प्रशासक बने ग्राम प्रधान कैसे करेंगे काम? कब लेनी होगी DM की इजाजत; शासन ने डिटेल में बताया
प्रशासक कोई नीति विषयक निर्णय नहीं लेंगे। हालांकि अत्यावश्यक और विशेष स्थितियों में ग्राम पंचायत के प्रशासक नीति संबंधी प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिए से DM के सामने प्रस्तुत कर स्वीकृति प्राप्त कर सकेंगे। किसी भी नए काम से पहले प्रशासक जिलाधिकारी से स्वीकृति प्राप्त की जाएगी।

उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में हो रही देरी के बीच ग्राम प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद पहली बार उन्हें प्रशासक की जिम्मेदारी सौंपी गई है लेकिन इसके साथ ही उन्हें कुछ शर्तों का पालन भी करना होगा। शनिवार को पंचायत राज विभाग के प्रमुख सचिव द्वारा जारी आदेश में इसके बारे में बताया गया है। आदेश के मुताबिक ग्राम पंचायत प्रशासक डीएम की अनुमति से ही नए काम करा सकेंगे। वे पुराने निर्माण कार्यों का भुगतान अपने स्तर से कर सकेंगे। उत्तर प्रदेश में प्रशासक की जिम्मेदारी संभाल रहे 57694 निवर्तमान ग्राम प्रधानों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं।
आदेश में कहा गया है कि 25 मई को जारी आदेश में प्रदेश की ग्राम पंचायतों के सामान्य निर्वाचन के बाद गठित की जाने वाली नई ग्राम पंचायतों की पहली बैठक के लिए तय की जाने वाली तारीख तक या अधिकतम छह महीने की अवधि के लिए, जो भी पहले हो, निर्वतमान ग्राम प्रधानों को ग्राम पंचायतों में प्रशासक के रूप में नियुक्त किया गया है। 26 मई को ग्राम पंचायतों का कार्यकाल खत्म होन के बाद 27 मई से निवर्तमान ग्राम प्रधानों को ग्राम पंचायतों में प्रशासक के रूप में सामान्य (रूटीन) कामों का निर्वहन के लिए नामित किए जाने के लिए संबंधित जिले के डीएम को प्राधिकृत किया गया है। प्रशासक कोई नीति विषयक निर्णय नहीं लेंगे। हालांकि अत्यावश्यक और विशेष स्थितियों में ग्राम पंचायत के प्रशासक नीति संबंधी प्रस्ताव जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिए से डीएम के सामने प्रस्तुत कर स्वीकृति प्राप्त कर सकेंगे।
आदेश के मुताबिक ग्राम पंचायतों में प्रशासक की नियुक्ति होने से पहले की तारीख में स्वीकृत/ अनुमोदित/ दैनिक/ निर्माणाधीन/ मरम्मत कार्यों/ पूर्ण हो चुके कार्यों का भौतिक और तकनीकी मूल्यांकन कराते हुए भुगतान प्रशासकों द्वारा पहले की तरह कराया जा सकता है लेकिन उक्त प्रशासक नियुक्त होने की तारीख के बाद किसी भी नए काम को क्रियान्वित करने से पहले प्रशासक द्वारा जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिए से संबंधित जिले के जिलाधिकारी से स्वीकृति प्राप्त की जाएगी। ऐसी ग्राम पंचायतें जहां पहले से प्रशासनिक समिति का गठन किया गया है या प्रधान का पद खाली है, वहां सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) को प्रशासक के रूप में नामित किया जाएगा।
यदि केंद्र या राज्य सरकार की कोई नई योजना या आयोग की संस्तुतियां जारी होती हैं तो प्रशासक द्वारा ऐसे प्रस्ताव को जिला पंचायत राज अधिकारी के जरिए से जिलाधिकारी के सामने पेश कर स्वीकृति प्राप्त की जाएगी।




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