हेडमास्टर और BSA के बाबू के बीच वाट्सएप कॉल पर होती थी बात, टीचर सुसाइड केस में हुए गिरफ्तार
पुलिस की जांच में पता चला कि कृष्ण मोहन सिंह, ओमकार सिंह और अर्पणा तिवारी की नियुक्ति शिक्षक कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, गौरी बाजार में 2016 में हुई थी। साल-2021 में नियुक्ति संबंधी जांच के बाद उनके खिलाफ FIR दर्ज हुई थी और मामला हाईकोर्ट तक लंबित रहा।

UP News: उत्तर प्रदेश के देवरिया के शिक्षक खुदकुशी कांड में पूर्व प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह का अपने इलाके में काफी रसूक है। उनकी पत्नी गांव की प्रधान हैं। पुलिस की जांच में दो मामले में अनिरुद्ध सिंह की भूमिका संदिग्ध मिलने पर पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है। पता चला है कि बिना अधिकृत पद के ही शिक्षकों की नियुक्ति में पूर्व प्रधानाध्यापक की भूमिका तो थी ही, जब शिक्षकों ने इस मामले में शिकायत शुरू की तब प्रधानाध्यापक ने बिचौलिए की भूमिका में आकर बीएसए कार्यालय के लिपिक को पैसा भी दिलवा दिया। पूर्व प्रधानाध्यापक की व्हाट्सएप कॉल से लिपिक से हमेशा बात होती थी।
पुलिस की जांच में सामने आया कि कृष्ण मोहन सिंह, ओमकार सिंह और अर्पणा तिवारी की नियुक्ति शिक्षक कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, गौरी बाजार में 2016 में हुई थी। वर्ष 2021 में नियुक्ति संबंधी जांच के बाद उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज हुई थी और मामला हाईकोर्ट तक लंबित रहा। हाईकोर्ट के आदेश पर तीनों शिक्षक बीएसए ऑफिस दौड़ रहे थे। खास बात यह थी कि जब इनकी नियुक्ति हुई तब कोई अधिकृत पद नहीं था लेकिन बिना पद के ही नियुक्ति कर दी गई। बताया जा रहा है कि इसमें भी पैसा लिया गया था और पूर्व प्रधानाध्यापक की भूमिका नियुक्ति में रही थी।
जब शिक्षक परेशान हो गए तब पूर्व प्रधानाध्यापक ने ही सेटिंग भी कराई। जांच में यह भी सामने आया है कि आरोपी और लिपिक के बीच व्हाट्सएप कॉल के जरिए लगातार बातचीत होती थी। पुलिस डिजिटल साक्ष्यों, कॉल डिटेल और बैंक ट्रांजेक्शन की गहन जांच कर रही है। मामले में अन्य आरोपियों की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी की पत्नी वर्तमान में ग्राम प्रधान हैं। पुलिस का कहना है कि जांच के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।
48 लाख रुपये घूस दिलाने में कराई थी सेटिंग
कृष्ण मोहन सिंह और उनके दो साथी शिक्षकों ने बीएसए ऑफिस के बाबू संजीव सिंह ने 48 लाख रुपये घूस के रूप में लिया था। कृष्ण मोहन ने अपने सुसाइड नोट में लिखा था बीएसए देवरिया शालिनी श्रीवास्तव के बाबू संजीव सिंह से सम्पर्क किया तो पता चला कि दोबारा नौकरी चाहिए तो 20-20 लाख रुपये देने पड़ेंगे। पूर्व प्रधानाध्यापक अनिरुद्ध सिंह ने 16-16 लाख रुपये में सेटिंग कराई। टोटल 48 लाख रुपये घूस की रकम तय की गई। 27 जुलाई 2025 को हम तीनों ने 7-7-7 टोटल 21 लाख रुपये देवरिया मेन रोड पर बीएसए जाने वाली रोड पर पौधशाला के पास दिया। कृष्ण मोहन ने सुसाइड नोट में बताया कि 13 मई को मेरी दुर्घटना हुई थी इसलिए मैं मेरे हिस्से का सात लाख रुपये ओमकार सिंह और उनके भैया द्वारा ले जाकर दिया गया। जबकि अर्पणा तिवारी अपने पति के साथ पैसा देने गई थी। 14 अगस्त 2025 को हम तीनों को बीएसए ऑफिस बुलाया गया और कुछ दिन बाद बाकी की रकम 9-9-9 लाख रुपये (27 लाख) की मांग की गई।
पैसे के इंतजाम को खेत और गहने गिरवी रखने पड़े
ओंकार सिंह ने अपनी पत्नी के गहने तथा 2 बीघा जमीन रेहन रखकर पैसे का इंतजाम किया। पैसे का दवाव बढ़ने पर कृष्ण मोहन सिंह ने भी अपनी पत्नी के गहने 4 लाख 24 हजार में एसबीआई ब्रांच पादरी बाजार में 17 नवम्बर 25 को गिरवी रखा और उसके पहले रिश्तेदार से पैसा उधार लिया। अपर्णा तिवारी और ओंमकार सिंह ने 16 नवम्बर को अपना पैसा ले जाकर संजीव सिंह को दे दिया था। कृष्ण मोहन सिंह पर पैसा देने का दबाव था। बीएसए का बाबू रविवार को ही पैसा लेता था। लिहाजा 23 नवम्बर को नौ लाख रुपये ले जाकर उन्होंने दिया था।
बीजेपी एमएलसी बोले-भ्रष्टाचार में डूबे हुए हैं शिक्षा विभाग के अधिकारी
एमएलसी देवेन्द्र प्रताप सिंह ने देवरिया में सेवारत शिक्षक कृष्ण मोहन सिंह सैंथवार की आत्महत्या को लेकर पूरे शिक्षा विभाग को कटघरे में खड़ा करते हुए बीएसए और उनके सहयोगियों की गिरफ्तारी की मांग की है। एमएलसी ने कहा कि प्रदेश के बेसिक शिक्षा विभाग में तैनात कई अफसर और उनके कर्मचारी लूट और भ्रष्टाचार में आकण्ठ डूबे हुए हैं। एमएलसी ने शनिवार को घटना के विरोध में पैदल मार्च का ऐलान किया है। बताया कि शनिवार को वह और उनके सहयोगी इन्दिरा बाल विहार तिराहा पर एकत्र होकर गोलघर से शास्त्री चौक होते हुए डॉ. भीमराव अम्बेडकर की प्रतिमा तक जाएंगे। इसके बाद अधिकारियों को ज्ञापन सौंपेंगे।




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