चौखट पर रखी थी पति की अर्थी, पत्नी ने दिया बच्चे को जन्म, बेटे के दुनिया में आने से पहले चल बसा पिता
यूपी के उन्नाव में एक तरफ दरवाजे पर पति की अर्थी सज रही थी तो दूसरी ओर आंगन में किलकारी गूंज उठी ।परिजन समझ ही नहीं पा रही थी कि खुशी मनाए या ग़म ।

यूपी के उन्नाव से दर्दनाक मामला सामने आया है। यहां एक घर में युवक ने आत्महत्या कर ली। आत्महत्या के बाद घर में कोहराम मच गया। पति की मौत से पत्नी पूरी तरह से बदहवास हो चुकी थी। दरवाजे पर पति का शव रखा था। अंतिम संस्कार के लिए अर्थी को सजाया जा रहा था। इसी दौरान घर में किलकारी गूंज पड़ी। कुछ घंटे पहले जिस व्यक्ति ने मौत को गले लगाया था वह अब पिता बन चुका था। फिलहाल बच्चे ने जन्म तो ले लिया, लेकिन उसे नहीं पता था कि उसके पिता का साया उसके सिर से उठ चुका है। इस घटना को जिसने भी सुना उसी की आंखों से आंसू छलक पड़े।
पूरा मामला अचलगंज थाना क्षेत्र के पड़रीकला गांव का है। यहां के रहने वाले मनोज का संगीता नाम की महिला से शादी हुई थी। उसके तीन बच्चे थे। पत्नी नौ महीने की गर्भवती थी। गुरुवार को मनोज ने जानवर बांधने वाली रस्सी से लटककर जान दे दी। मनोज की आत्महत्या से पूरा परिवार टूट गया। पत्नी बदहवास हो गई। परिवार पर मानों पहाड़ सा टूट पड़ा हो। मनोज ने आत्महत्या क्यों कि इसकी अभी तक किसी को जानकारी नहीं मिली। आत्महत्या की सूचना पर पुलिस पहुंची और मनोज के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पुलिस मनोज की आत्महत्या की वजह पता लगाने में लगी है। पोस्टमार्टम के बाद शव को घर लाया गया तो सभी दहाड़े मारकर रोने लगे। मनोज के अंतिम संस्कार की तैयारी चल रही थी। इसी दौरान उसकी गर्भवती पत्नी को पेन उठ गया। एक तरफ नाते-रिश्तेदार मनोज की अर्थी सजाने में लगे थे तो वहीं दूसरी ओर उसकी पत्नी ने बच्चे को जन्म दे दिया। इस मंजर ने हर किसी की आंख में आंसू ला दिए।
जानवर बांधने वाले हाते में लटका मिला था शव
27 नवंबर थाना क्षेत्र के ग्राम पड़री कला में 38 वर्षीय युवक मनोज पुत्र बुद्धू का शव उसी के जानवर बांधने वाले हाते में बनी कोठरी में धन्नी के सहारे फांसी पर लटका मिला था। मृतक के बड़े भाई राजू ने बताया कि मृतक मनोज काफी दिन से काम न मिलने से उलझन में रहता था और घर में शराब पीकर लड़ाई झगड़ा किया करता था, जिससे परिवार में कलह थी। मृतक की पत्नी संगीता गांव के प्राथमिक स्कूल में रसोइया है। जिससे बच्चों करन 14 ,अर्जुन 11, व छोटी बेटी मुस्कान 8 समेत पूरे परिवार का भरण पोषण करती थी।
चौथी संतान आने से उसे चिंता थी कि खर्चा कहां से आएगा? पति एक तो कुछ कर नहीं रहा था दूसरे जोकुछ मिलता भी था उसकी शराब पी जाता था। इसी बात को लेकर कई बार बहस भी हुई। संगीता ने कई बार कहा कि कोई काम ढूंढ लो ताकि बच्चों को पाला जा सके। मनोज भी एक आध दिन की मजदूरी करता। स्थाई काम ढूंढने का प्रयत्न भी किया लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिर हार कर मौत को गले लगा लिया। संगीता ने पति खोया और अब चार चार बच्चों के लालन पालन की जिम्मेदारी भी आ पड़ी। बेटा होने की खुशी से कही अधिक गम व चिन्ता की लकीरें संगीता के चेहरे पर देखी जा सकती।




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