ड्रोन और अनमैंड एयर व्हीकल में IIT कानपुर की बड़ी उपलब्धि, वायुसेना के बेड़े में होंगे शामिल
वायु सेना अधिकारियों ने एक-एक स्टार्टअप के फाउंडर से बात कर नवाचार की खासियतें देखीं। सेना के अधिकारियों ने स्टार्टअप्स को विभिन्न चुनौतियों से भी अवगत कराया। साथ ही, इन चुनौतियों को अनुसंधान की मदद से दूर कर स्टार्टअप्स को और बेहतर बनाएं।

UP News: भारतीय वायुसेना के बेड़े में अब आईआईटी के ड्रोन, यूएवी (अनमैंड एयर व्हीकल) के साथ अत्याधुनिक तकनीक को जल्द शामिल करने की तैयारी है। जिससे सीमा पर न सिर्फ सुरक्षा मजबूत रहे बल्कि दुश्मनों को भी करारा जवाब दिया जा सके। इसको लेकर वायु सेना के एयर वाइस मार्शल टीपी सिंह ने अपनी टीम के साथ आईआईटी कानपुर के एसआईआईसी (स्टार्टअप इंक्यूबेशन एंड इनोवेशन सेंटर) का भ्रमण किया। उन्होंने एयरोस्पेस, डिफेंस और इमर्जिंग टेक्नोलॉजी से जुड़े नवाचार और उत्पादों का बारीकी से परीक्षण कर उसकी खासियतें जानी। साथ ही, उन्होंने डिफेंस से जुड़ी चुनौतियों के अनुसार ट्रायल कर जानकारी देने का निर्देश दिया।
वायु सेना के एयर वाइस मार्शल टीपी सिंह, एयर कमोडोर एमके मिश्रा, एयर कमोडोर मुकुल भाटिया, ग्रुप कैप्टन ए ठाकुर, विंग कमांडर ईवी लावान्या, विंग कमांडर चंदन तिवारी, विंग कमांडर मानवेंद्र सिंह और विंग कमांडर शैलेंद्र सीता ने आईआईटी के एसआईआईसी का भ्रमण कर नवाचार की जानकारी ली।
वायु सेना अधिकारियों ने एक-एक स्टार्टअप के फाउंडर से बात कर नवाचार की खासियतें देखीं। जिसमें सौर ऊर्जा से उड़ान भरने वाला यूएवी, दुश्मनों के घर में घुसकर तबाही मचाने वाला कॉमिकेज ड्रोन, सीमा पर सर्विलांस करने वाले छोटे-छोटे ड्रोन, आपदा में मदद करने वाले ड्रोन, अधिक वजन उठाकर पहाड़ी इलाकों तक सुरक्षित पहुंचाने वाले ड्रोन, रडार को चकमा देकर मिशन को पूरा करने वाले ड्रोन व यूएवी को देखा। सेना के अधिकारियों ने स्टार्टअप्स को विभिन्न चुनौतियों से भी अवगत कराया। साथ ही, इन चुनौतियों को अनुसंधान की मदद से दूर कर स्टार्टअप्स को और बेहतर बनाएं।
सेना के अधिकारियों ने टेक्नोपार्क, एयरस्ट्रिप एवं हैंगर सुविधा, टेस्टिंग लैब्स, नेशनल विंड टनल सुविधा, ईएमआई लैब्स आदि का भी भ्रमण कर वहां चल रहे नवाचार और अनुसंधान की जानकारी ली। एसआईआईसी के प्रोफेसर इन चार्ज प्रो. दीपू फिलिप की अगुवाई में टीम ने सेना के अधिकारियों को नवाचार की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में संस्थान के वैज्ञानिक और स्टार्टअप्स की ओर से तैयार किए गए 30 अलग-अलग प्रकार के ड्रोन का इस्तेमाल सेना के अलग-अलग क्षेत्र में किया जा रहा है। इस निरीक्षण के बाद उम्मीद है कि वायु सेना के बेड़े में कानपुर के और अधिक ड्रोन और यूएवी शामिल होंगे।




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