बसपा विधायक उमाशंकर पर 100 करोड़ की आयकर चोरी का शक, 60 घंटे बाद लौटीं टीमें
बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर 60 घंटे की छापेमारी के बाद आयकर टीमें वापस लौट गई हैं। विभाग को 100 करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी और कई बेनामी संपत्तियों के सुराग मिले हैं।

वाराणसी/बलिया। पूर्वांचल के दिग्गज बसपा विधायक उमाशंकर सिंह के ठिकानों पर आयकर विभाग (Income Tax) की अब तक की सबसे बड़ी छापेमारी शनिवार सुबह समाप्त हो गई। वाराणसी, बलिया और सोनभद्र समेत आठ ठिकानों पर करीब 60 घंटे तक चली इस मैराथन कार्रवाई में विभाग को 100 करोड़ रुपये से अधिक की आयकर चोरी के प्रारंभिक साक्ष्य मिले हैं। जांच पूरी कर टीमें लौट चुकी हैं, लेकिन जब्त किए गए दस्तावेजों ने विधायक की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।
तीन दिनों तक चली जांच
आयकर विभाग की टीमें बुधवार सुबह करीब 10:30 बजे विधायक के पैतृक गांव खनवर (बलिया) पहुंची थीं, जो शुक्रवार रात 10:30 बजे वहां से निकलीं। बलिया में 60 घंटे, सोनभद्र में 55 घंटे और वाराणसी में शुक्रवार देर रात ढाई बजे तक अधिकारी जांच में जुटे रहे। इस दौरान विधायक के आवास, कार्यालय, रसड़ा स्थित होटल और उनके करीबियों के घरों की सघन तलाशी ली गई।
सोनभद्र और मिर्जापुर में खनन की 'कुंडली' खंगाली
सोनभद्र में 55 घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान आयकर अधिकारियों ने न केवल विधायक बल्कि उनके तीन करीबियों के व्यापारिक रिकॉर्ड्स भी खंगाले। टीम ने खनन विभाग के कार्यालय से भी डेटा जुटाया ताकि यह पता चल सके कि नियमों के विरुद्ध जाकर कितना अवैध खनन किया गया है। ओबरा, चोपन और मिर्जापुर के क्रशर प्लांट पर भी घंटों पूछताछ की गई। अधिकारियों ने बैंक खातों के ट्रांजेक्शन और माइनिंग लीज से जुड़े दस्तावेजों का मिलान किया है।
बेनामी संपत्तियों के मिले सुराग
सूत्रों के अनुसार, छापेमारी के दौरान आयकर विभाग को कई बेनामी संपत्तियों के दस्तावेज मिले हैं। वाराणसी की डीआईजी कॉलोनी स्थित ठिकानों से डिजिटल रिकॉर्ड और लेनदेन के अहम कागजात जब्त किए गए हैं। विभाग अब विधायक के पार्टनरों और सहयोगी कंपनियों की संपत्तियों की भी स्क्रूटनी कर रहा है। जांच के घेरे में 50 से अधिक लोग आए हैं जिनसे पूछताछ की गई है।
200 अधिकारी और 150 वाहनों का काफिला
इस पूरी कार्रवाई की विशालता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसमें 200 से अधिक अधिकारी और कर्मचारी शामिल थे। छापेमारी के लिए 150 से अधिक वाहनों का इस्तेमाल किया गया ताकि एक साथ सभी जिलों में घेराबंदी की जा सके। हालांकि विभाग ने अभी आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन संकेतों के अनुसार, साक्ष्यों के आधार पर टीम दोबारा भी दस्तक दे सकती है।




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