Ganges symbol faith not merely Hindus but entire nation High Court grant bail accused individuals who hosted Iftar party गंगा सिर्फ हिंदू नहीं, पूरे देश की आस्था की प्रतीक, HC ने इफ्तार पार्टी करने वाले आरोपियों को दी जमानत, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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गंगा सिर्फ हिंदू नहीं, पूरे देश की आस्था की प्रतीक, HC ने इफ्तार पार्टी करने वाले आरोपियों को दी जमानत

इलाहाबाद हाई कोर्ट का कहना था कि गंगा सिर्फ हिंदुओं ही नहीं पूरे देश की आस्था की प्रतीक हैं। हालांकि अदालत ने माफीनामे को देखते हुए और भविष्य में गलती न दोहराने के आश्वासन को पर जमानत याचिका मंजूर कर की है।

Fri, 15 May 2026 08:05 PMDinesh Rathour प्रयागराज, विधि संवाददाता
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गंगा सिर्फ हिंदू नहीं, पूरे देश की आस्था की प्रतीक, HC ने इफ्तार पार्टी करने वाले आरोपियों को दी जमानत

Allahabad Highcourt Order: बनारस में गंगा की बीच धारा में इफ्तार पार्टी करने और मांसाहारी भोजन कर अवशेष गंगा में फेंकने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट की दो अलग-अलग पीठों ने आठ आरोपियों की जमानत मंजूर कर की है। आरोपियों की ओर से हलफनामा दाखिल कर माफी मांगी गई। हलफनामे में कहा गया कि वे अपने कृत्य के लिए शर्मिंदा है तथा भविष्य में ऐसी गलती नहीं करेंगे।

कोर्ट का कहना था कि गंगा सिर्फ हिंदुओं ही नहीं पूरे देश की आस्था की प्रतीक हैं। हालांकि अदालत ने माफीनामे को देखते हुए और भविष्य में गलती न दोहराने के आश्वासन को पर जमानत याचिका मंजूर कर की है। जमानत याचिका पर न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ल और न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा की पीठों ने अलग-अलग सुनवाई की। राज्य सरकार की ओर से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने ज़मानत का कड़ा विरोध किया।

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रमजान महीने में गंगा में मुस्लिम युवकों ने की थी इफ्तार पार्टी

गौरतलब है कि मार्च 2026 में रमजान माह के दौरान कुछ मुस्लिम युवकों ने वाराणसी के पंचगंगा घाट के पास नाव पर इफ्तार की थी। आरोप है कि इसमें मांसाहारी भोजन किया गया और अवशेष गंगा में फेंक दिए गए। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामले ने तूल पकड़ लिया। जिससे एक वर्ग के लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। जिसके बाद पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज़ कर आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया। इनकी ज़मानत अर्ज़ी वाराणसी की जिला अदालत ने खारिज़ कर दी जिसके बाद मोहम्मद आजाद अली, मोहम्मद तहसीम, निहाल अफरीदी, मोहम्मद तौसीफ और मोहम्मद अनस की जमानत याचिका पर न्यायमूर्ति राजीव लोचन शुक्ल की पीठ ने और न्यायमूर्ति जितेंद्र कुमार सिन्हा ने मोहम्मद समीर, मोहम्मद अहमद रजा और मोहम्मद फैजान की ज़मानत अर्जी पर सुनवाई की।

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आरोपियों ने शपथ पत्र देकर मांगी माफी

आरोपियों की ओर से दाखिल शपथपत्र में कहा गया कि उनका उद्देश्य किसी की धार्मिक भावना आहत करना नहीं था। साथ ही यह भी बताया गया कि किसी भी आरोपी का आपराधिक इतिहास नहीं है। दूसरी ओर राज्य सरकार की तरफ से अपर महाधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने धार्मिक स्थलों की पवित्रता से जुड़े कई महत्वपूर्ण न्यायिक फैसलों का हवाला देते हुए जमानत का विरोध किया। हालांकि कोर्ट ने कहा कि गंगा केवल हिंदुओं की ही नहीं, बल्कि पूरे देश की आस्था का प्रतीक है और हर धर्म के लोग इसका सम्मान करते हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी को भी गंगा को अपवित्र करने का अधिकार नहीं है, लेकिन आरोपियों के माफीनामे और अंडरटेकिंग को देखते हुए उन्हें जमानत दी जा रही है।

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