बेटे को काम नहीं दिया जा रहा था; रिंकू सिंह के इस्तीफे पर पिता का छलका दर्द, बोले- सच्चा देशभक्त है
IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने काम न मिलने से नाराज होकर मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। इस मामले में उनके पिता ने कहा कि उनके बेटे को काम नहीं दिया जा रहा था, जबकि वह देशभक्त, ईमानदार और मेहनती अधिकारी हैं।उसने 100 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा किया था। जिस कारण हमला भी हुआ था।

यूपी कैडर के 2023 बैच के IAS अधिकारी रिंकू सिंह राही ने काम न मिलने से नाराज होकर मंगलवार को इस्तीफा दे दिया। इस मामले में उनके पिता ने कहा कि उनके बेटे को काम नहीं दिया जा रहा था, जबकि वह देशभक्त, ईमानदार और मेहनती अधिकारी हैं। शासन प्रशासन के लिए गोली भी खाई।
उनके पिता कहा कि रिंकू सिंह राही ने साल 2009 में समाज कल्याण अधिकारी रहते हुए मुजफ्फरनगर में करीब 100 करोड़ रुपये के घोटाले का खुलासा किया था। उस दौरान उन पर जानलेवा हमला हुआ, जिसमें उनकी एक आंख और जबड़ा चला गया, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। गंभीर परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने मेहनत जारी रखी और वर्ष 2023 में IAS बने। अपने बेटे पर गर्व है और वह जो भी फैसला लेता है, देशहित में लेता है। उन्होंने यह भी कहा कि उनका परिवार साधारण जीवन जीता है और आज भी मेहनत के दम पर घर चल रहा है। 2009 में जब गोली लगी थी, वह मुजफ्फरनगर आने-जाने में खत्म कर दी। हमारे पास कुछ नहीं है। हमारा बैंक बैलेंस देख लीजिए।
शासन-प्रशासन के लिए खाई गोली
रिंकू सिंह के इस्तीफा से पहले कोई बात हुई के सवाल पर उनके पिता ने कहा, ‘नहीं, इस्तीफा नहीं दिया है। उन्होंने काम मांगा है, उसे काम क्यों नहीं दे रहे? इतनी मेहनत से वह आईएएस बना है। यहां तक कि गोली भी खाई है। शासन प्रशासन के लिए और सरकार के लिए इतना कुछ करने के बाद भी काम नहीं दिया जा रहा है।’
सरकार सही निर्णय ले
आईएएस अफसर के पिता ने कहा कि परिवार के लिए यही चाहते हैं कि वह देश हित में काम करें। बढ़िया ईमानदारी से काम करें और सरकार उस पर सही निर्णय ले। उसे ईमानदारी का फल दे। ऐसा न हो कि उसके ईमानदारी को ठुकराया जाए। नहीं ऐसे तो देश में ईमानदारी नहीं होंगे।
उठक-बैठक प्रकरण से शुरू हुआ विवाद, आखिरकार इस्तीफे पर खत्म
बीते साल 29 जुलाई को रिंकू सिंह राही ने शाहजहांपुर के पुवायां तहसील का कार्यभार संभाला था। चार्ज लेने के बाद वह तहसील परिसर का निरीक्षण करने निकले। इसी दौरान उन्होंने चार लोगों को खुले में पेशाब करते हुए देख लिया। मौके पर ही उन्होंने चारों को सजा के तौर पर उठक-बैठक लगाने का निर्देश दिया। इन चार लोगों में एक अधिवक्ता का मुंशी भी शामिल था। जैसे ही यह बात वकीलों को पता चली, उन्होंने इसे अपमानजनक बताते हुए विरोध शुरू कर दिया। देखते ही देखते तहसील परिसर का माहौल गरमा गया और अधिवक्ता धरनास्थल पर एकत्र होकर नारेबाजी करने लगे।
विवाद बढ़ता देख एसडीएम राही खुद धरनास्थल पहुंचे और स्पष्ट कहा कि खुले में पेशाब करना गलत है, चाहे कोई भी हो। इस पर वकीलों ने उनसे भी उठक-बैठक लगाने को कहा। जवाब में एसडीएम ने खुद को तहसील का सबसे बड़ा अधिकारी बताते हुए कान पकड़कर उठक-बैठक शुरू कर दी। इस दौरान एक मुंशी ने उन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने सख्त लहजे में उसे चेतावनी दी और दोबारा उठक-बैठक लगाई।




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