ईरान-इजराइल युद्ध: घर में प्लम्बर से बिजली वायरिंग तक हुई महंगी; जानें किस-किस चीज के रेट बढ़े?
गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण की प्लास्टिक आधारित यूनिटों में कच्चे माल की महंगाई का असर दिख रहा है। प्लंबर से लेकर बिजली वायरिंग के काम में महंगाई का असर दिख रहा है। इंडस्ट्रियल एरिया में प्लास्टिक का बोरा बनाने वाली यूनिट में कीमतों का असर दिख रहा है।

Iran-Israel War: अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध से बिगड़े हालात से बढ़ रही क्रूड ऑयल की कीमतों का चौतरफा मार बाजार में दिख रहा है। क्रूड ऑयल की महंगाई से प्लास्टिक प्रोडक्ट, मोबिल, बोरा, इलेक्ट्रिक उत्पाद की कीमतों में जबरदस्त इजाफा हो गया है। प्लास्टिक बोरे के प्रोडक्शन कास्ट पर 10 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो गई है। गर्मी में कूलर, एसी और पंखे की मांग बढ़ी हुई है। दुकानदारों ने इनकी कीमतों में इजाफा कर दिया है। वहीं रियल एस्टेट सेक्टर में प्लास्टिक, इलेक्ट्रिक से लेकर सरिया की बढ़ी कीमतों कर असर दिख रहा है।
गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) की प्लास्टिक आधारित यूनिटों में कच्चे माल की महंगाई का असर दिख रहा है। प्लंबर और बिजली वायरिंग के काम में महंगाई का असर दिख रहा है। गीडा से लेकर इंडस्ट्रियल एरिया में 50 से अधिक छोटी-बड़ी यूनिटें हैं, जहां प्लास्टिक का उपयोग होता है। इंडस्ट्रियल एरिया में प्लास्टिक का बोरा बनाने वाली यूनिट में कीमतों का असर दिख रहा है। उद्यमियों का कहना है कि जो प्लास्टिक दाना अलग-अलग क्वालिटी का 80 से लेकर 150 रुपये प्रति किलो तक है। प्लास्टिक दाना सप्लाई करने वाली कंपनियां रेट भी नहीं खोल रही है। गीडा में बिजली वायरिंग वाली पाइप बनाने वाली यूनिटों में प्रोडक्शन में कटौती कर दी गई है। उद्यमी भोलेन्द्र पटेल का कहना है कि पीवीसी रेजीम जो सप्ताह भर पहले 70 रुपये प्रति किलो था, वह 95 रुपये पहुंच गया है।
प्रति बंडल 10 से 20 फीसदी तक की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी गई है। गीडा में बड़े पैमाने बाल्टी, गमला, पाइप बनाने वाली यूनिटें हैं। जहां उत्पादन प्रभावित हो रहा है। उद्यमी विनय अग्रवाल का कहना है कि पालीमर की कीमतों में 25 फीसदी तक बढ़ोतरी हो गई है। कीमत बढ़ने के बाद भी माल की आपूर्ति नहीं हो रहा है। अब तो उत्पादन भी प्रभावित होता दिख रहा है। इंडस्ट्रियल एरिया में बीएन डायर्स के प्रमुख विष्णु अजीतसरिया का कहना है कि कंपनी में सिंथेटिक धागा पेट्रोलियम पदार्थ का ही बाई प्रोडक्ट है। सप्ताह भर में दो बार में 12 फीसदी तक बढ़ोतरी हो गई है। प्रोडक्शन कास्ट में बढ़ोतरी हो गई है। शुरुआत में यह हाल है तो युद्ध लंबा खिचा तो और बुरे हालात होंगे। रियल एस्टेट कारोबारी दीपक सिंह का कहना है कि बड़े प्रोजेक्ट में प्लास्टिक के पाइप से लेकर बिजली के काम पर बड़ा हिस्सा खर्च होता है। ड्रेनेज पाइप से लेकर वायरिंग के पाइप की कीमतों में अच्छी बढ़ोतरी हो गई है।
कूलर से लेकर मोटर तक महंगा
पेट्रोलियम पदार्थों की कीमतों के बढ़ने का असर है कि प्लास्टिक के पाइप तो महंगे हुए ही हैं, कॉपर और एल्युमिनियम में भी महंगाई दिख रही है। गीडा में कूलर-पंखा बनाने वाले सनूप साहू का कहना है कि कूलर, वाशिंग मशीन, पंखा आदि में प्लास्टिक, कापर, एल्युमिनियम का प्रयोग होता है। प्रति कूलर कीमतों में 300 से 400 रुपये का अंतर आ गया है। विजय चौक पर प्रतिष्ठित कारोबारी आनंद रूंगटा ने बताया कि प्लास्टिक की पाइप में प्रति बंडल 60 रुपये की बढ़ोतरी हुई है।
9 मार्च से 30 रुपये की अतिरिक्त बढ़ोतरी का अंदेशा है। पाइप की गाड़ी जो 15 लाख रुपये में आती थी, उसकी कीमत 18 लाख रुपये पहुंच गई है। महंगे पाइप से बिक्री पर भी असर पड़ना तय है। गोरखपुर इलेक्ट्रिकल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव रस्तोगी का कहना है कि बिजली के सामान जैसे स्विच, साकेट आदि की कीमतों में भी 15% की बढ़ोतरी है। बाजार में डिमांड पर भी असर दिख रहा है। आने वाले दिनों में ऑयल पेंट और रंगों की कीमतों में भी बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है।




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