क्या आपके बिजली बिल में जुड़ा है ये ब्याज? यूपी के पौने 4 करोड़ उपभोक्ताओं को नहीं मिला
प्रदेश के करीब 3.73 करोड़ बिजली उपभोक्ताओं को उनकी जमा सिक्योरिटी धनराशि पर ब्याज नहीं मिला। यह अप्रैल या मई के बिल में मिल जाना चाहिए था। मगर जून की बिलिंग शुरू होने के बावजूद उपभोक्ताओं को इसका लाभ नहीं मिल पाया है। यह मौजूदा ब्याज दर के हिसाब से मिलता है, जो फिलहाल 6.50 फीसदी है।
Electricity Bill : उत्तर प्रदेश के करीब 3.73 करोड़ विद्युत उपभोक्ताओं को उनकी जमा सिक्योरिटी धनराशि पर ब्याज नहीं मिला। सामान्य तौर पर यह अप्रैल या मई के बिल में मिल जाना चाहिए था। मगर जून की बिलिंग शुरू होने के बावजूद उपभोक्ताओं को ब्याज का लाभ नहीं मिल पाया है। यह ब्याज मौजूदा ब्याज दर के हिसाब से मिलता है, जो फिलवक्त 6.50 फीसदी है। यह धनराशि तकरीबन 300 करोड़ रुपये है। उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने यह मामला उठाते हुए तत्काल बिलिंग सॉफ्टवेयर में व्यवस्था कराकर ब्याज देने की मांग की है। दरअसल पोस्टपेड कनेक्शन धारकों द्वारा जमा धनराशि पर इसका ब्याज दिए जाने का प्रावधान है इसका समायोजन उनके बिजली बिलों में अप्रैल से जून माह के दौरान किया जाता है।
उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने कहा है कि जून माह प्रारंभ हो चुका है और उपभोक्ताओं द्वारा 1 जून से अपने बिजली बिलों का भुगतान भी किया जा रहा है, लेकिन अभी तक बिजली कंपनियों के बिलिंग सॉफ्टवेयर में उपभोक्ताओं की सिक्योरिटी पर देय ब्याज समायोजित करने की व्यवस्था नहीं की गई है। यह न केवल गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है, बल्कि कानूनी प्रावधानों की भी अवहेलना है।
उन्होंने बताया कि वर्ष 2025-26 में प्रदेशभर के विद्युत उपभोक्ताओं की औसत जमा सिक्योरिटी लगभग 4,616 करोड़ रुपये है। 6.50 प्रतिशत बैंक दर के आधार पर प्रदेश के उपभोक्ताओं को लगभग 300 करोड़ रुपये ब्याज के रूप में प्राप्त होने हैं। यह राशि उपभोक्ताओं का अधिकार है, जिसे तत्काल उनके बिजली बिलों में समायोजित किया जाना चाहिए। परिषद ने पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन एवं राज्य सरकार से मांग की है कि बिलिंग सॉफ्टवेयर में तत्काल आवश्यक व्यवस्था कराकर उपभोक्ताओं को उनका वैधानिक लाभ प्रदान किया जाए।
10 प्रतिशत अधिभार शुल्क लगाना गलत:परिषद
अवधेश वर्मा ने कहा कि एक ओर सिक्योरिटी पर ब्याज देने के लिए आज तक सॉफ्टवेयर में व्यवस्था नहीं की गई है, वहीं दूसरी ओर विद्युत नियामक आयोग द्वारा 10 प्रतिशत ईंधन अधिभार शुल्क को कानून के विरुद्ध बताने के बावजूद उसे 1 जून से बिजली बिलों में लागू कर दिया गया है। उपभोक्ताओं से वसूली में कॉरपोरेशन त्वरित कार्रवाई करता है, लेकिन उनके देय लाभ देने में अनावश्यक विलंब किया जाता है।




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