यूपी में शिक्षकों के समायोजन को लेकर हाई कोर्ट का आया आदेश, कहा-ऐसे पूरी करें प्रक्रिया
याचिकाओं में शिक्षकों के समायोजन और तबादला संबंधी 14 नवंबर 2025 के शासनादेश को चुनौती दी गई थी। वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे, नवीन शर्मा और अन्य वकीलों का कहना था कि समायोजन और स्थानांतरण की प्रक्रिया मनमाने तरीके से अपनाई जा रही है। हर जिले में अपने-अपने तरीके से प्रक्रिया अपनाई जा रही है।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रदेश परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के समायोजन और स्थानांतरण में पारदर्शी प्रक्रिया अपनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि जिलास्तरीय कमेटी शिक्षकों से प्रत्यावेदन लेकर विद्यालयों में छात्र-शिक्षक अनुपात के हिसाब से समायोजन की प्रकिया पूरी करे। तब तक विद्यालयों में यथास्थिति कायम रखी जाए। प्रदेश के कई जिलों के सैकड़ों शिक्षकों की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह आदेश न्यायमूर्ति मंजूरानी चौहान ने दिया है।
याचिकाओं में शिक्षकों के समायोजन और तबादला संबंधी 14 नवंबर 2025 के शासनादेश को चुनौती दी गई थी। याचियों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक खरे, नवीन शर्मा और अन्य वकीलों का कहना था कि समायोजन और स्थानांतरण की प्रक्रिया मनमाने तरीके से अपनाई जा रही है। नियमावली में दिए निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण हर जिले में अपने-अपने तरीके से प्रक्रिया अपनाई जा रही है। मध्य सत्र में समायोजन का औचित्य नहीं जबकि वर्तमान सत्र मार्च में समाप्त होने वाला है।
कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद विस्तृत निर्णय में कहा कि स्थानांतरण सेवा की एक सामान्य शर्त है और अदालतें आमतौर पर तबादला आदेशों में दखल नहीं देतीं। कोर्ट ने कहा कि यह स्थापित सिद्धांत है कि नीतिगत मामलों में अदालतें अपील प्राधिकरण की तरह कार्य नहीं कर सकतीं और न ही यह जांच सकती हैं कि कोई अन्य नीति अधिक उचित या बेहतर हो सकती थी।
कोर्ट ने कहा कि न्यायिक समीक्षा का उद्देश्य नीति की बुद्धिमत्ता का पुनर्मूल्यांकन करना नहीं, बल्कि यह देखना है कि निर्णय प्रक्रिया कानून के अनुरूप है या नहीं। कोर्ट ने कहा कि कि यू-डायस पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों की सत्यता और सत्यापन को लेकर अस्पष्टता है, जिससे शैक्षिक ढांचे पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
याचियों को प्रत्यावेदन देने का निर्देश
अदालत ने कहा कि याचिकाओं में संस्थानवार स्वीकृत पद, कार्यरत संख्या और अधिशेष/कमी का स्पष्ट विवरण प्रस्तुत नहीं किया गया है। ऐसे में व्यक्तिगत तथ्यों की जांच प्रशासनिक स्तर पर ही संभव है। इसलिए प्रत्येक याचिकाकर्ता एक सप्ताह के भीतर जिलाधिकारी की अध्यक्षता में गठित जिला स्तरीय समिति के समक्ष पृथक एवं विस्तृत प्रत्यावेदन प्रस्तुत करे। कोर्ट ने समिति को एक माह के भीतर कारणयुक्त आदेश पारित करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि एक माह तक या सक्षम प्राधिकारी द्वारा निर्णय लिए जाने तक यथा स्थिति कायम रखी जाए। कोर्ट ने संबंधित प्राधिकारी को यू-डायस पोर्टल पर उपलब्ध आंकड़ों का तत्काल सत्यापन एवं अद्यतन करने तथा संशोधित आंकड़ों के आधार पर शिक्षकों की तैनाती सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
कोर्ट ने दिए यह निर्देश
-तबादले सत्यापित एवं अद्यतन आंकड़ों पर आधारित हों।
-जिलास्तर पर स्वीकृत पद, कार्यरत शिक्षकों की संख्या और छात्र नामांकन का समेकित डेटा अनिवार्य रूप से देखा जाए।
-प्रक्रिया पारदर्शी, निष्पक्ष और गैर-भेदभावपूर्ण हो।
-समायोजन को दंडात्मक या उत्पीड़न के औजार के रूप में इस्तेमाल न किया जाए।
-प्रशासनिक आवश्यकता और छात्र हित सर्वोपरि रहे।




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