यूपी बोर्ड पर भी जंग का असर! संघर्ष लंबा खिंचा तो अगले साल की मार्कशीट पर आएगा संकट
मध्य पूर्व में चल रही जंग लंबी खिंचने का असर यूपी बोर्ड पर भी पड़ रहा है। दरअसल पिछले साल से ऐसे कागज पर अंक पत्र सह प्रमाणपत्र देना शुरू किया है जो न तो फट सकता है और न ही गलेगा। मार्कशीट में जिस खास मैटेरियल का बनता है वह क्रूड ऑयल के निकलने के बाद बचने वाले कचरे से तैयार होता है।

UP News: मध्य पूर्व में चल रही जंग लंबी खिंचने का असर यूपी बोर्ड के परीक्षार्थियों को मिलने वाले अंक पत्र पर भी पड़ सकता है। बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने पिछले साल से ऐसे कागज पर अंक पत्र सह प्रमाणपत्र देना शुरू किया है जो न तो फट सकता है और न ही गलेगा। मार्कशीट में जिस खास मैटेरियल का उपयोग हो रहा है वह क्रूड ऑयल से पेट्रोलियम उत्पादों के निकलने के बाद बचने वाले कचरे से तैयार होता है। चूंकि मध्य पूर्व में जंग के कारण दुनियाभर में क्रूड ऑयल की सप्लाई प्रभावित हुई और भारत भी इससे अछूता नहीं है तो ऐसे में यूपी बोर्ड को खास अंक पत्र उपलब्ध करने वाली एजेंसियों के हाथ-पांव भी फूले हुए हैं।
इस साल जंग से पहले ही अंकपत्र का टेंडर होने के कारण एजेंसियां आर्थिक नुकसान सहकर भी इस साल हाईस्कूल और इंटरमीडिएट के 53 लाख से अधिक छात्र-छात्राओं को नॉन-टियरेबल (न फटने वाले) अंकपत्र उपलब्ध कराने पर विवश हैं। हालांकि ऐसे ही हालात बने रहे तो अगले साल मैटेरियल की उपलब्धता में कठिनाई आ सकती है।
इस अंक पत्र की क्या है खासियत?
● यूपी बोर्ड ने पिछले साल से ऐसे अंकपत्र देना शुरू किया है जो फटता नहीं
● अंकपत्र में लगने वाला खास मैटेरियल पेट्रोलियम कचरे से तैयार होता ह
● ईरान-इजरायल संषर्घ के कारण प्रभावित है पेट्रोलियम पदार्थों की सप्लाई
● अंकपत्र के मैटेरियल मिलने में होगी परेशानी
25 से 29 अप्रैल के बीच आ सकता है परिणाम
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा का परिणाम इस बार 25 से 29 अप्रैल के बीच संभावित है। पिछले साल एक अप्रैल तक मूल्यांकन पूरा हो गया था और परिणाम 25 अप्रैल को घोषित हुआ था। इस साल चार अप्रैल तक कॉपियां जांची गई है। इस लिहाज से 25 से 29 के बीच परिणाम घोषित करने की तैयारी चल रही है।
दस अप्रैल तक विवरण में संशोधन का मौका
यूपी बोर्ड की 10वीं-12वीं परीक्षा में पंजीकृत छात्र-छात्राओं के विवरण जैसे नाम, माता-पिता का नाम, विषय, जेंडर आदि में संशोधन के लिए दस अप्रैल तक का मौका है। पिछले साल परिणाम तैयार होने के पहले तक संशोधन की अनुमति दी गई थी। हालांकि इस साल बोर्ड सचिव भगवती सिंह ने साफ कर दिया है कि दस अप्रैल के बाद संशोधन का कोई मौका नहीं मिलेगा। दस के बाद पांचों क्षेत्रीय कार्यालयों से प्रमाण पत्र लिया जाएगा कि उनके यहां संशोधन का कोई प्रकरण नहीं है।




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