if the iran israel war drags on these businesses in up will face a severe crisis with a direct impact on exports ईरान-इजराइल युद्ध खिंचा तो यूपी में इन कारोबारों पर गहराएगा संकट, निर्यात पर सीधा असर, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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ईरान-इजराइल युद्ध खिंचा तो यूपी में इन कारोबारों पर गहराएगा संकट, निर्यात पर सीधा असर

पहल इंडिया फाउंडेशन के सहायक शोधकर्ता जशन कक्कड़ के अनुसार UAE ईरान की तुलना में निर्यात की दृष्टि से यूपी के लिए बहुत बड़ा बाजार है। युद्ध की आंच यहां सप्लाई होने वाली वस्तुओं पर गहरी होगी। UP से यूएई को सर्वाधिक लगभग 27 प्रतिशत नगों (रत्न) व सोने-चांदी के आभूषणों की सप्लाई होती है। 

Sun, 8 March 2026 03:08 PMAjay Singh विशेष संवाददाता, लखनऊ
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ईरान-इजराइल युद्ध खिंचा तो यूपी में इन कारोबारों पर गहराएगा संकट, निर्यात पर सीधा असर

Iran-Israel War: ईरान पर हमले के बाद जैसे-जैसे खाड़ी देशों में अशांति के बादल गहरा रहे हैं, वैसे-वैसे प्रदेश के मीट और चीनी कारोबारियों की बेचैनी भी बढ़ती जा रही है। खाड़ी में युद्ध का सीधा असर प्रदेश के निर्यात पर पड़ेगा। ऐसे में यूएई को होने वाला लगभग 11 हजार करोड़ के निर्यात में सबसे अधिक प्रभाव जेम-एंड-ज्वैलरी और मीट के कारोबार पर पड़ेगा।

खाड़ी देशों में बिगड़े हालात पर कारोबारियों के साथ विशेषज्ञों की गहरी नजर है। उनका आकलन है कि यदि हालात जल्द न सुधरे तो प्रदेश के निर्यात को गहरा झटका लगेगा। पूर्वांचल से खाड़ी देशों को जाने वाले चावल के कारोबार को भी धक्का लगेगा। आंकड़ों की मानें तो प्रदेश से ईरान को होने वाले निर्यात में सर्वाधिक 42 प्रतिशत मीट की सप्लाई होती है। इसके अलावा लगभग साढ़े सात प्रतिशत चीनी और सात प्रतिशत अनाज भेजा जाता है। ईरान में मेडिकल से जुड़े उपकरणों की सप्लाई भी की जाती है।

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पहल इंडिया फाउंडेशन के सहायक शोधकर्ता जशन कक्कड़ के अनुसार यूएई ईरान की तुलना में निर्यात की दृष्टि से यूपी के लिए बहुत बड़ा बाजार है। युद्ध की आंच यहां सप्लाई होने वाली वस्तुओं पर गहरी होगी। प्रदेश से यूएई को सर्वाधिक लगभग 27 प्रतिशत नगों (रत्न) व सोने-चांदी के आभूषणों की सप्लाई होती है। इसके बाद 15 प्रतिशत से अधिक मीट का निर्यात शामिल है। यूएई को गारमेंट व इलेक्ट्रानिक उपकरणों का निर्यात भी पांच प्रतिशत से अधिक है। यदि खाड़ी क्षेत्र में लाजिस्टिक्स और शिपिंग मार्ग अस्थिर होते हैं तो बढ़ते माल भाड़े, शिपिंग में देरी और बीमा लागत में वृद्धि से निर्यात पर असर पड़ेगा।

नोएडा, मेरठ, कानपुर के औद्योगिक केंद्रों पर असर

अमेरिका और ईरान के बीच गंभीर संघर्ष कर आर्थिक प्रभाव ऊर्जा बाजारों, व्यापार मार्गों और वैश्विक आपूर्ति शृंखलाओं के माध्यम से यूपी तक भी पहुंचेगा। पब्लिक पालिसी रणनीतिकार हसन याकूब के अनुसार भारत में लगभग 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात होता है। इसमें एक बड़ा हिस्सा स्ट्रेट आफ होर्मुज से होकर गुजरता है। इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को बढ़ाएगी। नोएडा, कानपुर, मेरठ और लखनऊ जैसे औद्योगिक केंद्रों में इससे उत्पादन और लाजिस्टिक्स लागत बढ़ सकती है।

कई उद्योगों पर असर

प्रदेश के निर्यात आधारित उद्योग भी प्रभावित हो सकते हैं। कानपुर और आगरा का लेदर और फुटवियर उद्योग, मुरादाबाद का पीतल हस्तशिल्प, भदोही का कालीन उद्योग तथा नोएडा और वाराणसी के वस्त्र व परिधान क्षेत्र की वैश्विक व्यापार पर निर्भरता काफी है। कृषि क्षेत्र पर भी अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि यूरिया और अमोनिया जैसे उर्वरकों के कई कच्चे इनपुट मध्य पूर्व की आपूर्ति शृंखलाओं से जुड़े हैं।

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पर्यटन कारोबार को भी झटका

खाड़ी क्षेत्र में फैली अस्थिरता ने यूपी के पर्यटन कारोबार को झटका दिया है। अब तक तकरीबन 500-700 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान का अनुमान है। हालात और बिगड़े तो नुकसान का आंकड़ा काफी बड़ा हो सकता है। आगरा में ट्रैवेल एजेंसी फर्म ट्रैवेल पैशन के मैनेजिंग पार्टनर माधव कटारा बताते हैं कि उनके यहां 90 प्रतिशत से ज्यादा बुकिंग रद्द हो गई है। 14 मार्च से ब्रिटिश ग्रुप के लिए बुकिंग थी, लेकिन रद्द कर दिया है। इटली छोड़कर ज्यादातर देशों के टूरिस्ट अक्तूबर से मार्च के बीच ही आते हैं। फ्लाइट कैंसिल या डायवर्ट हो रही हैं। आगे के हालात के लिए भी सभी सशंकित हैं। ऐसे में वे आने का प्लान छोड़ रहे हैं। आगरा के ही एक अन्य ट्रैवेल एजेंसी के प्रतिनिधि बताते हैं कि घरेलू पर्यटकों के बिजनेस पर कोई असर नहीं है।

पारसी नववर्ष नवरोज (मध्य मार्च के बाद) के दौरान बड़ी संख्या में ईरानी पर्यटक आगरा और वाराणसी आते हैं। इस बार इनके आने की संभावना न के बराबर हैं। विदेशी पर्यटकों पर निर्भर होटल और गाइड समुदाय में चिंता है। वाराणसी में अप्रूव्ड टूरिस्ट गाइड एसोसिएशन के पूर्व महासचिव संजय गुप्ता बताते हैं कि विदेशी पर्यटकों के लिए ट्रेवेल एजेंसियां गाइडों के साथ अनुबंध करती हैं। अब जब उनकी ही बुकिंग कैंसिल हो रही तो हमारा भी नुकसान हो रहा है। वह कहते हैं कि यूरोपीय देशों से जुलाई और अगस्त में अच्छी आमद होती है। अगर अशांति का दौर लंबा खिंचा तो उस वक्त पर भी असर आ सकता है। स्पेन से आने वाले पर्यटकों की संख्या में कमी है।

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