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पत्नी को बताए बिना पति ने दायर की याचिका, हाईकोर्ट हुआ नाराज, लगाया तगड़ा जुर्माना

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पत्नी की जानकारी और सहमति के बिना उसकी ओर से 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' (Habeas Corpus) याचिका दाखिल करने वाले पति अनुज पांडेय पर नाराजगी जताई है। याचिका खारिज कर दी और 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। 

Thu, 16 April 2026 01:27 PMYogesh Yadav लाइव हिन्दुस्तान, प्रयागराज, विधि संवाददाता
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पत्नी को बताए बिना पति ने दायर की याचिका, हाईकोर्ट हुआ नाराज, लगाया तगड़ा जुर्माना

पत्नी की जानकारी के बिना उसकी ओर से याचिका दाखिल करने वाले पति की याचिका हाईकोर्ट ने हर्जाने के साथ खारिज़ कर दी। कोर्ट ने कर्नलगंज प्रयागराज के अनुज पांडेय की ओर से अपनी पत्नी की अवैध हिरासत के आरोप में दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण (हेबियस कॉर्पस) याचिका को अदालत की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग मानते हुए खारिज कर दिया है। न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने याचिकाकर्ता की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए उस पर 25 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है, जिसे दो महीने के भीतर हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन में जमा करने का निर्देश दिया गया है।

अदालत में सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि याचिकाकर्ता अनुज पांडेय ने अपनी पत्नी शिक्षा जायसवाल,को उसकी जानकारी या सहमति के बिना ही इस मामले में दूसरी याचिकाकर्ता के रूप में शामिल किया था। शिक्षा जायसवाल के वकील ने अदालत को सूचित किया कि उनके पति ने डरा-धमकाकर और धोखाधड़ी से उनके हस्ताक्षर प्राप्त किए थे, जिसके आधार पर फर्जी हलफनामे और विवाह प्रमाण पत्र तैयार किए गए। पत्नी ने स्वयं अपने पति के खिलाफ डिजिटल ब्लैकमेलिंग और साइबर स्टाकिंग जैसी गंभीर शिकायतों के साथ प्राथमिकी भी दर्ज कराई है।

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मामले की गंभीरता तब और बढ़ गई जब याचिकाकर्ता का लंबा आपराधिक इतिहास सामने आया। रिकॉर्ड के अनुसार, अनुज पांडेय के खिलाफ हत्या के प्रयास, धोखाधड़ी, गैंगस्टर एक्ट और आर्म्स एक्ट के तहत कई मामले लंबित हैं। अदालत ने कहा कि वह एक आदतन अपराधी है और उसके खिलाफ 15 हजार रुपये का इनाम भी घोषित है। कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा के लिए बनी 'बंदी प्रत्यक्षीकरण' जैसी महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था का इस्तेमाल गंदे हाथों से अदालत आने वाले और तथ्यों को छिपाने वाले लोग नहीं कर सकते।

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न्यायालय ने प्रयागराज पुलिस को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता की गतिविधियों पर कम से कम एक वर्ष तक कड़ी निगरानी रखी जाए। साथ ही, पुलिस को यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया है कि यदि वह किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि में शामिल पाया जाता है या अपनी पत्नी की सुरक्षा के लिए खतरा बनता है, तो उसकी जमानत रद्द करने की प्रभावी कार्रवाई की जाए। इसके अतिरिक्त, कोर्ट ने प्रयागराज के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट से दो महीने के भीतर अनुज पांडेय के खिलाफ चल रहे मामलों की प्रगति रिपोर्ट भी मांगी है।

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