high court dismisses ples of female students who pressured classmate to wear burqa and eat meat बुर्का पहनो और मीट खाओ...क्लासमेट पर दबाव बनाने वाली छात्राओं को झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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बुर्का पहनो और मीट खाओ...क्लासमेट पर दबाव बनाने वाली छात्राओं को झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

हाईकोर्ट ने क्लासमेट को पर बुर्का पहनने और इस्लाम धर्म अपनाने लिए विवश करने की आरोपी 12वीं कक्षा की दो छात्राओं के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया है। आरोप है कि सहपाठी को बुर्का पहनने के साथ मीट खाने के लिए भी दबाव बनाया जा रहा था।

Fri, 17 April 2026 04:29 PMPawan Kumar Sharma भाषा, प्रयागराज
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बुर्का पहनो और मीट खाओ...क्लासमेट पर दबाव बनाने वाली छात्राओं को झटका, हाईकोर्ट ने खारिज की याचिका

UP News: इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने क्लासमेट को कथित तौर पर बुर्का पहनने और इस्लाम धर्म अपनाने लिए विवश करने की आरोपी 12वीं कक्षा की दो छात्राओं के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने से इनकार कर दिया। आरोप है कि सहपाठी को बुर्का पहनने के साथ मीट खाने के लिए भी दबाव बनाया जा रहा था। वहीं, आरोपित छात्राओं के खिलाफ उप्र विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई थी।

न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए युवाओं द्वारा दूसरों पर अपना धर्म या विश्वास थोपने की चिंताजनक प्रवृत्ति को भी संज्ञान में लेते हुए कहा कि अधिनियम के तहत इस रुख पर अंकुश लगाया जाना आवश्यक है। अदालत ने गुरुवार को दिए निर्णय में कहा, 'हमें इस स्थिति के प्रति सचेत रहना चाहिए कि 2021 का अधिनियम समाज में उत्पन्न हो रही ऐसी स्थिति को रोकने के लिए बनाया गया है, जिसमें कुछ लोग अपने धर्म का प्रचार प्रसार नहीं करते, बल्कि उसे दूसरों पर थोपते हैं। अगर युवाओं में इस तरह का रुझान देखने को मिलता है तो यह और भी चिंताजनक है।'

अदालत ने कहा, 'यह युवाओं के जीवन का वह समय है, जहां उन्हें शिक्षा के विभिन्न क्षेत्रों में अपने कौशल को विकसित करने के बारे में अधिक सोचना चाहिए और खुद को समाज व राष्ट्र की सेवा में समर्पित करना चाहिए। अगर इस स्थिति को शुरुआती चरण में ही नहीं रोका गया तो इससे कानून का उद्देश्य विफल हो जाएगा। जिस उद्देश्य के लिए यह कानून बनाया गया है, उसे शुरू में ही अभियोगों को समाप्त कर विफल नहीं किया जा सकता।'

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क्या था मामला

दरअसल, ये मामला मुरादाबाद जिले का है। जहां 12वीं कक्षा की छात्रा के भाई ने प्राथमिकी दर्ज कराई थी और आरोप लगाया था कि उसकी बहन को याचिकाकर्ता अलीना और शाबिया समेत पांच मुस्लिम छात्राओं ने स्थानीय ट्यूशन सेंटर पर बुर्का पहनने और इस्लाम धर्म स्वीकार करने के लिए मजबूर किया। पीड़िता ने दिसंबर, 2025 में एक विशेष घटना का उल्लेख भी किया, जिसमें इन पांच लड़कियों ने उसे बुर्का पहनाया था। पीड़िता का यह भी आरोप है कि आरोपी लड़कियों ने उसे मांसाहारी खाने के लिए लुभाया।

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याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को 12वीं कक्षा की परीक्षाएं देनी हैं और वह उक्त प्राथमिकी की वजह से पढ़ाई पर ध्यान देने में असमर्थ है। अदालत ने 11 पृष्ठों के निर्णय में कहा कि केस डायरी में एक गली में लगे सीसीटीवी कैमरे की वीडियो का जिक्र है, जिसमें पीड़िता को याचिकाकर्ता और अन्य सह आरोपियों द्वारा बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया जा रहा है। अदालत ने यह भी पाया कि केस डायरी में जांच के दौरान संग्रहित कई सामग्रियां हैं। जिससे प्रथम दृष्टया एक ऐसे मामले का खुलासा होता है जिसकी गहन जांच की जरूरत है। उधर, अदालत ने सभी परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उक्त प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया।

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