कंकाल बनाने की धमकी से मानसिक अस्पताल तक: IAS रिंकू सिंह राही का मोहभंग, मांगा पुराना पद
त्यागपत्र में आईएएस रिंकू सिंह राही ने पूर्व सेवा का अनुभव साझा करते हुए लिखा है कि ईमानदारी न छोड़ने पर तत्कालीन उच्चाधिकारी द्वारा उन्हें फोन पर धमकी दी गई थी कि ‘गन्ने के खेत में लाश नहीं, बल्कि कंकाल मिलेगा।’ उन्हें मानसिक अस्पताल भेजने की साजिश भी रची गई।

UP News: आईएएस रिंकू सिंह राही ने मंगलवार को अपनी नौकरी से इस्तीफा दे दिया। उन्होंने इसे तकनीकी त्यागपत्र (Technical Resignation) लिखा और पूर्व सेवा (आईएएस बनने से पहले रिंकू सिंह पीसीएस अधिकारी थे) वे वापसी की अपील की। राष्ट्रपति को संबोधित अपने लंबे त्यागपत्र में आईएएस रिंकू सिंह राही ने ईमानदारी के नाते झेली गई तकलीफों का विस्तार से विवरण देने की कोशिश की है। इसके साथ ही उन्होंने प्रशासनिक व्यवस्था में व्याप्त ‘कुतन्त्र’ और अनैतिकता से तंग आने की बात लिखी है। पूर्व सेवा के अनुभवों को साझा करते हुए रिंकू सिंह राही ने यहां तक लिखा है कि उन्हें विभाग के उच्चाधिकारी से कंकाल बना दिए जाने तक की धमकी मिली थी।
अपनी पूर्व सेवा में जिला समाज कल्याण अधिकारी रहने के दौरान रिंकू सिंह राही ने जब करोड़ों के घोटाले के खुलासे का प्रयास किया तो उन्हें उन्हें माफियाओं और भ्रष्ट तंत्र के भीषण कोप का सामना करना पड़ा। उन पर प्राणघातक हमला किया गया, जिसमें वे बाल-बाल बचे लेकिन स्थायी रूप से दिव्यांग हो गए। त्यागपत्र में रिंकू सिंह राही ने लिखा है कि ईमानदारी न छोड़ने पर तत्कालीन उच्चाधिकारी द्वारा उन्हें फोन पर धमकी दी गई थी कि ‘गन्ने के खेत में लाश नहीं, बल्कि कंकाल मिलेगा।’ यही नहीं उन्हें मानसिक अस्पताल भेजने की साजिश भी रची गई। जब उन्होंने घोटाले के खिलाफ आमरण अनशन शुरू किया, तो जांच करने के बजाय उन्हें 'मानसिक रूप से अस्वस्थ' घोषित कर जबरन मानसिक चिकित्सालय भेज दिया था। हालांकि डॉक्टर ने उन्हें मानसिक रूप से अस्वस्थ नहीं पाया और अस्पताल में भर्ती नहीं किया।
आईएएस रिंकू सिंह राही ने अपने लंबे त्यागपत्र में आईएएस की नौकरी को लेकर अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं। उन्होंने बताया है कि उन्हें उम्मीद थी कि आईएएस बनने के बाद वे बेहतर बदलाव ला पाएंगे, लेकिन यहां भी स्थिति 'ढाक के तीन पात' ही रही। त्यागपत्र में उन्होंने उल्लेख किया है कि शाहजहांपुर में तैनाती के दौरान जब उन्होंने जनहित में नवाचार किए और भ्रष्टाचार पर रोक लगानी चाही, तो बिना किसी सुनवाई के उन्हें पदमुक्त कर 'राजस्व परिषद' से संबद्ध कर दिया गया। उन्होंने शाहजहांपुर में एसडीएम रहने के दौरान की घटना का जिक्र करते हुए बताया है कि तहसील परिसर में क्या कुछ हुआ था। उन्होंने यह भी बताया है कि आखिर उन्होंने वकीलों के सामने उठक-बैठक क्यों लगाई थी? बता दें कि इसी घटना के बाद आईएएस रिंकू सिंह राही को शाहजहांपुर एसडीएम के पद से हटाकर राजस्व परिषद से संबद्ध कर दिया गया। जुलाई 2025 से अभी तक कोई तैनाती या महत्वपूर्ण काम न मिलने से तंग आकर उन्होंने इस्तीफा दे दिया।
उन्होंने लिखा है-‘कार्यभार ग्रहण करने के प्रथम दिवस ही तहसील परिसर में खुले में मूत्र त्याग कर रहे एक व्यक्ति को रोका गया तथा शौचालय उपयोग हेतु प्रेरित किया गया। व्यक्ति द्वारा अस्वीकार करने पर उसकी आर्थिक स्थिति को ध्यान में रखते हुए दंड के स्थान पर चेतावनी स्वरूप उठक-बैठक लगाने को कहा गया, जिसे उनके द्वारा स्वीकार किया गया। तत्पश्चात, तहसील परिसर में कई दिनों से चल रही हड़ताल के संदर्भ में अधिवक्ताओं से वार्ता की गई। वार्ता के दौरान शौचालयों की खराब स्थिति पर उत्तरदायित्व का प्रश्न उठाया गया, जिस पर मैंने तहसील के उच्चाधिकारी के रूप में स्वयं का उत्तरदायित्व स्वीकार किया। सुशासन की भावना के अंतर्गत, स्वयं को पब्लिक सरवेंट तथा आमजन को देश का वास्तविक मालिक मानते हुए-अर्थात़ जनता के प्रति उत्तरदायित्व एवं सेवा भाव को सर्वोपरि रखते हुए-अधीनस्थ कार्मिकों को प्रेरित करने तथा आमजन का विश्वास अर्जित कर उनके सहयोग को सुनिश्चित करने हेतु, एक नवाचार के रूप में मैंने समान सांकेतिक दंड अधिरोपित किया।’
नो वर्क नो पे
रिंकू सिंह राही ने त्यागपत्र में बताया है कि लंबे समय तक बिना किसी स्पष्ट जिम्मेदारी के 'प्रतीक्षारत' रखे जाने के कारण उन्होंने नैतिक आधार पर 'काम नहीं तो वेतन नहीं' के सिद्धांत पर वेतन लेने से भी इनकार कर दिया था। हालांकि बाद में अधिकारियों के समझाने और आश्वासन पर उन्होंने इसे स्वीकार किया।
अपने सात पन्नों के त्यागपत्र में रिंकू सिंह राही ने प्रशासनिक ढांचे पर गहरे सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा है कि वर्तमान व्यवस्था में संवैधानिक मूल्यों पर आधारित कार्यशैली के लिए कोई स्थान नहीं है। उनके अनुसार, ईमानदार अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों से हटाकर 'प्रतीक्षारत' या बिना काम वाले पदों पर बिठा दिया जाता है, ताकि वे सिस्टम में हस्तक्षेप न कर सकें। उन्होंने इस बात पर चिंता भी जताई की आईएएस संवर्ग की सेवा की शुरुआत में फील्ड में तैनाती के अवसर न मिलने से आगे चलकर कई पेशेवर दिक्कतें आ सकती हैं। त्यागपत्र में उन्होंने वर्तमान सेवा से बेहतर अपनी पुरानी सेवा को चुना है और उम्मीद जताई है कि वहां वे बिना किसी अनावश्यक समझौते के समाज कल्याण के कार्यों में अपना योगदान दे सकेंगे।




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