डर जारी किया था। इसमें बिजली दरों में कोई बढ़ोतरी नहीं की गई थी। टैरिफ ऑर्डर देर से जारी होने के कारण आयोग ने बिजली कंपनियों के लिए एआरआर दाखिल करने की समयसीमा बढ़ाकर 15 दिसंबर कर दी थी।




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