जैश से जुड़ा चौथी पास शाहबाज; ATS ने उठाया तो पता चला, परिवार से छिपकर चलाता था इंस्टाग्राम
कासगंज का शहबाज सिद्धीकी यूपी एटीएस के हत्थे चढ़ा है। जांच में पता चला कि वो जैश के पाकिस्तानी सदस्य मोहम्मद उमर से इंस्टाग्राम पर संपर्क में था। दोनों के बीच जिहाद, शरिया और भारत विरोधी संदेशों का आदान-प्रदान हुआ। वो घरवालों से बचकर झोपड़ी में इंस्टा चलाता था।

यूपी एटीएस की गिरफ्त में आया कासगंज के ठेठ गांव किसौल किलोनी का शहबाज सिद्धीकी झोंपड़ी में रहता था। मजदूरी के पैसों से दो मोबाइल खरीदकर चलाता था। महज चौथी पास शहबाज जैश ए मोहम्मद कमांडर मोहम्मद उमर से होने वाली चैट मैसेज व कॉल डिटेल डिलीट कर देता था। लेकिन यूपी एटीएस की सतर्क निगाहों से वो बच नहीं सका। यूपी एटीएस ने पूछताछ और गिरफ्तारी के बाद उसके दोनों मोबाइलों के मैसेज व कॉल डिटेल रिकवर करने और साक्ष्य के रूप में सुरक्षित करने के लिए विधि विज्ञान प्रयोगशाला भेज दिए।
शहबाज की कॉल डिटेल और चैट की जांच
पूछताछ में शहबाज ने बताया कि उसने इस्लामी जिहाद और शरिया कानून पर गंभीर बातें मोहम्मद उमर से कीं और मैसेज आदान प्रदान किए। कासगंज पुलिस अधीक्षक ओमप्रकाश सिंह का कहना है कि इस मामले में एटीएस अपना काम कर रही है। यूपी एटीएस की पूछताछ में शहवाज सिद्धीकी ने बताया कि, वह प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के सक्रिय पाकिस्तानी सदस्य मोहम्मद उमर से इंस्टाग्राम के जरिए संपर्क में था। 14 फरवरी को मोहम्मद उमर ने शहवाज को मैसेज किया कि, आज तो आपके भारत में ब्लैक डे होगा पर हमारे लिए खुशी का दिन है। बता दें कि इसी दिन भारतीय सेना पर पुलवामा हमला हुआ था।
शहबाज की मां नहीं जानती क्या है जैश ए मोहम्मद
गंगा कटरी में झोंपड़ियों में बैठे-बैठे शहबाज कब पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद कमांडर मोहम्मद उतर से जुड़ गया। इसका अंदाजा मेहनत मजदूरी करने वाले परिवार को भी नहीं लग सका। मां फहमिदा और चाचा हारून को जब पुलवामा आतंकी हमले से जुड़े आतंकवादी से शहबाज के जुड़े होने की बात पता चली तो होश उड़ गए। मां फहमिदा की मानें तो 18 फरवरी की दोपहर एक बजे टूटे फूटे घर और झोंपड़ियों पर गाड़ियों से आई एटीएस टीम शहबाज को उठा ले गई। मां के पूछने पर एटीएस ने अपने बारे में बताया। इसके बाद तो परिवार में अफरा तफरी मच गई।
झोपड़ी में जाकर मोबाइल चलाता था
मां फहमिदा ने बताया कि उनके बेटे के पास दो मोबाइल थे। वह उसने मेहनत मजदूरी करके खरीदे थे। शहबाज उनके सामने कुछ देर के लिए ही मोबाइल चलाता था। अगर झोंपड़ी में अकेले में मोबाइल चलाता था तो किससे जुड़ा रहता था, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं देता था। उन्होंने बताया कि, शहवाज अपने छह भाई बहनों के बीच में तीसरे नंबर का बेटा है। सबसे बड़े बेटे की शादी हो चुकी है। वह पक्के मकान में रहता है, जो अभी आधा अधूरा बना है। दो बेटियों की शादी हो चुकी हैं। शहबाज अपने भाइयों के साथ मजदूरी करके अपना खर्च चलाता था।
चाचा हारून बोले, हमें कुछ भी नहीं पता
चाचा हारून पास में ही घर में रहते हैं। उनका कहना है कि शहबाज देखने में ऐसा नहीं लगता था कि वह पाकिस्तान के लोगों से मोबाइल के जरिए जुड़ा था। हम मेहनत मजदूरी करने वाले क्या जानें कि कौन है जैश ए मोहम्मद और मोहम्मद उमर। हम तो अपने गांव में सादा जीवन गरीबी में रहकर गुजार रहे हैं, जब घर पर बाहर की पुलिस आई तब पता चला कि शहवाज ने कुछ ऐसा कर दिया है जो उसे बाहर से पुलिस उठाने आई है, बाद में पता चला कि, वह पुलिस एटीएस थी।




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