Compensation Including Interest Must Be Paid for Death Accident While on Duty High Court Directs UP Government ड्यूटी के दौरान हादसे में मौत पर ब्याज सहित देना होगा मुआवजा, यूपी सरकार को हाई कोर्ट का निर्देश, Uttar-pradesh Hindi News - Hindustan
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ड्यूटी के दौरान हादसे में मौत पर ब्याज सहित देना होगा मुआवजा, यूपी सरकार को हाई कोर्ट का निर्देश

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि 28 जुलाई 2010 का शासनादेश एक जनवरी 2006 से लागू किया गया था और याची के पति की मौत आठ मई 2006 को दुर्घटना में हुई थी इसलिए ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में मौत के लिए उसकी पत्नी मुआवजा पाने की हकदार है।

Mon, 11 May 2026 08:47 PMDinesh Rathour प्रयागराज, विधि संवाददाता
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ड्यूटी के दौरान हादसे में मौत पर ब्याज सहित देना होगा मुआवजा, यूपी सरकार को हाई कोर्ट का निर्देश

Allahabad Highcourt: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में पुलिस कांस्टेबल की मौत पर राज्य सरकार को उसकी पत्नी को छह प्रतिशत ब्याज सहित दस लाख रुपये मुआवजे का भुगतान आठ सप्ताह में करने का निर्देश दिया है। यह आदेश न्यायमूर्ति अनीस कुमार गुप्ता ने दिवंगत पुलिस कांस्टेबल कमलेश की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।

कोर्ट ने कहा कि 28 जुलाई 2010 का शासनादेश एक जनवरी 2006 से लागू किया गया था और याची के पति की मौत आठ मई 2006 को दुर्घटना में हुई थी इसलिए ड्यूटी के दौरान दुर्घटना में मौत के लिए उसकी पत्नी मुआवजा पाने की हकदार है। कोर्ट ने याची को मुआवजा देने से इनकार करने के आदेश को रद्द कर दिया और कहा कि मौत से मुआवजे का भुगतान होने तक छह प्रतिशत ब्याज भी दिया जाए। याची के अधिवक्ता अशोक कुमार ने कोर्ट को बताया कि याची के पति पुलिस कांस्टेबल थे। फ़िरोज़ाबाद के बसई मोहम्मदपुर थाने में तैनाती के दौरान मुख्यालय से डाक लेकर वापस आते समय दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गए और बाद में उनकी मौत हो गई।

राज्य सरकार ने 19 अगस्त 1988 के शासनादेश के हवाले से मुआवजा देने से इनकार कर दिया, जिसे याचिका में चुनौती दी गई थी। कोर्ट ने राज्य सरकार के तर्क को नहीं माना और कहा 2010 का शासनादेश 2006 में लागू हो चुका था इसलिए याची मुआवजा पाने की हकदार है।2010 के शासनादेश से 1988 के शासनादेश की शर्तों में बदलाव किया गया है और अब 1988 का शासनादेश लागू नहीं होगा।

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अब बिना कारण बताए किसी को गिरफ्तार नहीं करेगी पुलिस

इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश सरकार ने आश्वासन दिया है कि राज्य में किसी भी व्यक्ति को गिरफ्तारी के कारण और आधार बताए बिना गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। सरकार ने कहा कि पुलिस गिरफ्तारी की प्रक्रिया को, 2023 और सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप सख्ती से लागू करेगी। इस संबंध में राज्य सरकार ने एक सर्कुलर जारी किया है। सर्कुलर के पैरा पांच में कहा गया है कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्ता परितोष कुमार मालवीय द्वारा तैयार गिरफ्तारी मेमो और अन्य एजेंसियों द्वारा प्रयोग में लाए जा रहे मेमो पर व्यापक विचार के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक गिरफ्तारी मेमो तैयार किया है ताकि एकरूपता लाई जा सके। परितोष मालवीय वर्तमान में अपर शासकीय अधिवक्ता प्रथम के पद कार्य कर रहे हैं। सर्कुलर में कहा गया है कि अधिवक्ता मालवीय द्वारा उपलब्ध कराए गए मेमो में पांच बिंदु दिए गए हैं जिनका पालन किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के समय किया जाएगा।

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