दुधवा का गब्बर, विलेन जैसा नाम लेकिन हीरो जैसा काम; जानें क्यों इस बाघ की हो रही इतनी चर्चा
दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में इन दिनों गब्ब’ नाम का बाघ चर्चा का केंद्र बना हुआ है। नाम भले ही फिल्म शोले के विलेन की याद दिलाता हो, लेकिन यह गब्बर वन विभाग के लिए किसी हीरो से कम नहीं। बाघ अपनी दमदार कद-काठी और राजसी अंदाज के कारण अलग पहचान बना चुका है।

दुधवा टाइगर रिजर्व के जंगलों में इन दिनों ‘गब्बर’ नाम का बाघ चर्चा का केंद्र बना हुआ है। नाम भले ही फिल्म शोले के विलेन की याद दिलाता हो, लेकिन यह गब्बर वन विभाग के लिए किसी हीरो से कम नहीं। किशनपुर सेंचुरी के घने जंगलों में रहने वाला यह बाघ अपनी दमदार कद-काठी, मजबूत चाल-ढाल और राजसी अंदाज के कारण अलग पहचान बना चुका है।
वन विभाग ने इसे दुधवा का सबसे ताकतवर बाघ घोषित किया है। अधिकारियों के अनुसार, गब्बर न केवल शारीरिक रूप से बेहद मजबूत है, बल्कि उसका इलाका भी अन्य बाघों की तुलना में सबसे बड़ा है। कैमरा ट्रैप से मिली जानकारी के अनुसार वह अकेले शिकार करता है और जंगल के संसाधनों पर उसका दबदबा है। हिरण और सांभर जैसे शाकाहारी जानवरों का शिकार करते हुए उसे कई बार देखा गया है, लेकिन मानव बस्तियों की ओर उसका कोई रुझान नहीं है।
दुधवा टाइगर रिजर्व देश के प्रमुख बाघ संरक्षण क्षेत्रों में शुमार है। यहां किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य के जंगलों में बाघों की अच्छी-खासी संख्या है। खास बात यह है कि यहां के बाघ पर्यटकों से घबराते नहीं, बल्कि कई बार खुले में आकर दिखाई भी देते हैं। इनमें ‘गब्बर’ सबसे ज्यादा आकर्षण का केंद्र बन गया है।

सोशल मीडिया पर छाया ‘गब्बर’
हाल ही में जंगल सफारी के दौरान पर्यटकों ने गब्बर को करीब से देखा, जिसके बाद उसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गए। एक पर्यटक ने लिखा, ‘गब्बर भाई ने जंगल के राजा होने का पूरा लुत्फ उठाया, डर नहीं लगा, सिर्फ रोमांच।’ दुधवा के पूर्व निदेशक रमेश पांडेय ने भी सबसे पहले इसकी तस्वीर साझा कर लोगों का ध्यान इसकी ओर खींचा था।

कद-काठी और चाल-ढाल ने बनाया खास
वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, गब्बर की उम्र करीब 8 से 10 वर्ष है। लंबा कद, चौड़ी छाती और तेज नजरें इसे अन्य बाघों से अलग बनाती हैं। इसकी मस्कुलर बॉडी और आत्मविश्वास से भरी चाल पर्यटकों को खासा प्रभावित करती है।
सुरक्षा के लिए विशेष निगरानी
गब्बर की लोकप्रियता और महत्व को देखते हुए वन विभाग ने इसकी सुरक्षा के लिए विशेष टीम गठित की है। जंगल में पेट्रोलिंग बढ़ा दी गई है, ताकि अवैध शिकार या मानवीय हस्तक्षेप से इसे कोई खतरा न हो। विशेषज्ञों का मानना है कि गब्बर जैसे बाघ जंगल की पारिस्थितिकी संतुलित रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। दुधवा में बाघों की बढ़ती संख्या संरक्षण प्रयासों की सफलता का संकेत है। 2022 की ऑल इंडिया टाइगर सेंसस के अनुसार, यहां कोर एरिया में बाघों की संख्या 135 तक पहुंच गई है, जो 2018 के 82 के मुकाबले 64 प्रतिशत अधिक है।




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