High Court upset with 71 district judges for not submitting correct reports in pending charge sheet cases लंबित चार्जशीट मामलों में ढिलाई, सही रिपोर्ट नहीं देने वाले 71 जिला जजों से हाईकोर्ट नाराज, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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लंबित चार्जशीट मामलों में ढिलाई, सही रिपोर्ट नहीं देने वाले 71 जिला जजों से हाईकोर्ट नाराज

हाईकोर्ट ने वर्षों से लंबित चार्जशीट पर रिपोर्ट दाखिल करने में लापरवाही बरतने पर 71 जिला जजों पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेशों की अनदेखी न्यायिक अनुशासन और न्याय व्यवस्था की बुनियाद को प्रभावित करती है।

Sat, 14 Feb 2026 06:50 AMPawan Kumar Sharma विधि संवाददाता, प्रयागराज
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लंबित चार्जशीट मामलों में ढिलाई, सही रिपोर्ट नहीं देने वाले 71 जिला जजों से हाईकोर्ट नाराज

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आपराधिक मामलों में वर्षों से लंबित चार्जशीट पर रिपोर्ट दाखिल करने में लापरवाही बरतने पर प्रदेश के अधिकतर जिला जजों पर नाराजगी जताई है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आदेशों की अनदेखी न्यायिक अनुशासन और न्याय व्यवस्था की बुनियाद को प्रभावित करती है।

यह टिप्पणी न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने प्रयागराज की उर्मिला मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए की। हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2025 को प्रदेश के सभी जिला जजों को एक सप्ताह के भीतर ऐसी चार्जशीट की वर्षवार जानकारी देने का निर्देश दिया था, जिनमें वर्ष 2004 से 2024 तक आरोप तय नहीं हुए हैं। प्रत्येक आपराधिक न्यायालय से अलग-अलग आंकड़े देने को कहा गया था। कोर्ट को 75 में से 49 जिलों से रिपोर्ट प्राप्त हुई। गोंडा और बरेली ने समय विस्तार मांगा। 26 जिलों से कोई रिपोर्ट नहीं आई और न ही समय बढ़ाने का अनुरोध किया गया।

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इन जिलों ने नहीं रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने कहा कि यह आचरण प्रथमदृष्टया गंभीर है, हालांकि बड़े संस्थागत हित में एक सप्ताह का अंतिम अवसर दिया जाता है। कोर्ट ने पाया कि हमीरपुर, मथुरा, बांदा, अमरोहा, हापुड़, पीलीभीत, उन्नाव, आजमगढ़, मुजफ्फरनगर, भदोही, सुल्तानपुर, रायबरेली और महाराजगंज की रिपोर्ट अधूरी है। साथ ही बस्ती, अंबेडकर नगर, चित्रकूट, फतेहपुर, उरई, लखनऊ, मिर्जापुर, मुरादाबाद, सहारनपुर, सिद्धार्थनगर, हरदोई, औरैया, मऊ, कुशीनगर, कन्नौज, बहराइच, बलरामपुर, रामपुर, अलीगढ़, ललितपुर, संत कबीर नगर, श्रावस्ती, सीतापुर, गाजियाबाद, महोबा, गाजीपुर, लखीमपुर, कानपुर और बिजनौर की रिपोर्ट को निर्देशों की पूर्ण अवहेलना बताया। कोर्ट ने कहा कि कई जिलों ने दशकों से लंबित मामलों की कुल संख्या जानबूझकर नहीं दी गई।

इन जिलों से भी नाराज हाईकोर्ट

आगरा, बुलंदशहर, फर्रुखाबाद और अयोध्या की रिपोर्ट को निर्देशों के अनुरूप पाया गया। विशेष रूप से आगरा के जिला जज के प्रयासों की कोर्ट ने सराहना की। कोर्ट ने उन्नाव, कुशीनगर, कन्नौज, संत कबीर नगर, श्रावस्ती, सीतापुर, गाजियाबाद और हापुड़ में जिला जज की बजाय ऑफिसर इंचार्ज द्वारा रिपोर्ट भेजने पर भी आपत्ति जताई। कहा कि यह लापरवाही या अवमानना है या नहीं, इस पर बाद में विचार किया जाएगा। कोर्ट ने आगरा, बुलंदशहर, फर्रुखाबाद और अयोध्या को छोड़कर अन्य सभी जिला जजों को 27 फरवरी तक निर्देश के अनुसार रिपोर्ट दाखिल करने का आदेश दिया है।

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अमेठी को मिली छूट

अमेठी जिला न्यायालय के संबंध में फिलहाल रिपोर्ट से छूट दी गई है क्योंकि वह 2011 से अपने भवन में संचालित नहीं हो रहा और नए भवन की आधारशिला गत 17 जनवरी को रखी गई है। कोर्ट ने मामले में सहायता के लिए अधिवक्ता प्रतिमा विश्वकर्मा और जुबेरिया काज़मी को एमिकस क्यूरी नियुक्त किया है। रजिस्ट्रार अनुपालन को आदेश की प्रति प्रदेश के सभी जिला जजों को तत्काल भेजने का निर्देश दिया है।

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