इंटर पास युवक ने 9 साल तक जेई को लगाया चूना, खुद को RBI अफसर बताकर ठगे 95 लाख
कानपुर में इंटर पास युवक ने आरबीआई का अफसर बन जेई से 95 लाख रुपये ठग लिए। शातिर ने यह राशि पिछले 9 साल में अपने और पत्नी के खाते में ट्रांसफर कराई। पीड़ित ने पॉलिसी लैप्स होने पर गूगल से नंबर खोजा था। इसके बाद ठग पैसा रिफंड कराने के नाम पर रुपये ट्रांसफर कराता रहा।
UP News: यूपी के कानपुर में इंटर पास युवक ने आरबीआई का अफसर बन पुलिस आवास विकास निर्माण निगम के जेई से 95 लाख रुपये ठग लिए। शातिर ने यह राशि पिछले नौ साल में अपने और पत्नी के खाते में ट्रांसफर कराई। पीड़ित ने पॉलिसी लैप्स होने पर गूगल से नंबर खोजा था। इसके बाद ठग पैसा रिफंड कराने के नाम पर रुपये ट्रांसफर कराता रहा। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी और उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया है।
डीसीपी सेंट्रल अतुल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि शारदानगर निवासी जितेंद्र कुमार श्रीवास्तव पुलिस आवास निर्माण निगम में जेई थे। उन्होंने 28 बीमा पॉलिसी ली थीं। किस्त जमा न होने के चलते 22 पॉलिसी लैप्स हो गईं। पैसा रिफंड कराने के लिए उन्होंने 2017 में गूगल पर नंबर सर्च किया। वह आरबीआई की फिशिंग वेबसाइट पर पहुंच गए, जहां से एक मोबाइल नंबर मिला। उक्त नंबर पर फोन किया तो सामने वाले ने खुद को आरबीआई का जनरल मैनेजर बताते हुए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का फर्जी नोटिस जेई को व्हाट्सएप कर दिया। लैप्स पॉलिसी को शुरू कराने के नाम पर फर्जी अलग-अलग बहाने से 95 लाख रुपये ट्रांसफर करा लिए। 2022 में रिटायरमेंट भी हो गया। लंबे समय से पैसे देने के बाद भी पॉलिसी प्रीमियम रिफंड न होने पर रिटायर्ड जेई ने नजीराबाद थाने में शिकायत की। सेंट्रल जोन साइबर सेल के प्रभारी दरोगा तनुज सिरोही, स्वाट प्रभारी शिवकुमार शर्मा की टीम ने जांच शुरू की तो कड़ियां खुलती चली गईं।
जेके मंदिर के पास बुलाया : डीसीपी सेंट्रल ने बताया कि आरोपी युवक को पीड़ित ने फोन कर नकद पैसे देने के लिए जेके मंदिर नहरिया के पास बुलाया। यहां नजीराबाद पुलिस ने ठग व उसकी पत्नी को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपियों ने नाम सुल्तानपुर के अलीमुद्दीनपुर गिधौना गांव निवासी दीपक सिंह व आंचल बताया। डीसीपी सेंट्रल ने बताया कि दीपक इंटर पास है, जबकि पत्नी आंचल ने जीएनएम का कोर्स किया है। जांच में सामने आया कि आंचल के खाते में ठगी के 15 लाख रुपये और शेष रकम दीपक ने अपने खाते में ट्रांसफर कराई थी।
पैर के ऑपरेशन के लिए पैसों की जरूरत थी
आरोपी दीपक ने बताया कि वर्ष 2022–23 में रिटायर्ड जेई से फोन पर बात हुई थी। उसने कोई वेबसाइट नहीं बनाई। रिटायर्ड जेई ने ही उसे फोन किया था। आरोपी ने कहा कि पैर के ऑपरेशन के लिए उसे रुपयों की जरूरत थी। रिटायर्ड जेई को पॉलिसी प्रीमियम का रिफंड लेना था, जिस पर उसने खुद को रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया का मैनेजर बताकर बातचीत शुरू की। दीपक ने बताया कि उसने अपने खाते से पत्नी के खाते में पैसा ट्रांसफर किया था। पत्नी जब पूछती कि पैसा कहां से आया तो कहता कि दोस्त इलाज के लिए पैसा ट्रांसफर कर रहे हैं।
डीसीपी सेंट्रल ने बताया कि दीपक ने साल 2017 में आरबीआई की फिशिंग वेबसाइट बनाई थी। रिटायर्ड जेई को झांसे में लेने के बाद आरोपी ने फिशिंग साइट बंद कर दी थी। फोन के जरिए रिटायर्ड जेई के संपर्क में था। आरोपियों के पास से एक एक्सयूवी कार, आईफोन-15, वीवो मोबाइल, लैपटॉप, चेकबुक व अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद किए गए हैं।




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