iran israel war has caused a stir in market with gold silver prices rising sharply prices of these commodities risen ईरान-इजराइल युद्ध से बाजार में हलचल, सोना-चांदी में भारी उछाल; बढ़ गए इन चीजों के दाम, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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ईरान-इजराइल युद्ध से बाजार में हलचल, सोना-चांदी में भारी उछाल; बढ़ गए इन चीजों के दाम

ईरान और इजराइल युद्ध ने यूपी के बाजार में भी जबरदस्त हलचल पैदा कर दी है। लखनऊ में सराफा से लेकर ड्राईफ्रूट और चिकनकारी उद्योग तक संकट में पड़ गया है। सोमवार को लखनऊ के चौक सराफा बाजार में सोना 1.75 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी 3.05 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई।

Mon, 2 March 2026 10:50 PMAjay Singh वरिष्ठ संवाददाता, लखनऊ
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ईरान-इजराइल युद्ध से बाजार में हलचल, सोना-चांदी में भारी उछाल; बढ़ गए इन चीजों के दाम

Iran-Israel War 2026: ईरान और इजराइल युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था के साथ-साथ यूपी के बाजार में भी जबरदस्त हलचल है। लखनऊ में सराफा से लेकर ड्राईफ्रूट और चिकनकारी उद्योग तक संकट में पड़ गया है। सोमवार को चौक सराफा बाजार में सोना 1.75 लाख प्रति 10 ग्राम और चांदी 3.05 लाख प्रति किलोग्राम के स्तर पर पहुंच गई। ऑल इंडिया ज्वैलर्स एडं गोल्डस्मिथ फेडरेशन के प्रदेश संयोजक विनोद माहेश्वरी ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितता के दौर में निवेशक शेयर बाजार के बजाय सोने को सबसे सुरक्षित विकल्प मानते हैं। उन्होंने आगाह किया कि यदि युद्ध का तनाव कम नहीं हुआ, तो घरेलू बाजार में सोने की कीमत जल्द ही दो लाख रुपये के आंकड़े को भी पार कर सकती है।

चौक सराफा एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष आदिश जैन ने बताया कि इजराइल-ईरान संघर्ष के कारण बड़े निवेशकों का झुकाव सोने की तरफ बढ़ा है। बाजार में मांग और आपूर्ति का संतुलन बिगड़ने से फिलहाल कीमतों में गिरावट की संभावना बहुत कम नजर आ रही है। वहीं उत्तर प्रदेश आदर्श व्यापार मंडल के सराफा प्रभारी क्षितिज अवस्थी व इंडियन बुलियन ज्वेलर्स एसोसिएशन के नार्थ हेड अनुराग रस्तोगी ने बताया कि वर्तमान में बुलियन में निवेश करने से बचें, क्योंकि कीमतों में भारी अस्थिरता है। बाजार किसी भी दिशा में मुड़ सकता है, जो लोग शादियों के लिए या व्यक्तिगत उपयोग के लिए गहने खरीदना चाहते हैं, वे अपनी जरूरत के अनुसार खरीदारी जारी रख सकते हैं।

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ड्राईफ्रूट बाजार: पिस्ता, मामरा बादाम और ईरानी खजूर की कीमतों में उछाल

ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष का सीधा असर अब मेवा बाजार पर दिखने लगा है। ईरान से आने वाली मेवों की खेप रुकने और आपूर्ति शृंखला बाधित होने के कारण अमीनाबाद, रकाबगंज, सुभाष मार्ग बाजारों में अफरा-तफरी का माहौल है। महज चार दिनों में पिस्ता, मामरा बादाम, ईरानी खजूर और अंजीर जैसी वस्तुओं की कीमतों में 15 से 25 प्रतिशत तक की जबरदस्त बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ईरान से समुद्री और हवाई मार्ग प्रभावित होने के कारण कारोबार पूरी तरह चरमरा गया है।

लखनऊ किराना कमेटी के महामंत्री प्रशांत गर्ग ने बताया कि थोक बाजार में एक ही दिन में कीमतों में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया है। उन्होंने बताया कि हरा पिस्ता 1000 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 1850 रुपये प्रति किलो हो गया है। इसी प्रकार मामरा बादाम 3600-3800 रुपये से बढ़कर 4000-4200 रुपये प्रति किलो हो गया। फतेहगंज के मेवा कारोबारी मुकेश अग्रवाल ने बताया कि यदि यह युद्ध लंबा खिंचता है, तो आने वाले दिनों में सूखे मेवे के दाम और बढ़ सकते हैं। ईरानी अंजीर और पेशावरी पिस्ता की आवक कम होने से स्टॉकिस्ट भी सतर्क हो गए हैं। कारोबारियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों पर असुरक्षा के कारण माल की लोडिंग बंद है, जिससे स्थानीय स्तर पर जमा स्टॉक की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं।

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लखनऊ का चिकनकारी उद्योग संकट में, करोड़ों का माल फंसा

मध्य पूर्व में गहराते युद्ध के बादलों ने न केवल वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला दिया है, बल्कि लखनऊ के पारंपरिक चिकनकारी उद्योग पर भी असर पड़ा है। ईरान और इजराइल के बीच जारी सैन्य संघर्ष के कारण अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पूरी तरह बाधित हो गई है, जिससे स्थानीय कारोबारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं। लखनऊ से हर साल ईरान, सऊदी अरब, दुबई, कुवैत और बहरीन जैसे देशों में भारी मात्रा में चिकनकारी के कपड़ों का निर्यात किया जाता है। दो दिनों के भीतर ही लगभग पांच करोड़ रुपये का तैयार माल होल्ड हो गया है। परिवहन मार्ग असुरक्षित होने और उड़ानों के प्रभावित होने से निर्यातकों के शिपमेंट रुक गए हैं।

लखनऊ चिकनकारी हैंडीक्रॉफ्ट एसोसिएशन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुरेश छाबलानी ने बताया कि ईद के त्योहार को देखते हुए लखनऊ से दिल्ली और मुंबई के बंदरगाहों के रास्ते ईरान सहित अन्य खाड़ी देशों में बड़े पैमाने पर माल भेजा जाता है। ईद के ठीक बाद गर्मियों के नए ऑर्डर शुरू होते हैं, लेकिन वर्तमान अनिश्चितता के कारण विदेशी खरीदार नए ऑर्डर देने से कतरा रहे हैं। माल भेजने के लिए मुख्य रूप से समुद्री और हवाई मार्गों का उपयोग होता है, जो युद्ध क्षेत्र के करीब होने के कारण फिलहाल जोखिम भरे बने हुए हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष संजीव अग्रवाल ने बताया कि यदि यह तनाव लंबा खिंचता है, तो लखनऊ के हजारों कारीगरों और छोटे उद्यमियों के भुगतान पर भी इसका असर पड़ सकता है। कारोबारियों का कहना है कि पूंजी फंसने से अगले सीजन की तैयारी करना मुश्किल हो जाएगा।

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