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बेसिक शिक्षा अधिकारी के दफ्तर का सिस्टम देख DM भी दंग, BSA के खिलाफ शासन को भेजी संस्तुति

बीएसए कार्यालय के ‘सिस्टम’ के खेल में एक शिक्षक की हुई मौत की घटना ने प्रशासन को भी हिलाकर रख दिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद एक साल तक पत्रावली ठंडे बस्ते में पड़ी रही। डीएम जब बीएसए कार्यालय पहुंची और एक वर्ष से फाइल का निस्तारण नहीं होने की बात सामने आई तो वह बीएसए पर बिफर पड़ीं।

Tue, 24 Feb 2026 03:11 PMAjay Singh संवाददाता, देवरिया
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बेसिक शिक्षा अधिकारी के दफ्तर का सिस्टम देख DM भी दंग, BSA के खिलाफ शासन को भेजी संस्तुति

उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के गौरीबाजार के मदरसन विद्यालय के सहायक अध्यापक की खुदकुशी के प्रकरण में सोमवार को शासन और जिला स्तर पर गठित जांच कमेटी ने जांच की। वहीं डीएम दिव्या मित्तल खुद बेसिक शिक्षा अधिकारी के दफ्तर पहुंची। वह यह जानकर दंग रह गईं कि शिक्षक के पक्ष में हाईकोर्ट का फैसला आने के एक साल बाद तक बीएसए ऑफिस में इससे संबंधित पत्रावली ठंडे बस्ते में पड़ी रही। इस बात को लेकर वह बीएसए पर बिफर पड़ीं। उधर, सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह की आत्महत्या के बाद डीएम द्वारा सीडीओ राजेश कुमार सिंह की अध्यक्षता में जिला स्तर पर गठित जांच टीम ने भी बीएसए को दोषी माना है। इस टीम में ज्वाइंट मजिस्ट्रेट श्रुति शर्मा, एडीआईओएस नीलेश पांडेय भी हैं। टीम की जांच रिपोर्ट के आधार पर डीएम ने सोमवार की देर शाम बीएसए को सस्पेँड करने की संस्तुति शासन को भेज दी है।

दोनों टीमें एक साथ पहुंची

प्रकरण में जांच के लिए डीएम द्वारा गठित टीम सोमवार की सुबह बीएसए कार्यालय जांच करने पहुंची। इस बीच स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी द्वारा गठित जांच टीम भी आ गईं। एक घंटे के बाद बीएसए को भी कार्यालय बुलाया गया और उनसे एक घंटे तक पूछताछ की । दोनों टीमों ने देर रात तक जांच की। इस दौरान बीएसए भी कार्यालम में मौजूद रहीं।

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शिक्षक ने बीएसए, लिपिक पर लगाए थे गंभीर आरोप

गौरीबाजार स्थित कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय, मदरसन के सहायक अध्यापक कृष्ण मोहन सिंह ने गोरखपुर में 20 फरवरी की रात फंदा लगा कर जान दे दी थी। उन्होंने बीएसए शालिनी श्रीवास्तव, लिपिक संजीव सिंह समेत अन्य लोगों पर प्रताड़ना का आरोप लगाते हुए सुसाइड नोट और वीडियो भी जारी किया था।

डीएम का कड़ा रुख, कार्रवाई तय

बीएसए कार्यालय के ‘सिस्टम’ के खेल में एक शिक्षक की हुई मौत की घटना ने प्रशासन को भी हिलाकर रख दिया है। हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद एक वर्ष तक पत्रावली ठंडे बस्ते में पड़ी रही। सोमवार को डीएम दिव्या मित्तल जब बीएसए कार्यालय पहुंची और एक वर्ष से उच्च न्यायालय की फाइल का निस्तारण नहीं होने की बात सामने आई तो वह बीएसए पर बिफर पड़ीं। जिलाधिकारी का तेवर देख उसी समय अंदाजा हो गया था कि इस मामले में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के खिलाफ कार्रवाई तय है।

गौरीबाजार विकास खंड के कृषक लघु माध्यमिक विद्यालय मदरसन विद्यालय में कृष्ण मोहन सिंह सहायक अध्यापक थे। फर्जीवाड़े की शिकायत के बाद वर्ष 2022 में एसटीएफ की कार्रवाई पर अन्य शिक्षकों के साथ इन्हें भी बर्खास्त कर दिया गया था। फरवरी 2025 में कृष्ण मोहन सिंह के पक्ष में उच्च न्यायालय का आदेश आया, बीएसए को इस मामले का निस्तारण करना था, लेकिन एक वर्ष बाद भी इस मामले का निस्तारण नहीं हो सका। वेतन बहाली के लिए दो अन्य शिक्षकों के साथ ही कृष्ण मोहन सिंह ने भी 16 लाख रुपये दिए थे। इसके बावजूद उनका वेतन भुगतान नहीं किया गया और आखिरकार उन्होंने 20 फरवरी की रात फांसी लगा कर जान दे दी। आत्महत्या के बाद उनके चार पन्ने के सुसाइट नोट व वीडियो से हड़कंप मच गया। जिसके बाद जिला स्तर के साथ ही शासन से गठित टीम मामले की जांच कर रही है। इसी बीच दोपहर को डीएम दिव्या मित्तल खुद बीएसए कार्यालय पहुंची। उन्होंने बीएसए व जांच कमेटी से उच्च न्यायालय के आदेश को लेकर जानकारी मांगी। जब बीएसए ने बताया कि फरवरी 2025 में यह आदेश आया है। इसके बाद उन्होंने पूछा कि उच्च न्यायालय के मामले में एक वर्ष बाद भी निस्तारण क्यों नहीं हुआ? इस पर बीएसए बोलीं कि पटल परिवर्तन के चलते यह विलंब हुआ। डीएम ने कहा कि पटल परिवर्तन के चलते अपने हाईकोर्ट के आदेश में निर्णय लेने में 1 साल लगा दिया। आप यह क्या कह रही हैं? इसके बाद बीएसए कोई जवाब नहीं दे पाई जिस पर डीएम भड़क उठी और उन्होंने बीएसए को फटकार लगाई। जिलाधिकारी ने यह भी पूछा कि कोर्ट के इस तरह के कितने आदेश हैं जिस पर बीएसए चुप्पी साधे रहीं। उसी समय इस बात का अंदाज़ हो गया था कि मामले में बीएसए शालिनी श्रीवास्तव के खिलाफ सख्त कार्रवाई तय है। देर शाम जांच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी। जिसमें दोषी मिलने पर डीएम दिव्या मित्तल ने बीएसए को निलंबित करने के लिए शासन को अपनी संस्कृति भेज दी।

कल तक कार्यालय में जिनके थे चर्चे, वह भी गायब नजर आए

बीएसए कार्यालय के कुछ चहेते चेहरे कार्यालय में सोमवार को नजर नहीं आए। माना जा रहा है कि जांच के घेरे में वह भी आ सकते हैं। बीएसए कार्यालय में अगर ठीक से जांच हो तो इस तरह के कई मामले सामने आएंगे।

कुछ कर्मचारियों पर भी उठ रहे सवाल

बीएसए कार्यालय में तैनात कुछ कर्मचारियों की पैठ बहुत ही मजबूत है। कुछ नजराना लेते हैं तो कुछ के परिवार के सदस्यों को प्रबंधकीय विद्यालयों में नौकरियां दी गई हैं। सूत्रों का कहना है कि बीएसए कार्यालय में कार्य करने वाले अधिकांश कर्मचारियों के परिवार के सदस्यों को नौकरी दी गई है। इसकी भी जांच होनी चाहिए।

कार्यालय में मंडराते नजर आए शिक्षक नेता

कुछ शिक्षक नेता हैं, जो बीएसए कार्यालय में ही नजर आते हैं। सोमवार को जांच कमेटी जब पहुंची और डीएम भी बीएसए कार्यालय में पहुंची तो अपने को शिक्षक नेता कहने वाले शिक्षक बीएसए कार्यालय में ही घूमते नजर आए।

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आजाद हिन्द सेना ने किया प्रदर्शन

बीएसए की इस मामले में गिरफ्तारी की आवाज उठने लगी है। आजाद हिंद सेना वाहिनी के संस्थापक ऋषि पांडेय के नेतृत्व में लोग बीएसए कार्यालय पहुंचे और जांच कमेटी के सामने ही प्रदर्शन किया। उनका कहना था कि बीएसए के चलते कार्यालय में भ्रष्टाचार बढ़ गया है। अगर जल्द कार्रवाई नहीं होती है तो वाहनी बड़ा आंदोलन खड़ा करने को बाध्य होगी।

पुलिस जल्द ले सकती है सीसी फुटेज

गोरखपुर में इस मामले में केस दर्ज है। इसकी विवेचना भी पुलिस ने शुरू कर दी है। जल्द ही गोरखपुर पुलिस जांच के लिए देवरिया बीएसए कार्यालय पहुंचेगी और मामले की जांच करेगी। गोरखपुर पुलिस सीसी फुटेज भी अपने कब्जे में लेगी। सीसी फुटेज में कई अन्य मामले भी खुल सकते हैं।

कैंडल मार्च निकाल दिवंगत शिक्षक को दी श्रद्धांजलि

राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ ने सोमवार की शाम को कैंडल मार्च निकालकर दिवंगत शिक्षक को श्रद्धांजलि दी। शिक्षकों ने सदर बीआरसी परिसर से कैंडल मार्च निकालकर सिविल लाइन रोड होते हुए सुभाष चौक पहुंचे और वहां शिक्षक को श्रद्धांजलि अर्पित की। सदर विधयक डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी ने कैंडल मार्च में शामिल होकर दिवंगत शिक्षक को शोक-संवेदना व्यक्त की।

महासंघ के जिला संयोजक जयशिव प्रताप चन्द ने कहा कि एक शिक्षक द्वारा की गई आत्महत्या की घटना से समस्त शिक्षक समाज व्यथित और आहत है। यह घटना न केवल शिक्षा जगत के लिए, बल्कि पूरे समाज के लिए गहन चिंता और आत्ममंथन का विषय है। सह संयोजक विवेक मिश्र ने कहा कि इस घटना ने बीएसए कार्यालय की कार्यप्रणाली पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है। संगठन द्वारा अधिकारियों को संज्ञानित कराने के बाद भी महीनों तक अध्यापकों की समस्याएं कार्यालय द्वारा लम्बित रखी जाती हैं। हाल के महीनों में विभिन्न प्रकार से शिक्षकों का उत्पीड़न बढ़ा है। वरिष्ठ शिक्षक प्रतिनिधि मदन शाही ने कहा कि शैक्षणिक माहौल को बेहतर बनाये रखने के लिए विभाग में सुचिता और शिक्षकों में भरोसा कायम किया जाना अति आवश्यक है। इस दौरान अशोक तिवारी, गोविंद सिंह, प्रमोद कुशवाहा, शशांक मिश्रा, आशुतोष नाथ तिवारी, अभिषेक जायसवाल, सत्यप्रकाश तिवारी, ज्ञानेश यादव, आशुतोष मिश्र, रजनीकांत तिवारी, अमरेंद्र आदि शिक्षक मौजूद रहे।

...तो एक विद्यालय में दो प्रधानाचार्य, आरोप

शिक्षक कृ़ष्ण मोहन सिंह की मौत के बाद बीएसए कार्यालय के ‘सिस्टम’ की पोल परत दर परत खुलती जा रही है। सोमवार को कृषक उमा विद्यालय सिसई के प्रबंध समिति की सदस्य रेखा यादव जांच कमेटी के अध्यक्ष सीडीओ राजेश कुमार सिंह के सामने पेश हुई और बीएसए पर गंभीर आरोप लगाई। सीडीओ ने जांच कराकर कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।

रेखा यादव सोमवार को बीएसए कार्यालय पहुंची। सीडीओ को एक पत्रक देते हुए आरोप लगाया कि विद्यालय के प्रधानाचार्य प्रकाश पांडेय हैं। विद्यालय के दो शिक्षकों की सेवा 2021 में ही समाप्त कर दी गई लेकिन बीएसए व कार्यालय के एक लिपिक की मिलीभगत से प्रकाश पांडेय की जगह सेवासमाप्त किए गए शिक्षक को प्रधानाध्यापक दर्शाते हुए जनवरी 2026 में वेतन बिल पारित कर दिया गया। 1.44 करोड़ रुपये राजकोष से निकाला गया है। प्रधानाचार्य की वैधता सिविल न्यायालय तथा जिला विद्यालय निरीक्षक के आदेशों से पहले ही स्पष्ट हो चुकी थी, इसके बावजूद विभागीय स्तर पर विपरीत कार्रवाई की गई और प्रस्तुत साक्ष्यों को नजरअंदाज कर एकपक्षीय निर्णय लिया गया। इस मामले में जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए।

क्या बोलीं डीएम

डीएम दिव्या मित्तल ने कहा कि कोर्ट के आदेश के बावजूद एक वर्ष तक बीएसए ने कार्रवाई नहीं की। रिपोर्ट के आधार पर बीएसए के निलंबन की संस्तुति शासन को भेजी गई है।

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